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संसाधन और उत्कृष्ट शिक्षा का भर रहे दम, नैक निरीक्षण में बेदम,
ब्यूरो/अमर उजाला,रोहतक
Updated Fri, 15 Apr 2016 02:29 AM IST
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jammu university
- फोटो : Amar Ujala
विद्यार्थियों को बेहतर संसाधन और उत्कृष्ट शिक्षा देने का दम भरने वाले प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थान नैक का निरीक्षण करवाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भी उच्च शिक्षण संस्थान अपनी क्षमता का आंकलन नहीं करना चाहते। यही कारण है कि प्रदेश के 76 फीसदी कॉलेजों में दशकों से नैक (नेशनल एसिसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल) का निरीक्षण नहीं कराया गया। इससे तो यही लग रहा है कि अब या तो संस्थानों के पास वे सुविधाएं नहीं हैं, जिनका वे दम भरते हैं या फिर यूजीसी के आदेश उनके लिए कोई मायने नहीं रखते।
उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता और सुविधाओं को जानने के लिए नैक से ग्रेडिंग ली जाती है। बाकायदा इसके लिए कॉलेजों को आवेदन करना होता है। इसके बाद नैक की टीम निरीक्षण के लिए आती है। निरीक्षण के समय कॉलेजों को पढ़ाई से लेकर, संसाधन, खेल और सांस्कृतिक-सामाजिक पैमाने पर परखा जाता है। इसके बाद ही ग्रेडिंग दी जाती है। नैक की टीम संस्थान को ए, बी और सी ग्रेड देती है, जिससे कॉलेज की एक छवि बनती है और उसी के आधार पर संस्थान टॉप रैंकिंग में शामिल होता है। प्रदेश के संस्थानों में अच्छी गुणवत्ता और सुविधाओं के दावे तो हर कोई करता है, लेकिन नैक का निरीक्षण फिर भी कराने को तैयार नहीं हैं। यह स्थिति तो तब है जब यूजीसी ने पांच साल में एक बार नैक निरीक्षण कराने की गाइड लाइन भी जारी कर रखी है।
संस्थानों के अजीबोगरीब तर्क
कुछ संस्थान संचालकों का कहना है कि वह खुद में सक्षम हैं तो नैक की ग्रेडिंग कराकर रिस्क क्यों लिया जाए? नैक की ग्रेडिंग लेने के लिए संस्थान में पहले काफी बजट खर्च करना पड़ता है। हर छोटी-छोटी चीजों में सुधार करना पड़ता है, फिर भी यदि अच्छा ग्रेड नहीं मिलता तो संस्थान की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे अच्छा तो यही है कि जब तक ग्रेडिंग बिना चल रहा है चलता रहे।
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ये हैं ग्रेडिंग के फायदे
- शैक्षणिक संस्थान की क्षमता और कमजोरी की जानकारी मिलती है।
- योजना और रिसोर्स को अमलीजामा पहनाने का मौका मिलता है।
- इनोवेशन, रिसर्च और आधुनिक शिक्षा की ओर बढ़ा जा सकता है।
- टीचिंग, नॉन टीचिंग और छात्रों को जरूरी सुविधा या संसाधन मिल रहे हैं या नहीं, इसका पता चलता है।
- अच्छी ग्रेडिंग मिलने से संस्थान की ग्रांट बढ़ती है और नयी राह खुलती है।
नैक ग्रेडिंग में उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थिति
नाम कुल इन्होंने कराई ग्रेडिंग
अंबाला 25 7
महेंद्रगढ़ 15 0
हिसार 12 2
फतेहाबाद 13 3
रेवाड़ी 14 4
भिवानी 19 3
कैथल 41 2
करनाल 12 4
कुरुक्षेत्र 10 1
जींद 16 2
पानीपत 10 1
यमुनानगर 6 6
रोहतक 18 9
झज्जर 17 7
सोनीपत 36 7
फरीदाबाद 6 0
सिरसा 33 15
कुल 303 72
नोट : यह आंकड़े उन संस्थानों के हैं, जिन्होंने पिछले दस साल से ग्रेडिंग नहीं कराई। इसमें सरकारी, प्राइवेट और एडिड संस्थान शामिल हैं।
यह बोले वीसी
खुद की क्षमता जानने के लिए नैक से ग्रेडिंग करानी चाहिए। इससे टीचिंग स्टाफ में भी जागरूकता आती है और संस्थान को खुद की कमी का पता चलता है। नैक निरीक्षण नहीं कराने वाले संस्थानों की फंडिंग भी डिबार हो सकती है।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, कुलपति एमडीयू।
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उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता और सुविधाओं को जानने के लिए नैक से ग्रेडिंग ली जाती है। बाकायदा इसके लिए कॉलेजों को आवेदन करना होता है। इसके बाद नैक की टीम निरीक्षण के लिए आती है। निरीक्षण के समय कॉलेजों को पढ़ाई से लेकर, संसाधन, खेल और सांस्कृतिक-सामाजिक पैमाने पर परखा जाता है। इसके बाद ही ग्रेडिंग दी जाती है। नैक की टीम संस्थान को ए, बी और सी ग्रेड देती है, जिससे कॉलेज की एक छवि बनती है और उसी के आधार पर संस्थान टॉप रैंकिंग में शामिल होता है। प्रदेश के संस्थानों में अच्छी गुणवत्ता और सुविधाओं के दावे तो हर कोई करता है, लेकिन नैक का निरीक्षण फिर भी कराने को तैयार नहीं हैं। यह स्थिति तो तब है जब यूजीसी ने पांच साल में एक बार नैक निरीक्षण कराने की गाइड लाइन भी जारी कर रखी है।
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संस्थानों के अजीबोगरीब तर्क
कुछ संस्थान संचालकों का कहना है कि वह खुद में सक्षम हैं तो नैक की ग्रेडिंग कराकर रिस्क क्यों लिया जाए? नैक की ग्रेडिंग लेने के लिए संस्थान में पहले काफी बजट खर्च करना पड़ता है। हर छोटी-छोटी चीजों में सुधार करना पड़ता है, फिर भी यदि अच्छा ग्रेड नहीं मिलता तो संस्थान की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे अच्छा तो यही है कि जब तक ग्रेडिंग बिना चल रहा है चलता रहे।
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ये हैं ग्रेडिंग के फायदे
- शैक्षणिक संस्थान की क्षमता और कमजोरी की जानकारी मिलती है।
- योजना और रिसोर्स को अमलीजामा पहनाने का मौका मिलता है।
- इनोवेशन, रिसर्च और आधुनिक शिक्षा की ओर बढ़ा जा सकता है।
- टीचिंग, नॉन टीचिंग और छात्रों को जरूरी सुविधा या संसाधन मिल रहे हैं या नहीं, इसका पता चलता है।
- अच्छी ग्रेडिंग मिलने से संस्थान की ग्रांट बढ़ती है और नयी राह खुलती है।
नैक ग्रेडिंग में उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थिति
नाम कुल इन्होंने कराई ग्रेडिंग
अंबाला 25 7
महेंद्रगढ़ 15 0
हिसार 12 2
फतेहाबाद 13 3
रेवाड़ी 14 4
भिवानी 19 3
कैथल 41 2
करनाल 12 4
कुरुक्षेत्र 10 1
जींद 16 2
पानीपत 10 1
यमुनानगर 6 6
रोहतक 18 9
झज्जर 17 7
सोनीपत 36 7
फरीदाबाद 6 0
सिरसा 33 15
कुल 303 72
नोट : यह आंकड़े उन संस्थानों के हैं, जिन्होंने पिछले दस साल से ग्रेडिंग नहीं कराई। इसमें सरकारी, प्राइवेट और एडिड संस्थान शामिल हैं।
यह बोले वीसी
खुद की क्षमता जानने के लिए नैक से ग्रेडिंग करानी चाहिए। इससे टीचिंग स्टाफ में भी जागरूकता आती है और संस्थान को खुद की कमी का पता चलता है। नैक निरीक्षण नहीं कराने वाले संस्थानों की फंडिंग भी डिबार हो सकती है।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, कुलपति एमडीयू।