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गुरु तेग बहादुर ने समर्पण के बजाय शहादत को चुना : बतरा
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38...सुपवा में गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी के दौ
रोहतक। दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय (डीएलसी सुपवा) ने गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में संगोष्ठी का आयोजन किया। बतौर मुख्य वक्ता डॉ. आदित्य बतरा ने गुरु तेग बहादुर साहिब के जीवन का सम्मोहक वृतांत प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि कैसे गुरु तेग बहादुर ने मुगल सम्राट औरंगजेब के अधीन धार्मिक उत्पीड़न के खिलाफ खड़े होकर समर्पण के बजाय शहादत को चुना।
सेमिनार की शुरुआत से पहले लाल किला बम विस्फोट पीड़ितों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया। यह संगोष्ठी कुलपति डॉ. अमित आर्य के संरक्षण में आयोजित की गई थी। कुलसचिव डॉ. गुंजन मलिक मनोचा ने शिक्षा और चिंतन के माध्यम से गुरु की शिक्षाओं को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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उन्होंने बताया कि कैसे गुरु तेग बहादुर ने मुगल सम्राट औरंगजेब के अधीन धार्मिक उत्पीड़न के खिलाफ खड़े होकर समर्पण के बजाय शहादत को चुना।
सेमिनार की शुरुआत से पहले लाल किला बम विस्फोट पीड़ितों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया। यह संगोष्ठी कुलपति डॉ. अमित आर्य के संरक्षण में आयोजित की गई थी। कुलसचिव डॉ. गुंजन मलिक मनोचा ने शिक्षा और चिंतन के माध्यम से गुरु की शिक्षाओं को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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