{"_id":"673268052fc0cb56ea022e59","slug":"in-jhabua-children-came-out-of-their-homes-and-returned-to-big-fields-rohtak-news-c-198-1-rew1001-211515-2024-11-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: झाबुआ में बच्चे घरों से बाहर व बड़े खेतों में लौटे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: झाबुआ में बच्चे घरों से बाहर व बड़े खेतों में लौटे
Tue, 12 Nov 2024 01:54 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 12 Nov 2024 01:54 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बावल। गांव झाबुआ में रविवार को बाघ के पकड़े जाने से ढाई महीने से भयभीत ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। बाघ के डर से ग्रामीण घर से निकलने में डरते थे। बाघ के पकड़े जाने के दूसरी दिन सोमवार को ग्रामीणों की दिनचर्या सामान्य हुई। ग्रामीण बेखौफ होकर अपने घरों से बाहर निकले।
गांव झाबुआ में सोमवार का दिन खुशियों से भरा रहा। ढाई महीने से गांव के जंगल में बाघ के विचरण करने से लोग बेहद भयभीत थे। लोगों ने बच्चों को बाहर जाने से मना कर दिया था। खुद खेत में नहीं जा रहे थे। अगर जरूरत होती थी तो लोग समूह में लाठी आदि लेकर जाते थे। डर के मारे खेती का काम प्रभावित था। बाघ के पकड़े जाने के बाद सोमवार को ग्रामीणों की दिनचर्या सामान्य हुई। अब लोग सुबह के समय सैर करने जा रहे हैं। अपने खेत की देखरेख करने के लिए भी चक्कर लगा रहे हैं। जो बच्चे साइकिल से दूर पढ़ने के लिए जाते थे, उनके लिए भी सोमवार का दिन काफी राहत भरा रहा। रात के समय ड्यूटी करने वाले और देर रात घर पर ड्यूटी करके आने वाले लोगों के लिए भी अब आना जाना आसान हो चुका है। इससे पहले सुबह और देर शाम लोगों ने घर से बाहर निकलना ही बंद कर दिया था।
ग्रामीण जितेंद्र, नरेंद्र, नीतीश, कुलदीप ने बताया कि सोमवार को जब वह सुबह उठे तो काफी बेहतर महसूस हो रहा था। कारण यह था कि वह सैर करने के लिए जा सकते थे। इससे पहले ना तो वह सैर करने जा पाते थे और ना ही अपने खेत देखने के लिए जाते थे। हमेशा डर बना रहता था कि कहीं बाघ जंगल से निकलकर उन पर हमला न कर दे। बच्चे भी स्कूल अब बिना डर के जा रहे हैं।
विज्ञापन
ढाई माह में ग्रामीणों ने झेली परेशानी
गांव निवासी मीर सिंह ने बताया कि बाघ बेशक ढाई माह बाद पकड़ा गया है। मगर उन ढाई माह में जो ग्रामीणों को दिक्कत सहनी पड़ी, वह कभी ना भूलने वाली है। किस तरह से लोगों ने ढाई माह तक एक बाघ के खौफ के कारण घर में अपना समय बिताया। कई लोग तो बाघ के डर के कारण घर छोड़कर इधर-उधर जा चुके थे। खाना पीना सब मुश्किल हो गया था। बच्चे भी घर से बाहर खेलने से डरते थे।
रविवार को वन विभाग की टीम ने पकड़ा बाघ
बता दें कि रविवार को शाम करीब 6:30 बजे सरिस्का से आए 3 वर्षीय टाइगर को पकड़कर वन विभाग की टीम अपने साथ ले गई। यह बाघ 10 माह पहले भी रेवाड़ी में आया था। इस बार राजस्थान में चार लोगों को बाघ ने घायल किया था। रेवाड़ी में बाघ ने किसी पर हमला नहीं किया था। वहीं, लगातार खौफ में रहने के बाद ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट चुका था। तब विरोध प्रदर्शन भी किया गया। इसे लेकर पंचायत भी हुई और मंत्री से लेकर डीसी, एसडीएम तक शिकायतें दी गई। तब जाकर प्रशासन ने बड़े पैमाने पर संज्ञान लिया और लोगों को बाघ के आतंक से मुक्त कराया।
विज्ञापन
बावल। गांव झाबुआ में रविवार को बाघ के पकड़े जाने से ढाई महीने से भयभीत ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। बाघ के डर से ग्रामीण घर से निकलने में डरते थे। बाघ के पकड़े जाने के दूसरी दिन सोमवार को ग्रामीणों की दिनचर्या सामान्य हुई। ग्रामीण बेखौफ होकर अपने घरों से बाहर निकले।
गांव झाबुआ में सोमवार का दिन खुशियों से भरा रहा। ढाई महीने से गांव के जंगल में बाघ के विचरण करने से लोग बेहद भयभीत थे। लोगों ने बच्चों को बाहर जाने से मना कर दिया था। खुद खेत में नहीं जा रहे थे। अगर जरूरत होती थी तो लोग समूह में लाठी आदि लेकर जाते थे। डर के मारे खेती का काम प्रभावित था। बाघ के पकड़े जाने के बाद सोमवार को ग्रामीणों की दिनचर्या सामान्य हुई। अब लोग सुबह के समय सैर करने जा रहे हैं। अपने खेत की देखरेख करने के लिए भी चक्कर लगा रहे हैं। जो बच्चे साइकिल से दूर पढ़ने के लिए जाते थे, उनके लिए भी सोमवार का दिन काफी राहत भरा रहा। रात के समय ड्यूटी करने वाले और देर रात घर पर ड्यूटी करके आने वाले लोगों के लिए भी अब आना जाना आसान हो चुका है। इससे पहले सुबह और देर शाम लोगों ने घर से बाहर निकलना ही बंद कर दिया था।
विज्ञापन
ग्रामीण जितेंद्र, नरेंद्र, नीतीश, कुलदीप ने बताया कि सोमवार को जब वह सुबह उठे तो काफी बेहतर महसूस हो रहा था। कारण यह था कि वह सैर करने के लिए जा सकते थे। इससे पहले ना तो वह सैर करने जा पाते थे और ना ही अपने खेत देखने के लिए जाते थे। हमेशा डर बना रहता था कि कहीं बाघ जंगल से निकलकर उन पर हमला न कर दे। बच्चे भी स्कूल अब बिना डर के जा रहे हैं।
विज्ञापन
ढाई माह में ग्रामीणों ने झेली परेशानी
गांव निवासी मीर सिंह ने बताया कि बाघ बेशक ढाई माह बाद पकड़ा गया है। मगर उन ढाई माह में जो ग्रामीणों को दिक्कत सहनी पड़ी, वह कभी ना भूलने वाली है। किस तरह से लोगों ने ढाई माह तक एक बाघ के खौफ के कारण घर में अपना समय बिताया। कई लोग तो बाघ के डर के कारण घर छोड़कर इधर-उधर जा चुके थे। खाना पीना सब मुश्किल हो गया था। बच्चे भी घर से बाहर खेलने से डरते थे।
रविवार को वन विभाग की टीम ने पकड़ा बाघ
बता दें कि रविवार को शाम करीब 6:30 बजे सरिस्का से आए 3 वर्षीय टाइगर को पकड़कर वन विभाग की टीम अपने साथ ले गई। यह बाघ 10 माह पहले भी रेवाड़ी में आया था। इस बार राजस्थान में चार लोगों को बाघ ने घायल किया था। रेवाड़ी में बाघ ने किसी पर हमला नहीं किया था। वहीं, लगातार खौफ में रहने के बाद ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट चुका था। तब विरोध प्रदर्शन भी किया गया। इसे लेकर पंचायत भी हुई और मंत्री से लेकर डीसी, एसडीएम तक शिकायतें दी गई। तब जाकर प्रशासन ने बड़े पैमाने पर संज्ञान लिया और लोगों को बाघ के आतंक से मुक्त कराया।