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स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने डॉक्टरों की कलम पर लगाया सेंसर

Thu, 18 Jul 2019 01:57 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jul 2019 01:57 AM IST
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health minister anil vij instructed  docters in rohtak
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के बाद सूबे के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने भी डीजीएचएस हेल्थ को अपने डॉक्टरों की कलम पर सेंसर लगाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि निजी कंपनी की दवा व इम्प्लांट लिखने वाले डॉक्टरों की पर्ची तहसीलदार, डीएसपी व ड्रग निरीक्षक पकड़ सकेंगे और जिला स्तर पर तीन सदस्यों की कमेटी मामले की जांच कर सकेगी। इसकी भनक लगते ही हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के पदाधिकारी बुधवार को डीजी हेल्थ के कार्यालय चंडीगढ़ पहुंचे और इसका विरोध किया। एसोसिएशन का कहना है कि डॉक्टरों की जांच डॉक्टर ही कर सकता है, बाहर के अधिकारियों को पर्ची पर लिखी दवाओं की कैसे जानकारी हो सकती है।
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हरियाणा सिविल सर्विस एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. जसबीर परमार ने बताया कि सरकार डॉक्टरों की पर्ची जांचने का अधिकार तहसीलदार व डीएसपी को भी देना चाहती है। यह गलत है, क्योंकि डॉक्टरों की लिखी दवा को ये कैसे समझ सकते हैं। इनकी टीम में ड्रग कंट्रोलर की तरह कम से कम एक डॉक्टर को भी शामिल करना चाहिए। गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिया है कि तीन सदस्यों की टीम हर जिले में गठित होनी चाहिए जो जांच कर अपनी मासिक रिपोर्ट भी तैयार करे। जांच टीम देखेगी कि कौन सी दवा स्टोर में है और बाहर से दवा लिखी जा रही है। निजी कंपनी की दवा लिखने वाले डॉक्टरों को सहन नहीं किया जाएगा। वही दवा डॉक्टर बाहर की लिख सकेंगे जो कि वेयर हाउस में उपलब्ध नहीं होगी, इसमें जैनेरिक दवा का नाम ही लिखना होगा।
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एमसीआई के नियमानुसार यह हो सकती है कार्रवाई
- एक हजार से पांच हजार रुपये का लाभ लेने पर पर चेतावनी
- पांच हजार से दस हजार रुपये का लाभ लेने पर तीन माह के लिए इंडियन मेडिकल व स्टेट मेडिकल पंजीकरण रद
- 10 हजार से 50 हजार रुपये का लाभ लेने पर छह माह के लिए इंडियन मेडिकल व स्टेट मेडिकल पंजीकरण रद
- 50 हजार से एक लाख रुपये का लाभ लेने पर एक साल के लिए इंडियन मेडिकल व स्टेट मेडिकल पंजीकरण रद
- एक लाख से अधिक का लाभ लेने पर एक साल से अधिक का इंडियन मेडिकल व स्टेट मेडिकल पंजीकरण रद
स्वास्थ्य मंत्री के लिए सबसे बड़ा सवाल
इम्प्लांट मामला
पीजीआईएमएस में पूर्व निदेशक डॉ. नित्यानंद व पूर्व सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र सरोहा ने निजी कंपनी का करोड़ों रुपये का अवैध इम्प्लांट जब्त किया था, लेकिन संस्थान के अधिकारी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं करा पाए हैं। निजी सप्लायरों ने अपने जब्त इम्प्लांट को वापस लेने का दावा हाईकोर्ट में किया हुआ है। स्थिति यह है कि यहां के डॉक्टर अमृत फार्मेसी से इम्प्लांट मंगाने की बजाए निजी कंपनी का इम्प्लांट लाने का अकसर दबाव बनाते हैं।
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हवाई यात्रा मामला
सरकार जहां स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों पर नकेल कस रही है कि वह निजी फार्मा कंपनी से लाभ नहीं ले सकते, वहीं पीजीआईएमएस के डॉक्टरों की निजी फार्मा कंपनी के खर्च पर विदेश यात्रा करने की लिस्ट लंबी है। स्थिति यह है कि आठ रिमाइंडरों के बाद भी संस्थान के डॉक्टर अपना रिकार्ड नहीं दे रहे हैं। सरकार को अधूरा रिकार्ड मिलने के चलते संस्थान को जांच फाइल दोबारा लौटानी पड़ी है।
बाहर की दवा लिखने के हैं अनगिनत मामले
पीजीआईएमएस व स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की ओर से बाहर की दवा लिखने के अनगिनत मामले उठे हैं। लेकिन इस सभी को जांचों में ही अटकाया जाता है।
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