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चीन से हार का बदला लेने के लिए पेनाल्टी कार्नर को गोल में बदला : दीपिका
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 07 Nov 2016 01:39 AM IST
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भारतीय महिला हॉकी टीम
- फोटो : hocky india
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पहली बार एशियन चैंपियंस ट्राफी जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम काफी उत्साहित है। ट्राफी जीतने के लिए टीम ने पुरानी गलतियों को दूर करके नई योजना बनाई। फाइनल से ठीक पहले चीन से हार मिली। इस दबाव के बावजूद टीम का मनोबल नहीं टूटने दिया। फाइनल में योजना के तहत हर खिलाड़ी ने बेहतरीन खेली। भारत को एशिया चैंपियन बनाने में निर्णायक गोल करने वाली दीपिका ठाकुर ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में टीम की जीत की योजना को साझा किया।
एशियन चैंपियंस ट्राफी से पहले महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक खेला था। जहां पेनाल्टी कार्नर को गोल में न बदल पाना टीम की सबसे बड़ी कमजोरी थी। टीम ने इस कमजोरी को दूर करने के लिए सबसे ज्यादा प्रैक्टिस की। भारत को एशिया चैंपियन बनाने में निर्णायक गोल करने वाली उप कप्तान दीपिका ठाकुर कहती हैं कि एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में उनका फोकस पेनाल्टी कार्नर को गोल में बदलना था। फाइनल से ठीक पहले मैच में चीन से 2-3 से हार मिली थी। उसी टीम से फाइनल होने से टीम के खिलाड़ियों पर दबाव था। टीम के खिलाड़ियों का मनोबल न टूटे इसके लिए फाइनल खेलने से पहले कोच और सभी खिलाड़ियों ने मीटिंग की। इसमें योजना बनाई गई कि चीन को हम बड़ी आसानी से हरा सकते हैं। यह तब संभव होगा, जब हम ग्राउंड गोल की जगह पेनाल्टी कार्नर पर फोकस करें। दीपिका ने बताया कि योजना के तहत तय किया गया कि ग्राउंड गोल भले ही नहीं मिले, लेकिन पेनाल्टी कार्नर किसी भी हालत में खाली नहीं जाना चाहिए। ऐसा होता है तो हमारी जीत पक्की होगी। लेकिन आखिरी समय में मिला पेनाल्टी कार्नर खाली जाता दिखा तो रिबाउंड पर शॉट लगाकर गोल कर दिया।
महिला हॉकी को प्रोत्साहित करे सरकार
दीपिका ठाकुर कहती हैं कि लड़कियों के मुकाबले लड़के हॉकी में ज्यादा आगे आ रहे हैं। इसके लिए सरकार को महिला हॉकी खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना होगा। हरियाणा से महिला खिलाड़ी काफी आगे आ रही हैं और एशिया चैंपियन बनी भारतीय टीम में 7 खिलाड़ी अकेले हरियाणा की रहने वाली हैं। यह जरूर है कि जिस तरह से महिला हॉकी टीम बेहतर कर रही है, उसको देखते हुए आगे लड़कियों में हॉकी का क्रेज बढ़ सकता है।
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एशियन चैंपियंस ट्राफी से पहले महिला हॉकी टीम ने ओलंपिक खेला था। जहां पेनाल्टी कार्नर को गोल में न बदल पाना टीम की सबसे बड़ी कमजोरी थी। टीम ने इस कमजोरी को दूर करने के लिए सबसे ज्यादा प्रैक्टिस की। भारत को एशिया चैंपियन बनाने में निर्णायक गोल करने वाली उप कप्तान दीपिका ठाकुर कहती हैं कि एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में उनका फोकस पेनाल्टी कार्नर को गोल में बदलना था। फाइनल से ठीक पहले मैच में चीन से 2-3 से हार मिली थी। उसी टीम से फाइनल होने से टीम के खिलाड़ियों पर दबाव था। टीम के खिलाड़ियों का मनोबल न टूटे इसके लिए फाइनल खेलने से पहले कोच और सभी खिलाड़ियों ने मीटिंग की। इसमें योजना बनाई गई कि चीन को हम बड़ी आसानी से हरा सकते हैं। यह तब संभव होगा, जब हम ग्राउंड गोल की जगह पेनाल्टी कार्नर पर फोकस करें। दीपिका ने बताया कि योजना के तहत तय किया गया कि ग्राउंड गोल भले ही नहीं मिले, लेकिन पेनाल्टी कार्नर किसी भी हालत में खाली नहीं जाना चाहिए। ऐसा होता है तो हमारी जीत पक्की होगी। लेकिन आखिरी समय में मिला पेनाल्टी कार्नर खाली जाता दिखा तो रिबाउंड पर शॉट लगाकर गोल कर दिया।
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महिला हॉकी को प्रोत्साहित करे सरकार
दीपिका ठाकुर कहती हैं कि लड़कियों के मुकाबले लड़के हॉकी में ज्यादा आगे आ रहे हैं। इसके लिए सरकार को महिला हॉकी खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना होगा। हरियाणा से महिला खिलाड़ी काफी आगे आ रही हैं और एशिया चैंपियन बनी भारतीय टीम में 7 खिलाड़ी अकेले हरियाणा की रहने वाली हैं। यह जरूर है कि जिस तरह से महिला हॉकी टीम बेहतर कर रही है, उसको देखते हुए आगे लड़कियों में हॉकी का क्रेज बढ़ सकता है।
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