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फूलों से हेयर रिंग, माला और राखी बनाकर बताया प्रकृति का महत्व

Thu, 03 Mar 2022 03:22 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 03:22 AM IST
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importance of nature by making hair ring, garland and rakhi from flowers
रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में आयोजित रंग बहार पुष्प प्रदर्शनी में विद्यार्थी, स्टाफ और पर्यावरण प्रेमियों ने अपनी प्रतिभा का हुनर दिखाया। किसी ने फूलों के गुलदस्ते में फोटोग्राफी से घर की बगिया महकाई तो किसी ने पुष्पों से महिलाओं के लिए हेयर रिंग, माला और राखी बनाकर बताया कि प्रकृति ही असली गहना है। पर्यावरण प्रेमियों ने भी अपने मॉडल से लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इनके मॉडल देख लोग भी काफी प्रभावित हुए।
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बॉटनी में पीएचडी कर रही दिशा ने छोटे गुलाब, मोगरा के फू लों से आकर्षक हेयर रिंग बनाया था। उसे इस तरह गुच्छे में पिरोया गया कि दूर से ही लोगों को आकर्षित कर रहा था। बीच में गुलाब के छोटे फूल उसे कलरफुल बना रहे थे। छात्रा ने बताया कि अपनी प्रकृति से बना हेयरिंग लगाने का अलग ही क्रेज है। भूगोल विभाग की शिखा ने मोगरा, गुलाब और गेंदे के फूलों से हाथ फू ल और ईयर रिंग बनाए थे। ये फूल इतने आकर्षक ढंग से माला में पिरोए गए थे कि इसकी सुंदरता अलग ही थी। मोगरा के फूलों की महक लोगों को आक र्षित कर रही थी। छात्रा ने बताया कि इन्हें पहनकर अलग ही खुशी होती है।
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फूल के गुलदस्ते में दिखाया पूरा परिवार
कॉलेज की छात्राओं ने फूलों का ऐसा आकर्षक गुलदस्ता बनाया था जिसमें एक परिवार की पूरी झलक नजर आ रही थी। गुलदस्ते में गुलाब, गंदा, मोगरा, कनेर आदि के फूल लगाए थे। गुलदस्ते पर फोटो लगे थे जिसमें एक परिवार की तीन पीढ़ियों के लोगों के फोटो लगे थे। लोग अपनी इच्छानुसार किसी भी तरह के फोटो इसमें लगा सकते हैं।
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28 साल से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे स्नेह
एमडीयू के इतिहास विभाग के संविदा कर्मी स्नेह कुमार 28 सालों से लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। बकौल स्नेह उसके पास फूल और सब्जी के कई नए नए वैरायटी की पौध है। उनका दावा है कि टमाटर की पौध लगाने की जरूरत नहीं है, एडवांस फार्मिंग से इसे तैयार किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल उन्हें इस प्रदर्शनी में दूसरा स्थान भी मिला था।
वार्डन ने फूलों से सजाई प्रकृति की देवी
एमडीयू की भागीरथी हॉस्टल की वार्डन राजबाला ने फूलों से कई प्रकार की ज्वैलरी बनाई थी। इसमें बाल, हाथ, सिर में गहनों की तरह प्रयोग किया जाता है। राजबाला ने प्रकृति की देवी का मॉडल बनाकर पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश लोगों को दिया।
युवतियों ने सीखे चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाने
प्रदर्शनी में कुम्हार कला का भी प्रदर्शन किया गया। इसमें विशेषज्ञ ने इलेक्ट्रिक चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाने का प्रदर्शन किया। मिट्टी से बने कटोरी, प्लेट, फूलदान, आदि आइटम युवाओं को आकर्षित कर रहे थे। इसे देख छात्राएं और शहर की युवतियां काफी प्रभावित हुईं। उन्होंने खुद इस कला को सीखा। कई युवतियों ने चाक को चलाने से लेकर मिट्टी के बर्तन आदि बनाने सीखे। युवा भी पीछे नहीं रहे।
बहुरुपिये भी रहे आकर्षण का केंद्र
प्रदर्शनी के दौरान पेशेवर बहुरुपिये भी पहुंचे। एक ने लंगूर का वेश धरा। इसे देख छात्र छात्राएं डरे भी और कुछ ने उसे छेड़ा भी। बेंच पर बैठी युवतियों के पास जाकर उनके सिर से जुएं भी निकालने का अभिनय किया। इसके अलावा कुछ बहुरुपिये हरियाणा के ताऊ, मुनीम आदि का वेश भी धरे थे। इनका अभिनय सबने सराहा।

होली के गीतों पर जमकर नृत्य किया
प्रदर्शनी में ढोल की थाप पर छात्र-छात्राओं ने जमकर नृत्य भी किया। ढोल पर भांगड़ा किया और एक दूसरे को होली की बधाई भी दी। युवतियां भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने भी ग्रुप में डांस किया। कॉलेज की महिला स्टाफ भी यहां व्यवस्था में जुटी थी।
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