फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   heart attack, death, declaire death, life line, patient, life safe, haryana, rohtak

दिल ने कर दिया था काम करना बंद फिर भी बच गई जान

Fri, 23 Sep 2016 02:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 23 Sep 2016 02:05 AM IST
विज्ञापन
heart attack, death, declaire death, life line, patient, life safe, haryana, rohtak
सीपीएस कमल गुप्ता के पीएसओ को 10 दिन पहले हॉस्पिटल में कराया गया था भर्ती - फोटो : amar ujala
बरसों पुरानी कहावत है कि जाके राखे साईयां मार सके न कोय। यह कहावत हिसार के सीपीएस कमल गुप्ता के पीएसओ पर बिल्कुल सटीक बैठती है। दस दिन पहले अचानक हार्ट अटैक होने पर एक बार तो उनके हार्ट ने धड़कना ही बंद कर दिया था लेकिन  डॉक्टरों ने लगातार डेढ़ घंटे हार्ट पंपिंग कर उनको जीवनदान देने में सफलता पा ली।
विज्ञापन


मामला 12 सितंबर का है। सीपीएस कमल गुप्ता शहर में राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर की माता के निधन पर आए थे। उनके साथ उनका पीएसओ रतन सिंह भी था। दोपहर के समय अचानक रतन सिंह के पेट और छाती में दर्द होना शुरू हो गया। दर्द ज्यादा बढ़ता देख उन्हें लाइफ केयर अस्पताल में लाया गया। यहां आईसीयू में कुछ ही देर बाद उनके हार्ट ने काम करना बंद कर दिया और ईसीजी में भी स्टेट लाइन आ गई। डॉक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी और सीपीआर (हार्ट पंपिंग) शुरू कर दिया। इस बीच खुद सीपीएस, रतन सिंह के जीवित होने की आस छोड़ बैठे। ऐसी आशंका पर पीजीआई डायरेक्टर और एसपी भी अस्पताल में पहुंच गए। इसी बीच अचानक मरीज के शरीर में हरकत होने लगी और कुछ ही देर बाद हाथ-पैर हिलाने लगा।  इस पर चिकित्सकों ने आनन-फानन में मरीज को होली हार्ट अस्पताल में रेफर कर दिया। हालत में सुधार होने के बाद मरीज ने गुरुवार को अस्पताल में पहुंचकर नया जीवन देने वाले डॉ. राजेश जाले, पूर्व सिविल सर्जन डॉ. शिवकुमार, फिजीशियन डॉ. अशोक, डॉ. सुरेश और डॉ. रामबख्श का आभार जताया। सीपीएस कमल गुप्ता का  भी ये ही कहना है कि डॉक्टरों की मेहनत से रतन सिंह को नया जीवन मिला है।
विज्ञापन


यह बोली डॉक्टरों की टीम

इस दौरान आयोजित प्रेस काफ्रेंस में मरीज को नया जीवन देने वाले डॉक्टरों की टीम ने कहा कि ऐसे केस बहुत कम सामने आते हैं। किसी भी मरीज को आधा घंटे से ज्यादा सीपीआर नहीं दी जाती, लेकिन बार-बार हार्ट बंद होने के बाद भी उन्हें एक किरण दिखाई दे रही थी कि शायद मरीज की जान बच सकती है। इसीलिए मरीज को एक घंटे से ज्यादा समय तक सीपीआर दी गई। सभी की कड़ी मेहनत का नतीजा है कि मरीज को एक नया जीवन मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed