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अंतरर्राष्ट्रीय कोच्ची स्टूडेंट बिनाले के लिए चयनित हुआ काष्ठ छापाचित्र

Fri, 29 Jan 2021 11:29 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 29 Jan 2021 11:29 PM IST
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International Kochi student selected for woodcut wood print
काष्ठ छापाचित्र के साथ पांचों विद्यार्थी दीपक, स्वाति, अनुकंपा, सृष्टि, अंकुश। - फोटो : RohtakCity
रोहतक। अंतरराष्ट्रीय कोच्ची स्टूडेंट्स बिनाले के लिए एमडीयू के दृश्य कला विभाग के पांच विद्यार्थियों द्वारा तैयार किया जा रहा काष्ठ छापाचित्र शुक्रवार को पूरा हो गया। दीपक, स्वाति, अनुकंपा, सृष्टि, अंकुश ने 38 दिनों तक लगातार मेहनत करके 12 वुड पैनलों को जोड़कर एक छापाचित्र तैयार किया गया है। इसमें ऐतिहासिक गौरवान्वित भारतीय इतिहास के उस काले अध्याय पर विद्यार्थियों ने रोशनी डाली है। यह राष्ट्रीय स्तर पर किया गया पहला विशाल काष्ठ छापाचित्र है। इसका आकार 210 बाई 1200 सेंटीमीटर प्रिंटिंग एरिया है। जिसे सीएमवाईके कलर प्रोसेस से तैयार किया गया है। इसके जरिए काला पानी की सजा पाने वाले शहीदों की यात्रा को दर्शाया गया है। जिस तरह काले पानी की सजा पाने वाले शहीदों को समय, दिन, महीना, वर्ष का नहीं पता होता था और उनकी यातना दिन प्रति दिन, महीना दर महीना, साल दर साल बरकरार रहती थी। ठीक उसी शैली को अपनाकर विद्यार्थियों ने 12 महीनों को दर्शाने के लिए 12 पैनलों को चुना। इस वुडकट ग्राफिक प्रिंटिंग का चयन कोच्ची स्टूडेंट बिनाले में हो चुका है। 15 फरवरी से 15 मई तक केरल में इसकी प्रदर्शनी लगेगी। विद्यार्थियों की कलात्मक अभिव्यक्ति को साकार रूप देने में प्राध्यापक संजय कुमार का अहम रोल रहा है।
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यातनाओं के जरिए दिखाई आजादी की कीमत
विद्यार्थियों ने इस वुडकट ग्राफिक प्रिंटिंग के 12 पैनलों के जरिए आधुनिकता के दौर की आजादी की कीमत को शहीदों की यातनाओं के जरिए दिखाने का सराहनीय प्रयास किया है। इन 12 पैनलों में 12 यातनाओं को दिखाया गया है जिसमें ठंडे पानी का बौछारें, रस्सी से बांधकर अंगारो पर खड़ा रखना, क्रोस बार बेड़ियो में जकड़ना, पैरो में लोहे के गोले बांधे हुए, लकड़ी के डब्बे में कैद, नारियल छिलते हुए, पैरो को बांधकर उल्टा लटकाते हुए, हैंड कफस में बंधे हुए, बार फिल्टर्स में जकड़े हुए, मछलियों की तरह जाल में बांधे हुए, पिंजरे में कैद कर तालाब में डालते हुए आदि शामिल हैं।
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विद्यार्थियों का रहा टीमवर्क
इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में विद्यार्थियों ने टीमवर्क की तरह काम किया। दीपक यादव ने इनमें लकड़ी के कार्य को बखूबी दर्शाया है। लकड़ी के ठोसपन में जकड़ित स्वतंत्रता सेनानियों की भावनाओं व आजादी के जोश के लिए उसके मुख मंडल से यातनाओं का घोर आवेग दिखाया है। वहीं अंकुश खत्री ने जेल की दीवारों के साइलेंट सिस्टम को बरकरार रखते हुए बैकग्राउंड में काला पानी जेल की छाया प्रतिरूपित की है। इस कठोर जेल के साथ-साथ ड्राइंग में भी इनका योगदान रहा है। वहीं कुछ जगह वस्त्रों के प्रभाव को भी इनके द्वारा प्रदर्शित किया है। सृष्टि हुड्डा ने जेल की सलाखों व ईंटो के प्रतिरूप को प्रतिबिंवित किया है। बैकग्राउंड व स्पेस डिवीजन में अपने कला कौशल का प्रदर्शन किया है। स्वाति सिवाच ने बेड़ियों व जंजीरों में जकड़े स्वतंत्रता सेनानियों को प्रदर्शित किया, रस्सी की जकड़न, पानी की झटपटाहट के साथ वस्त्रों में बोरी के रेशों को इन्होंने प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया है। जैपनीज वुडकट की तकनीक के आधार पर पेपर प्लेसिंग के लिए (कैन्तो) का प्रयोग किया है। अनुकंपा ने सभी पैनलों की अग्रभूमि अलग अलग तरह की सतहों की बनावटों का प्रयोग किया है।
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