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मासूम के साथ भाई का भी छूट गया स्कूल
रोहतक
Updated Thu, 29 May 2014 03:25 AM IST
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एक हैवान की वहशियाना हरकत का दंश एक साढ़े चार साल की मासूम आज भी झेलने को मजबूर है। हालांकि इस मासूम के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण ने उसके उपचार के लिए आर्थिक मदद दी है, लेकिन इस एक हादसे ने उस मासूम और उसके परिवार की जिंदगी को बुरी तरह से बर्बाद कर दिया है।
हालात ऐसे हैं कि बच्ची आज भी उपचाराधीन है। उसके साथ ही उसके बड़े भाई का स्कूल भी छूट गया है। पिता को आसपास कोई दिहाड़ी पर मजदूरी नहीं दे रहा है, जिसके चलते उसके पिता ने भी यहां से जाने का मन बना लिया है।
छह माह पहले एक 4 साल की मासूम अपने खिलौनों की दुनिया में मस्त थी, लेकिन एक हैवान जो वहां के एक बड़े व्यापारी का पुत्र है, उसकी निगाहें उस पर पड़ गई। उसने उस 4 साल की मासूम को अपनी हैवानियत का शिकार बना लिया और वहां से भाग खड़ा हुआ।
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बाहर से प्रदेश में मजदूरी करने आए पिता ने अपनी बेटी की बुरी हालत देखी तो वह रो पड़ा और किसी तरह बदहवास हालत में उसे लेकर पीजीआई में पहुंचा। वहां उसका उपचार शुरू हुआ। पुलिस ने पिता की शिकायत पर मामला दर्ज किया तो उस मजदूर पिता पर दबाव भी लगातार बढ़ना शुरू हो गया।
एक तरफ बेटी को तड़पता देख उस गरीब मजदूर पिता की हालत खराब हो रही थी, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों ने उस पर केस वापस लेने अथवा होस्टाइल दबाव बनाने के लिए एकता कर उसे नौकरी से हटा दिया। किसी तरह उसने किसी से 20 हजार रुपये ब्याज पर तो ले लिए, लेकिन यह पैसा लेना उसकी मुसीबतों को और अधिक बढ़ा गया।
उसने किसी तरह से 15 हजार रुपये उतारे, लेकिन 5 हजार के लिए उसके साथ मारपीट भी की गई और राजीनामा करने का दबाव बनाते हुए उस पर इलाका छोड़कर कहीं ओर चले जाने के लिए कह दिया। अभी इस सारे दु:ख को झेल ही रहा था कि बच्ची के साथ-साथ बड़े बेटे का स्कूल जाना भी बंद हो गया।
हालत ये थी कि इस बच्ची व उसके भाई के साथ आसपास के बच्चों ने भी खेलना तो दूर बोलना तक बंद कर दिया। पैरा लीगल स्वयं सेवकों को उसके साथ हुई दुखद परिस्थितियों का एक कानूनी शिविर में पता चला और साथ ही उस पर दबाव डाले जाने की जानकारी भी मिली।
मामले की जानकारी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कम सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संजय कुमार शर्मा तक पहुंची। उन्होंने प्रशासन के एक अधिकारी के मार्फत मामले में जांच कराई तो सब सच सामने आ गया और इसी प्रशासनिक अधिकारी ने बच्ची के पिता की अपने स्तर पर आर्थिक मदद तक कर दी।
मात्र 35 दिनों में जांच रिपोर्ट तैयार की गई और बच्ची को 3 लाख रुपये मुआवजा अदा किया गया, इसमें 1.5 लाख उपचार के लिए तो बाकी उसके भविष्य के लिए एफडी करा दिए हैं। लेकिन इससे पूर्व उसका केस लड़ने के लिए प्राधिकरण की ओर से उस गरीब पिता को वकील भी प्रदान किया गया है।
सीजेएम संजय कुमार शर्मा ने बताया कि अभी ‘हरियाणा पीड़ित मुआवजा योजना- 2013’ के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। चार साल की मासूम बच्ची को तो अभी ये भी नहीं पता है कि उसके साथ क्या हुआ है, पिता के पास भी रोजगार का कोई साधन नहीं रहा।
इसलिए इस योजना के तहत उन्हें 3 लाख रुपये मासूम को अदा किये गए हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार को दो नए केस इसी योजना के तहत आवेदन आए हैं। ये दोनों केस दुराचार के ही हैं और इनमें एक नाबालिग और एक बालिग का मामला है। इन दोनों केसों के बारे में जांच कराई जाएगी।
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हालात ऐसे हैं कि बच्ची आज भी उपचाराधीन है। उसके साथ ही उसके बड़े भाई का स्कूल भी छूट गया है। पिता को आसपास कोई दिहाड़ी पर मजदूरी नहीं दे रहा है, जिसके चलते उसके पिता ने भी यहां से जाने का मन बना लिया है।
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छह माह पहले एक 4 साल की मासूम अपने खिलौनों की दुनिया में मस्त थी, लेकिन एक हैवान जो वहां के एक बड़े व्यापारी का पुत्र है, उसकी निगाहें उस पर पड़ गई। उसने उस 4 साल की मासूम को अपनी हैवानियत का शिकार बना लिया और वहां से भाग खड़ा हुआ।
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बाहर से प्रदेश में मजदूरी करने आए पिता ने अपनी बेटी की बुरी हालत देखी तो वह रो पड़ा और किसी तरह बदहवास हालत में उसे लेकर पीजीआई में पहुंचा। वहां उसका उपचार शुरू हुआ। पुलिस ने पिता की शिकायत पर मामला दर्ज किया तो उस मजदूर पिता पर दबाव भी लगातार बढ़ना शुरू हो गया।
एक तरफ बेटी को तड़पता देख उस गरीब मजदूर पिता की हालत खराब हो रही थी, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों ने उस पर केस वापस लेने अथवा होस्टाइल दबाव बनाने के लिए एकता कर उसे नौकरी से हटा दिया। किसी तरह उसने किसी से 20 हजार रुपये ब्याज पर तो ले लिए, लेकिन यह पैसा लेना उसकी मुसीबतों को और अधिक बढ़ा गया।
उसने किसी तरह से 15 हजार रुपये उतारे, लेकिन 5 हजार के लिए उसके साथ मारपीट भी की गई और राजीनामा करने का दबाव बनाते हुए उस पर इलाका छोड़कर कहीं ओर चले जाने के लिए कह दिया। अभी इस सारे दु:ख को झेल ही रहा था कि बच्ची के साथ-साथ बड़े बेटे का स्कूल जाना भी बंद हो गया।
हालत ये थी कि इस बच्ची व उसके भाई के साथ आसपास के बच्चों ने भी खेलना तो दूर बोलना तक बंद कर दिया। पैरा लीगल स्वयं सेवकों को उसके साथ हुई दुखद परिस्थितियों का एक कानूनी शिविर में पता चला और साथ ही उस पर दबाव डाले जाने की जानकारी भी मिली।
मामले की जानकारी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कम सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संजय कुमार शर्मा तक पहुंची। उन्होंने प्रशासन के एक अधिकारी के मार्फत मामले में जांच कराई तो सब सच सामने आ गया और इसी प्रशासनिक अधिकारी ने बच्ची के पिता की अपने स्तर पर आर्थिक मदद तक कर दी।
मात्र 35 दिनों में जांच रिपोर्ट तैयार की गई और बच्ची को 3 लाख रुपये मुआवजा अदा किया गया, इसमें 1.5 लाख उपचार के लिए तो बाकी उसके भविष्य के लिए एफडी करा दिए हैं। लेकिन इससे पूर्व उसका केस लड़ने के लिए प्राधिकरण की ओर से उस गरीब पिता को वकील भी प्रदान किया गया है।
सीजेएम संजय कुमार शर्मा ने बताया कि अभी ‘हरियाणा पीड़ित मुआवजा योजना- 2013’ के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। चार साल की मासूम बच्ची को तो अभी ये भी नहीं पता है कि उसके साथ क्या हुआ है, पिता के पास भी रोजगार का कोई साधन नहीं रहा।
इसलिए इस योजना के तहत उन्हें 3 लाख रुपये मासूम को अदा किये गए हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार को दो नए केस इसी योजना के तहत आवेदन आए हैं। ये दोनों केस दुराचार के ही हैं और इनमें एक नाबालिग और एक बालिग का मामला है। इन दोनों केसों के बारे में जांच कराई जाएगी।