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धान की जगह वैकल्पिक फसलों को दिया जाएगा प्रोत्साहन, कपास व बाजरे की फसल को प्रमोट करेगा खेतीबाड़ी विभाग

Wed, 13 May 2020 12:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2020 12:27 AM IST
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Incentives will be given to alternative crops instead of paddy, agriculture and agriculture department will promote cotton and millet crops
रोहतक। खेतीबाड़ी विभाग अब धान की जगह वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित करेगा। इसके लिए विभाग ने कपास और बाजरा को प्रमोट करने की योजना बनाई है। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है और भूजल स्तर कम है, वहां ये दोनों फसलें किसानों के लिए बढ़िया विकल्प हो सकती हैं।
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जिले में धान का रकबा करीब 46 हजार हेक्टेयर है, जिसमें प्रमुख तौर पर पूसा 1121 वैरायटी लगाई जाती है। धान की नर्सरी बनाने का काम 15 मई से शुरू होगा। 15 जून से किसानों को इसकी रोपाई की इजाजत दी जाएगी। खेतीबाड़ी विभाग इसके विकल्प के तौर पर किसानों से कपास और बाजरा अपनाने को कह रहा है। इस बार 15 हजार हेक्टेयर रकबे में कपास उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। जिले में 99 प्रतिशत बीटी कॉटन ही लगाई जाती है, क्योंकि इसमें अमेरिकन सुंडी नहीं लगती। इस हाइब्रिड फसल की पैदावार भी देसी कॉटन की तुलना में अच्छी होती है। जिले में प्रमुख तौर पर कलानौर, महम और लाखन माजरा में कपास की पैदावार होती है। कपास के साथ-साथ बाजरा को भी प्रमोट किया जा रहा है। क्योंकि कम पानी वाले क्षेत्र में यह सबसे उपयुक्त फसल है। बुआई से लेकर कटाई तक इसमें लागत भी कम होती है और न्यूनतम समर्थन मूल्य भी है। विभाग किसानों को यह भी समझाने की कोशिश कर रहा है कि धान की तुलना में इसका उत्पादन भी ज्यादा है। एक एकड़ में करीब 15 क्विंटल तक बाजरे का उत्पादन हो जाता है। खेतीबाड़ी विभाग ने इस बार करीब दस हजार हेक्टेयर में बाजरा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। कपास और बाजरा, दोनों का रकबा बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। जिले के कलानौर ब्लॉक में भूजल स्तर कम है और पानी की कमी है। वहां विभाग कपास और बाजरा, दोनों का रकबा बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
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कम पानी वाले क्षेत्रों में बाजरा और कपास, धान की तुलना में किसानों के लिए बढ़िया विकल्प हो सकते हैं। कलानौर ब्लॉक में खासतौर पर इन्हें प्रोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है।
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-डॉ. रोहताश सिंह, डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर।
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