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पुरानी ओटी बिल्डिंग में 60 और बाल रोग विभाग में 40 बेड की 30 जून तक बनेगी आईसीयू
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कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के सर्वाधिक संक्रमित होने की आशंका के चलते पीजीआई प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने बच्चों के उपचार के लिए 650 बेड की अतिरिक्त व्यवस्था 30 जून तक करना तय किया है। बुधवार को निरीक्षण करने के बाद पुरानी ओटी बिल्डिंग में 60 बेड, बालरोग विभाग में 40 बेड व नियोनेटोलॉजी में 50 बेड का आईसीयू बनाने के आदेश दिए।
कुलपति डॉ. ओपी कालरा के अनुसार रोहतक पीजीआई में सबसे ज्यादा रोगी रोहतक, झज्जर, भिवानी, जींद के आते हैं। चारों जिलों की जनसंख्या के आधार पर ही उपचार की व्यवस्था की जा रही है। जिसके तहत बच्चों के उपचार के 650 अतिरिक्त बेड की अतिरिक्त व्यवस्था होगी। सरकार से बेड, जीवनरक्षक उपकरण आने लगे हैं। एक सप्ताह में और सामान आएगा। उन्होंने बुधवार को निरीक्षण करके 30 जून तक पुरानी ओटी बिल्डिंग में 60 बेड, बाल रोग विभाग में 40 बेड और नियोनेटोलॉजी विभाग में 50 बेड की नई आईसीयू चालू करने के आदेश दिए। कुलपति डॉ. ओपी कालरा का कहना है कि कोरोना संक्रमण के ट्रेंड से स्पष्ट है कि बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे। पहली लहर में एक फीसदी और दूसरी में 10 फीसदी बच्चे संक्रमित हुए। कोरोना का ट्रेंड बताता है कि इस बार बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे।
30 जून तक हैंडओवर करने होगा नया आईसीयू
कुलपति ने पीजीआई के डायरेक्टर डॉ. रोहताश कंवर यादव, चिकित्साधीक्षक डॉ. पुष्पा दहिया, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता गठवाल आदि के साथ पुरानी ओटी बिल्डिंग का करीब डेढ़ घंटे तक निरीक्षण किया। इस दौरान फैसला किया कि हर एक कमरे में सिर्फ छह आईसीयू बेड होंगे ताकि डॉक्टरों को उपचार करने में सहूलियत हो।
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30 नहीं 40 एमटी लिक्विड ऑक्सीजन चाहिए
कुलपति ने बताया कि पीजीआई के पास 30 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की व्यवस्था है, मगर दूसरी लहर के बाद कहा जा सकता है कि 40 मीट्रिक टन ऑक्सीजन चाहिए। 10-10 मीट्रिक टन लिक्विड गैस के दो प्लांट लगाने का काम चल रहा है। जल्द एक और प्लांट लगना शुरू होगा। इसके अलावा 10 मीट्रिक टन गैस की जरूरत हो सकती है, जिसके लिए जल्द व्यवस्था की जाएगी।
120 डॉक्टरों को छह माह के लिए रखेगा पीजीआई
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए पीजीआई में 120 डॉक्टरों को छह माह के लिए रखा जाएगा। ताकि रोगियों को समुचित उपचार मिल सके। जल्द ही डॉक्टरों को रखने की प्रक्रिया पूरी होगी। सूत्रों के अनुसार जुलाई तक डॉक्टरों की ड्यूटी लगना शुरू हो जाएगी।
इन दवाओं की भेजी सरकार को डिमांड
पीजीआई ने कोरोना की तीसरी लहर के लिए दवाओं की डिमांड भेज दी है। इसमें करीब छह हजार रेमडेसिविर इंजेक्शन, टोसिली और एस्टॉयड दवाएं हैं।
नवजात के वार्ड में 50 ऑक्सीजन बेड भी होंगे
नियोनेटोलॉजी विभाग में जल्द ही 40-50 बेड पर ऑक्सीजन की व्यवस्था की जाएगी ताकि जरूरत पड़ने पर नवजात को तुरंत ऑक्सीजन दी जा सके। डॉक्टरों का कहना है कि बहुत बच्चों को वेंटिलेटर की बजाय ऑक्सीजन की जरूरत होती है, इसलिए यह व्यवस्था की जा रही है।
स्कूल खोलने को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी होगी
कुलपति का कहना है कि शासन-प्रशासन को स्कूल खोलने में ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी। चूंकि क्लास में बच्चे एक-दूसरे से काफी नजदीक रहते हैं। ऐसे में एक भी बच्चा संक्रमित होता है, तो स्थिति विकट हो सकती है। यही नहीं, यदि कोई बच्चा संक्रमित होता है, तो वह निश्चित परिवार के सदस्यों के संपर्क में रहेगा। ऐसे में बड़ों को भी कोरोना की आशंका ज्यादा रहेगी।
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कुलपति डॉ. ओपी कालरा के अनुसार रोहतक पीजीआई में सबसे ज्यादा रोगी रोहतक, झज्जर, भिवानी, जींद के आते हैं। चारों जिलों की जनसंख्या के आधार पर ही उपचार की व्यवस्था की जा रही है। जिसके तहत बच्चों के उपचार के 650 अतिरिक्त बेड की अतिरिक्त व्यवस्था होगी। सरकार से बेड, जीवनरक्षक उपकरण आने लगे हैं। एक सप्ताह में और सामान आएगा। उन्होंने बुधवार को निरीक्षण करके 30 जून तक पुरानी ओटी बिल्डिंग में 60 बेड, बाल रोग विभाग में 40 बेड और नियोनेटोलॉजी विभाग में 50 बेड की नई आईसीयू चालू करने के आदेश दिए। कुलपति डॉ. ओपी कालरा का कहना है कि कोरोना संक्रमण के ट्रेंड से स्पष्ट है कि बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे। पहली लहर में एक फीसदी और दूसरी में 10 फीसदी बच्चे संक्रमित हुए। कोरोना का ट्रेंड बताता है कि इस बार बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे।
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30 जून तक हैंडओवर करने होगा नया आईसीयू
कुलपति ने पीजीआई के डायरेक्टर डॉ. रोहताश कंवर यादव, चिकित्साधीक्षक डॉ. पुष्पा दहिया, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गीता गठवाल आदि के साथ पुरानी ओटी बिल्डिंग का करीब डेढ़ घंटे तक निरीक्षण किया। इस दौरान फैसला किया कि हर एक कमरे में सिर्फ छह आईसीयू बेड होंगे ताकि डॉक्टरों को उपचार करने में सहूलियत हो।
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30 नहीं 40 एमटी लिक्विड ऑक्सीजन चाहिए
कुलपति ने बताया कि पीजीआई के पास 30 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की व्यवस्था है, मगर दूसरी लहर के बाद कहा जा सकता है कि 40 मीट्रिक टन ऑक्सीजन चाहिए। 10-10 मीट्रिक टन लिक्विड गैस के दो प्लांट लगाने का काम चल रहा है। जल्द एक और प्लांट लगना शुरू होगा। इसके अलावा 10 मीट्रिक टन गैस की जरूरत हो सकती है, जिसके लिए जल्द व्यवस्था की जाएगी।
120 डॉक्टरों को छह माह के लिए रखेगा पीजीआई
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए पीजीआई में 120 डॉक्टरों को छह माह के लिए रखा जाएगा। ताकि रोगियों को समुचित उपचार मिल सके। जल्द ही डॉक्टरों को रखने की प्रक्रिया पूरी होगी। सूत्रों के अनुसार जुलाई तक डॉक्टरों की ड्यूटी लगना शुरू हो जाएगी।
इन दवाओं की भेजी सरकार को डिमांड
पीजीआई ने कोरोना की तीसरी लहर के लिए दवाओं की डिमांड भेज दी है। इसमें करीब छह हजार रेमडेसिविर इंजेक्शन, टोसिली और एस्टॉयड दवाएं हैं।
नवजात के वार्ड में 50 ऑक्सीजन बेड भी होंगे
नियोनेटोलॉजी विभाग में जल्द ही 40-50 बेड पर ऑक्सीजन की व्यवस्था की जाएगी ताकि जरूरत पड़ने पर नवजात को तुरंत ऑक्सीजन दी जा सके। डॉक्टरों का कहना है कि बहुत बच्चों को वेंटिलेटर की बजाय ऑक्सीजन की जरूरत होती है, इसलिए यह व्यवस्था की जा रही है।
स्कूल खोलने को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी होगी
कुलपति का कहना है कि शासन-प्रशासन को स्कूल खोलने में ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी। चूंकि क्लास में बच्चे एक-दूसरे से काफी नजदीक रहते हैं। ऐसे में एक भी बच्चा संक्रमित होता है, तो स्थिति विकट हो सकती है। यही नहीं, यदि कोई बच्चा संक्रमित होता है, तो वह निश्चित परिवार के सदस्यों के संपर्क में रहेगा। ऐसे में बड़ों को भी कोरोना की आशंका ज्यादा रहेगी।