रोहतक में बदली कर्फ्यू की परिभाषा, कर्फ्यू के बाद भी शहर में जलती रहीं दुकानें
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शहर में हुए उपद्रव ने कानून, धाराएं और नियम सभी की परिभाषाएं बदलकर रख दीं। पहले धारा-144 की खूब धज्जियां उड़ती रहीं और बवाल ज्यादा बढ़ गया। फिर कर्फ्यू लगाया गया, तब भी शहर में दुकानें जलती रहीं। सड़कों पर भीड़भाड़ और आंदोलनकारी भी जुटे रहे। जब शहर में कर्फ्यू का असर दिखा ही नहीं तो अब आखिर एक घंटे की छूट कैसे मिल रही है?
जब आरक्षण आंदोलन का जाम शहर में पहुंचा और वह एमडीयू, पावर हाउस चौक, दिल्ली बाईपास पर लगा तो प्रशासन ने धारा-144 लगा दी। धारा-144 लगने के बाद पांच लोग एक साथ नहीं खड़े हो सकते तो उनके पास डंडा या धारदार हथियार भी नहीं होना चाहिए, लेकिन प्रशासन की धारा-144 की खूब धज्जियां उड़ीं।
उसकी केवल धज्जियां ही नहीं उड़ीं, बल्कि बवाल भी शुरू हो गया और वाहनों में आगजनी और तोड़फोड़ से लेकर डीएसपी संग मारपीट कर गाड़ी जलाने की घटना को धारा-144 लगने के बाद ही हुई। वहीं, इसका पालन कराने वाली पुलिस केवल मूकदर्शक बनकर रह गई। जब बवाल बढ़ा तो रोहतक में कर्फ्यू लगा दिया गया, लेकिन उपद्रव ने कर्फ्यू की हवा भी निकाल डाली। कर्फ्यू लगने के बाद अर्धसैनिक बल के जवान और पुलिस लाचार दिखती रही। हालांकि उपद्रवी तोड़फोड़ और आगजनी करते रहे।
कर्फ्यू में सड़कों पर उपद्रवियों का राज रहा। वर्तमान में कर्फ्यू के बाद भी सड़कों पर भीड़ रहती है, वहीं डीसी डीके बेहेरा कहते हैं कि कर्फ्यू में सुबह 11 बजे से 12 बजे तक छूट दी गई है।