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सैकड़ों किसानों का नहीं हुआ रजिस्ट्रेशन, कैसे बेचेंगे फसल

Mon, 29 Mar 2021 12:31 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 29 Mar 2021 12:31 AM IST
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Hundreds of farmers have not been registered, how will they sell the crop
हरियाणा सरकार ने मंडियों में एमएसपी पर फसल बेचने के लिए मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। लेकिन जिले के सैकड़ों किसानों ने अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है। सरकार ने पोर्टल बंद कर दिया है, अब किसानों के सामने अपनी फसलें बेचने का संकट खड़ा हो गया है।
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राज्य सरकार ने 2019-20 रबी सीजन में मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल शुरू किया था। पोर्टल लांच करते समय सारी सरकारी मशीनरी लगाई गई थी। कृषि और राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने गांवों में जाकर किसानों का पंजीकरण करवाया था। इस काम में सक्षम युवाओं को भी लगाया गया था। लेकिन रजिस्ट्रेशन की समस्या बनी रही थी। इस बार सरकार ने पोर्टल को लेकर काफी सख्ती कर दी है। उसने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अगर किसानों को मंडियों में एमएसपी पर अपनी फसलें बेचनी हैं तो पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन हर हाल में करवाना होगा। इतना ही नहीं, इस बार यह भी एलान कर दिया गया है कि अगर किसानों को सरकारी स्कीमों का लाभ लेना है तो भी पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी होगा। जिले में कुल खेतीबाड़ी रकबा 3.12 लाख एकड़ है, जिसमें से अब तक सिर्फ 165898.81 एकड़ का ही रजिस्ट्रेशन हुआ है। जिले में खेतीबाड़ी विभाग के अनुमान के अनुसार करीब 96 हजार किसान परिवार हैं, जिनमें से अब तक सिर्फ 25721 किसानों ने ही पंजीकरण करवाया है। जिले में सबसे ज्यादा रकबा गेहूं का है, दूसरे स्थान पर सरसों लगाई जाती है। इसके अलावा जौ, चना, गन्ना, बरसीम, सब्जियां और बागवानी फसलें हैं। राज्य सरकार ने पोर्टल बंद कर दिया है, बिना रजिस्ट्रेशन के किसान फसलें बेच नहीं सकेंगे। अखिल भारतीय किसान सभा के प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बहुत जटिल है, अनपढ़ किसानों के बस के बाहर है। पोर्टल आमतौर पर हैंग ही रहता है। पहले सरकार ने अपने कर्मचारियों को लगाया था, किसानों को लगता है कि वे इस बार भी आएंगे, पर कोई नहीं आया। आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान हर्ष गिरधर ने कहा कि उनसे संबंधित बहुत से किसानों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। किसान रोज उन्हें फोन करते हैं। वह स्थानीय अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जिले में किसी को पता ही नहीं कि पोर्टल दोबारा खुलेगा या नहीं और फिर कब खुलेगा।
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पंजीकृत किसान और रकबा
फसल-- किसान ----रकबा (एकड़)
गेहूं ----19729-- 142455.48
सरसों --5704 ---- 22787.78
जौ ---- 230 ------521.46
चना ---- 58 ----- 134.09
कुल --- 25721 -- 165898.81
खरीफ सीजन में गायब हो गया था रकबा
पिछले खरीफ सीजन में भी रजिस्ट्रेशन की काफी समस्या आई थी। उसके बाद एक नई परेशानी खड़ी हो गई थी। किसानों ने शिकायत की कि उनका रकबा गायब हो गया है। बड़ी संख्या में किसानों का कहना था कि उन्होंने जितने रकबे का पंजीकरण करवाया था, उन्हें जो मैसेज आया उसमें रकबा कम निकला। किसी का धान का आठ एकड़ से घट कर एक एकड़ रह गया। इसके चलते किसान काफी परेशान हुए थे।
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जिलास्तर पर नहीं होता समाधान
मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल को लेकर सबसे बड़ी समस्या यह आ रही है कि इसमें जिलास्तर पर कोई समाधान नहीं होता। जिले के अधिकारियों के पास किसानों के लिए कोई संतोषजनक जवाब भी नहीं होता। क्योंकि पोर्टल में कुछ भी ठीक होना है तो वह मुख्यालय से ही होता है। किसानों को रजिस्ट्रेशन से लेकर रकबा गायब होने की समस्या आती है। इसके साथ ही अदायगी में बहुत परेशानी आती है। जिसके चलते पिछले दोनों खरीद सीजन में किसान और आढ़ती बहुत परेशान हुए। उनकी मांग थी कि इन समस्याओं के निपटारे के लिए जिलास्तर पर ही व्यवस्था की जाए, लेकिन इस बार भी अब तक कुछ नहीं हुआ।
रोहतक मंडी में खरीदी जाएगी जौ
राज्य सरकार ने इस बार रोहतक की नई अनाज मंडी जौ की खरीद करने का फैसला किया है। जिला फूड सप्लाई कंट्रोलर वरिंदर सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से पत्र प्राप्त हो गया है। जिले भर के जौ उत्पादक किसान रोहतक मंडी में फसल बेच सकेंगे। खरीद शुरू होने से पहले इसकी व्यवस्था कर दी जाएगी। जिले में जौ का रकबा करीब 2800 एकड़ है, इसकी कटाई भी गेहूं के साथ ही शुरू होती है। गेहूं और जौ की खरीद एक अप्रैल 2021 से शुरू होगी।

जिले में कुल खेतीबाड़ी रकबा तीन लाख एकड़ से ज्यादा है, जिसमें अब तक 1.65 लाख एकड़ का ही रजिस्ट्रेशन हुआ है। मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल खुलने के साथ ही विभाग के कर्मचारियों ने गांवों में किसानों को जागरूक करने को अभियान चलाया था। मोबाइल फोन से भी पंजीकरण करवाया जा सकता है, धरने पर बैठे किसान, वहीं से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। सभी जिलों से कम रजिस्ट्रेशन की शिकायतें आ रही हैं इसलिए राज्य सरकार अप्रैल के पहले सप्ताह में पोर्टल खोलने पर विचार कर रही है ताकि बचे हुए किसान भी पंजीकरण करवा सकें।
- डॉ. रोहताश सिंह, उप निदेशक, कृषि
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