{"_id":"5deaaa208ebc3e1bfc0450ba","slug":"jaat-aandolan-rohtak-news-rtk5311522198","type":"story","status":"publish","title_hn":"41 लोगों ने की प्रोफेसर से 12 से 25 फरवरी तक कॉल, तीन साल की जांच में भी पुलिस नहीं बता सकी ऑडियो सुनकर कौन भड़का","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
41 लोगों ने की प्रोफेसर से 12 से 25 फरवरी तक कॉल, तीन साल की जांच में भी पुलिस नहीं बता सकी ऑडियो सुनकर कौन भड़का
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रोहतक। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रोफेसर विरेंद्र सिंह ने 12 से 25 फरवरी के बीच में 41 लोगों से बातचीत की, जिनकी लोकेशन सांपला व एमडीयू स्थित टावर के एरिया में रही। बावजूद इसके पुलिस तीन साल की जांच और 550 पेज की चार्जशीट में यह नहीं बता सकी कि प्रोफेसर की ऑडियो सुनकर कौन आंदोलन के दौरान भड़का। इस संदेह का लाभ अदालत में शुक्रवार को प्रोफेसर विरेंद्र को मिला। उनको जयदीप धनखड़ व मानसिंह दलाल के साथ आरोप मुक्त कर लिया गया।
बचाव पक्ष के वकील पीयूष गक्खड़ व सुनील कुमार ने बताया कि पुलिस की तरफ से मई 2019 में 550 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई थी। चार्जशीट में प्रो. विरेंद्र और मानसिंह दलाल के बीच हुई बातचीत को अहम सुबूत माना गया था। चार्जशीट में बताया गया था कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 12 फरवरी से 25 फरवरी के बीच विरेंद्र के मोबाइल फोन से 41 उन लोगों से बातचीत हुई है, जिनकी लोकेशन इस समयावधि में सांपला व एमडीयू टावर के एरिया में है। बावजूद इसके किसी भी केस में उक्त 41 लोग आरोपी या गवाह नहीं हैं। ऐसे में पुलिस बताए कि प्रो. विरेंद्र व मान सिंह दलाल के बीच हुई बातचीत से कौन भड़का।
वहीं, जयदीप धनखड़ के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने चार्जशीट में बताया कि प्रो. विरेंद्र ने मानसिंह दलाल से धनखड़ के मोबाइल से बातचीत की। धनखड़ का कहना है कि इसमें उसका क्या कसूर है। पुलिस का कहना है कि उसने 12 से 25 फरवरी के बीच 90 लोगों से बातचीत की, जिनकी लोकेशन सांपला व एमडीयू रोहतक के टावर के बीच थी। उक्त कोई भी व्यक्ति दंगों से जुड़े किसी केस में गवाह या आरोपी नहीं है। कोर्ट ने आरोपियों द्वारा दाखिल डिस्चार्ज अर्जी पर सरकार से जवाब मांगा था। चार दिसंबर को पुलिस की तरफ से जवाब दाखिल किया गया। बताया गया कि प्रोफेसर ने माना है कि ऑडियो में आवाज उनकी है। यह ऑडियो अहम सुबूत है। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस के बाद ऐसा सुबूत नहीं माना, जिससे के आधार पर देशद्रोह का केस चल सके। दोपहर बाद करीब चार बजे अदालत ने तीनों आरोपियों प्रो. विरेंद्र, जयदीप धनखड़ व मान सिंह दलाल को आरोप मुक्त कर दिया।
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दो घंटे चली बहस, चुपचाप निकल गए तीनों
एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में पौने 11 बजे मामले को लेकर बहस शुरू हुई। बचाव पक्ष ने प्रोफेसर विरेंद्र को डिस्चार्ज कराने के लिए 86 पेज और जयदीप धनखड़ के लिए 130 पेज की अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट में बहस के दौरान तीनों आरोपी खड़े रहे। एडीजे बहस को सुनती रही। एक-एक धारा पर दोनों पक्षों ने अपने - अपने तर्क रखे। यहां तक देशद्रोह जैसी गंभीर धारा पर बचाव पक्ष ने अपना पक्ष रखा। 12 बजकर 40 मिनट तक बहस चलती रही। अदालत ने लंच के बाद फैसला सुनाने का समय दिया। करीब चार बजे कोर्ट ने फैसला दिया कि मौजूद तथ्यों के आधार पर आरोप नहीं बनते। ऐसे में तीनों को आरोप मुक्त किया जाता है।
...केस के बाद नहीं दिखाई दिए प्रोफेसर हुड्डा के साथ मंचों पर
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़के दंगों को लेकर दर्ज हुआ केस सियासत में भी छाया रहा। कई बार हुड्डा पर सवाल उठाए गए। इसके चलते लंबे समय तक प्रोफेसर विरेंद्र पूर्व सीएम हुड्डा के साथ मंचों पर दिखाई नहीं दिए। केवल लोकसभा चुनाव से ठीक पहले गोहाना में हुई रैली में प्रोफेसर मंच पर हुड्डा के साथ थे। अब अदालत के फैसले के बाद प्रोफेसर को आरोपों से मुक्ति मिल गई है।
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बचाव पक्ष के वकील पीयूष गक्खड़ व सुनील कुमार ने बताया कि पुलिस की तरफ से मई 2019 में 550 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई थी। चार्जशीट में प्रो. विरेंद्र और मानसिंह दलाल के बीच हुई बातचीत को अहम सुबूत माना गया था। चार्जशीट में बताया गया था कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 12 फरवरी से 25 फरवरी के बीच विरेंद्र के मोबाइल फोन से 41 उन लोगों से बातचीत हुई है, जिनकी लोकेशन इस समयावधि में सांपला व एमडीयू टावर के एरिया में है। बावजूद इसके किसी भी केस में उक्त 41 लोग आरोपी या गवाह नहीं हैं। ऐसे में पुलिस बताए कि प्रो. विरेंद्र व मान सिंह दलाल के बीच हुई बातचीत से कौन भड़का।
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वहीं, जयदीप धनखड़ के वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने चार्जशीट में बताया कि प्रो. विरेंद्र ने मानसिंह दलाल से धनखड़ के मोबाइल से बातचीत की। धनखड़ का कहना है कि इसमें उसका क्या कसूर है। पुलिस का कहना है कि उसने 12 से 25 फरवरी के बीच 90 लोगों से बातचीत की, जिनकी लोकेशन सांपला व एमडीयू रोहतक के टावर के बीच थी। उक्त कोई भी व्यक्ति दंगों से जुड़े किसी केस में गवाह या आरोपी नहीं है। कोर्ट ने आरोपियों द्वारा दाखिल डिस्चार्ज अर्जी पर सरकार से जवाब मांगा था। चार दिसंबर को पुलिस की तरफ से जवाब दाखिल किया गया। बताया गया कि प्रोफेसर ने माना है कि ऑडियो में आवाज उनकी है। यह ऑडियो अहम सुबूत है। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस के बाद ऐसा सुबूत नहीं माना, जिससे के आधार पर देशद्रोह का केस चल सके। दोपहर बाद करीब चार बजे अदालत ने तीनों आरोपियों प्रो. विरेंद्र, जयदीप धनखड़ व मान सिंह दलाल को आरोप मुक्त कर दिया।
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दो घंटे चली बहस, चुपचाप निकल गए तीनों
एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में पौने 11 बजे मामले को लेकर बहस शुरू हुई। बचाव पक्ष ने प्रोफेसर विरेंद्र को डिस्चार्ज कराने के लिए 86 पेज और जयदीप धनखड़ के लिए 130 पेज की अर्जी दाखिल की थी। कोर्ट में बहस के दौरान तीनों आरोपी खड़े रहे। एडीजे बहस को सुनती रही। एक-एक धारा पर दोनों पक्षों ने अपने - अपने तर्क रखे। यहां तक देशद्रोह जैसी गंभीर धारा पर बचाव पक्ष ने अपना पक्ष रखा। 12 बजकर 40 मिनट तक बहस चलती रही। अदालत ने लंच के बाद फैसला सुनाने का समय दिया। करीब चार बजे कोर्ट ने फैसला दिया कि मौजूद तथ्यों के आधार पर आरोप नहीं बनते। ऐसे में तीनों को आरोप मुक्त किया जाता है।
...केस के बाद नहीं दिखाई दिए प्रोफेसर हुड्डा के साथ मंचों पर
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़के दंगों को लेकर दर्ज हुआ केस सियासत में भी छाया रहा। कई बार हुड्डा पर सवाल उठाए गए। इसके चलते लंबे समय तक प्रोफेसर विरेंद्र पूर्व सीएम हुड्डा के साथ मंचों पर दिखाई नहीं दिए। केवल लोकसभा चुनाव से ठीक पहले गोहाना में हुई रैली में प्रोफेसर मंच पर हुड्डा के साथ थे। अब अदालत के फैसले के बाद प्रोफेसर को आरोपों से मुक्ति मिल गई है।