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साई को हरा हरियाणा की बेटियां बनीं कबड्डी चैंपियन
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कबड्डी खिताब जीतने वाली हरियाणा की महिला टीम को सम्मानित करते मुख्यमंत्री मनोहर लाल।
रोहतक। 46वीं जूनियर नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप के रविवार को खेले गए खिताबी मुकाबलों में लड़कियों के वर्ग में हरियाणा और लड़कों के वर्ग में साई की टीम विजेता बनी।
एमेच्योर कबड्डी एसोसिएशन हरियाणा की मेजबानी में हुई प्रतियोगिता के लड़कियों के फाइनल में हरियाणा ने साई को 28-19 और लड़कों के वर्ग में साई ने उत्तरप्रदेश को 37-32 के अंतर से हराया। लड़कियों में लगातार बराबर पर चल रहे मैच में हरियाणा ने आखिरी मिनटों में बढ़त बनाई और जीत हासिल की। लड़कों के वर्ग में शुरू से आगे चल रही उत्तरप्रदेश की टीम को साई ने दूसरे हाफ के बाद पीछे कर दिया। यहां पद्मश्री, द्रोणाचार्य, अर्जुन और भीम अवॉर्डी कबड्डी खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। एसोसिएशन की ओर से मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री मनोहर को पगड़ी और बैज लगाकर सम्मानित किया गया। सीएम ने विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया।
साई-चंडीगढ़ व गोवा-यूपी के बीच हुआ सेमीफाइनल
कबड्डी चैंपियनशिप के लिए रविवार को सेमीफाइनल चार टीमों के बीच हुआ। लड़कों में साई और चंडीगढ़ और गोवा और उत्तरप्रदेश के बीच कांटे के मुकाबले हुए। साई ने चंडीगढ़ को 40-31 के अंतर से और यूपी ने गोवा को 40-16 के अंतर से हराया। हरियाणा क्वार्टर फाइनल में में बाहर हो गया। यहां चंडीगढ़ ने उसे 52-27 के अंतर से हराया।
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सेमिफाइनल में हरियाणा ने चंडीगढ़ को हराया
कबड्डी चैंपियनशिप के लड़कियों के वर्ग में रविवार को सेमिफाइनल के कड़े मुकाबले हुए। साई ने अपनी प्रतिद्वंद्वी उत्तरप्रदेश टीम को 38-18 के अंतर से हराकर फाइनल में जगह बनाई। हरियाणा ने चंडीगढ़ को 70-20 के रिकॉर्ड स्कोर से हरा कर फाइनल में जगह पक्की की।
पिछले 40 साल में कबड्डी में आया बदलाव : सीएम
कबड्डी चैंपियनशिप के मुख्य अतिथि सीएम मनोहर लाल ने खिलाड़ियों से कहा कि चैंपियनशिप में 29 जिलों के साथ एक साई की टीम है। इसमें करीब 900 खिलाड़ी शामिल हैं। यह खेल मुझे सब खेलों में सबसे ज्यादा पसंद है। मैंने सबसे ज्यादा कबड्डी में भाग लिया है। उस समय और इस समय की कबड्डी में काफी बदलाव आया है। उस समय मिट्टी में कबड्डी खेलते थे। अब इंडोर एसी हॉल में मैट पर कबड्डी होती है। यह हमारे देश का पुराना खेल है। दक्षिण भारत से इसकी शुरुआत हुई। वहां इसे कप्रडी कहते हैं। क यानी हाथ और प्री यानी पकड़ना। इसी से कबड्डी शब्द बना। इसके अलावा दक्षिण में इसे चेरुगुडू व असम में हु-तु-तु कहते हैं। यह अकेला मुकाबला करने के साथ मिलकर संघर्ष करने का संदेश भी देता है। अकेला राइडर और टीम के सदस्य कैचर के रूप में यही बताते हैं। पहले लंबा सांस लेकर खेलना होता था। अब समय के हिसाब से खेलते हैं। इसी मैदान से निकलकर एक व्यक्ति आपके सामने खड़ा है। आप भी इसी तरह बनें। खेल हमारे जीवन का अहम हिस्सा है। इसे गंभीरता से लें।
हरियाणा कबड्डी एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि समारोह का आयोजन हमारे लिए गर्व की बात है। ओलंपिक, एशियाड या अन्य खेल स्पर्धा होती है तो सबकी नजर गोल्ड पर रहती है। प्रदेश के बच्चे प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले रहे हैं। इसकी वजह सरकार की नई खेल नीति है। सरकार ने ओलंपिक में गोल्ड लाने वाले को छह करोड़ रुपये और एचसीएस या एचपीएस की नौकरी दी जाएगी। इस कारण प्रदेश का हर बच्चा खेल में रुचि रखता है। इसके अलावा सरकार ने हर गांव में स्टेडियम या व्यायामशाला बनाई है। कोच व नर्सरी दी हैं। यह सब खेलों में बच्चों को आगे लाने के लिए किया जा रहा है। मंच संचालन खेल निदेशक डॉ. देवेंद्र सिंह ढुल ने किया। इस मौके पर सांसद डॉ. अरविंद शर्मा, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह, मेयर मनमोहन गोयल, आईजी संदीप खिरवार, उपायुक्त आरएस वर्मा, पुलिस अधीक्षक मोहित हांडा, एडीसी महेंद्रपाल, एसडीएम राकेश कुमार, सतीश नांदल, शमशेर खरकड़ा, नरेंद्र खट्टर, अजय बंसल, रमेश भाटिया, धर्मबीर शर्मा, चेतना अरोड़ा, रणबीर ढाका, जोगेंद्र सैनी, रेणू डाबला, ओम प्रकाश बागड़ी, राजकुमार शर्मा, राजकुमार कपूर, प्रेम हुड्डा, वीर सिंह हुड्डा, कमल धींगड़ा, तेजस्वी गहलोत, धर्मबीर मलिक, कुलदीप सिंह दलाल, आरएस खोखर, रणधीर सहरावत, बलवान सिंह, कृष्ण गोदारा, सुनीता महलाण, राकेश कुमार, संदीप नरवाल, प्रियंका, सुरजीत सिंह, दीपक, जोगेंद्र सिंह, अनूप कुमार समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।
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एमेच्योर कबड्डी एसोसिएशन हरियाणा की मेजबानी में हुई प्रतियोगिता के लड़कियों के फाइनल में हरियाणा ने साई को 28-19 और लड़कों के वर्ग में साई ने उत्तरप्रदेश को 37-32 के अंतर से हराया। लड़कियों में लगातार बराबर पर चल रहे मैच में हरियाणा ने आखिरी मिनटों में बढ़त बनाई और जीत हासिल की। लड़कों के वर्ग में शुरू से आगे चल रही उत्तरप्रदेश की टीम को साई ने दूसरे हाफ के बाद पीछे कर दिया। यहां पद्मश्री, द्रोणाचार्य, अर्जुन और भीम अवॉर्डी कबड्डी खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। एसोसिएशन की ओर से मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री मनोहर को पगड़ी और बैज लगाकर सम्मानित किया गया। सीएम ने विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया।
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साई-चंडीगढ़ व गोवा-यूपी के बीच हुआ सेमीफाइनल
कबड्डी चैंपियनशिप के लिए रविवार को सेमीफाइनल चार टीमों के बीच हुआ। लड़कों में साई और चंडीगढ़ और गोवा और उत्तरप्रदेश के बीच कांटे के मुकाबले हुए। साई ने चंडीगढ़ को 40-31 के अंतर से और यूपी ने गोवा को 40-16 के अंतर से हराया। हरियाणा क्वार्टर फाइनल में में बाहर हो गया। यहां चंडीगढ़ ने उसे 52-27 के अंतर से हराया।
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सेमिफाइनल में हरियाणा ने चंडीगढ़ को हराया
कबड्डी चैंपियनशिप के लड़कियों के वर्ग में रविवार को सेमिफाइनल के कड़े मुकाबले हुए। साई ने अपनी प्रतिद्वंद्वी उत्तरप्रदेश टीम को 38-18 के अंतर से हराकर फाइनल में जगह बनाई। हरियाणा ने चंडीगढ़ को 70-20 के रिकॉर्ड स्कोर से हरा कर फाइनल में जगह पक्की की।
पिछले 40 साल में कबड्डी में आया बदलाव : सीएम
कबड्डी चैंपियनशिप के मुख्य अतिथि सीएम मनोहर लाल ने खिलाड़ियों से कहा कि चैंपियनशिप में 29 जिलों के साथ एक साई की टीम है। इसमें करीब 900 खिलाड़ी शामिल हैं। यह खेल मुझे सब खेलों में सबसे ज्यादा पसंद है। मैंने सबसे ज्यादा कबड्डी में भाग लिया है। उस समय और इस समय की कबड्डी में काफी बदलाव आया है। उस समय मिट्टी में कबड्डी खेलते थे। अब इंडोर एसी हॉल में मैट पर कबड्डी होती है। यह हमारे देश का पुराना खेल है। दक्षिण भारत से इसकी शुरुआत हुई। वहां इसे कप्रडी कहते हैं। क यानी हाथ और प्री यानी पकड़ना। इसी से कबड्डी शब्द बना। इसके अलावा दक्षिण में इसे चेरुगुडू व असम में हु-तु-तु कहते हैं। यह अकेला मुकाबला करने के साथ मिलकर संघर्ष करने का संदेश भी देता है। अकेला राइडर और टीम के सदस्य कैचर के रूप में यही बताते हैं। पहले लंबा सांस लेकर खेलना होता था। अब समय के हिसाब से खेलते हैं। इसी मैदान से निकलकर एक व्यक्ति आपके सामने खड़ा है। आप भी इसी तरह बनें। खेल हमारे जीवन का अहम हिस्सा है। इसे गंभीरता से लें।
हरियाणा कबड्डी एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि समारोह का आयोजन हमारे लिए गर्व की बात है। ओलंपिक, एशियाड या अन्य खेल स्पर्धा होती है तो सबकी नजर गोल्ड पर रहती है। प्रदेश के बच्चे प्रथम व द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले रहे हैं। इसकी वजह सरकार की नई खेल नीति है। सरकार ने ओलंपिक में गोल्ड लाने वाले को छह करोड़ रुपये और एचसीएस या एचपीएस की नौकरी दी जाएगी। इस कारण प्रदेश का हर बच्चा खेल में रुचि रखता है। इसके अलावा सरकार ने हर गांव में स्टेडियम या व्यायामशाला बनाई है। कोच व नर्सरी दी हैं। यह सब खेलों में बच्चों को आगे लाने के लिए किया जा रहा है। मंच संचालन खेल निदेशक डॉ. देवेंद्र सिंह ढुल ने किया। इस मौके पर सांसद डॉ. अरविंद शर्मा, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर, एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह, मेयर मनमोहन गोयल, आईजी संदीप खिरवार, उपायुक्त आरएस वर्मा, पुलिस अधीक्षक मोहित हांडा, एडीसी महेंद्रपाल, एसडीएम राकेश कुमार, सतीश नांदल, शमशेर खरकड़ा, नरेंद्र खट्टर, अजय बंसल, रमेश भाटिया, धर्मबीर शर्मा, चेतना अरोड़ा, रणबीर ढाका, जोगेंद्र सैनी, रेणू डाबला, ओम प्रकाश बागड़ी, राजकुमार शर्मा, राजकुमार कपूर, प्रेम हुड्डा, वीर सिंह हुड्डा, कमल धींगड़ा, तेजस्वी गहलोत, धर्मबीर मलिक, कुलदीप सिंह दलाल, आरएस खोखर, रणधीर सहरावत, बलवान सिंह, कृष्ण गोदारा, सुनीता महलाण, राकेश कुमार, संदीप नरवाल, प्रियंका, सुरजीत सिंह, दीपक, जोगेंद्र सिंह, अनूप कुमार समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।