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पत्नी को जज बनाने के लिए पति ने छोड़ी नौकरी, मिला मुकाम
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 16 May 2017 02:24 AM IST
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एमडीयू में पढ़ने के बाद रोहतक कोर्ट में की लॉ की प्रेक्टिस
- फोटो : amar ujala
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एक बेटी के सपने को पूरा करने के लिए पहले मां ने खेतों में काम किया और फिर पति ने हर मोर्चे पर साथ दिया। इतना ही नहीं, शादी के बाद बच्चा होने पर पति ने बेटे की देखभाल के लिए अपनी नौकरी भी छोड़ दी। सोनीपत के गांव गिवाना की स्वाति खरब ने गुजरात की न्यायिक परीक्षा में पूरे प्रदेश में चौथा स्थान पाया है। स्वाति ने बताया कि उनके साथ उनके परिवार वालों ने भी लंबा संघर्ष किया है। स्वाति ने बताया कि उन्होंने लॉ की पढ़ाई एमडीयू से की है। इसके बाद रोहतक कोर्ट में प्रेक्टिस भी की। इस तरह स्वाति की उपलब्धि से रोहतक के साथ सोनीपत में खुशी का माहौल है।
गांव के सरकारी स्कूल से की पढ़ाई
स्वाति का कहना है कि घर के हालात अच्छे नहीं थे। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी हाईस्कूल से की। उसके बाद पास के गांव के राजकीय सीनियर सेकेंडरी से बारहवीं पास की। उन्होंने लॉ के लिए एमडीयू में पढ़ाई की। बार काउंसिल पंजाब एंड हरियाणा से एनरॉल होने पर उन्होंने रोहतक में कोर्ट में प्रैक्टिस की।
बेटी के सपने के लिए मां ने किया खेतों में काम
चार बहनों और भाईयों में स्वाति सबसे छोटी थी। स्वाति ने बताया कि उनकी मां का सपना था कि उनके बच्चे फर्स्ट क्लास ऑफिसर बनें। मां ने पढ़ाई के लिए खूब पसीना बहाया। वह दिनभर खेतों में काम करती थी। उन्होंने मां के सपने को पूरा करने का ठान लिया था। तीसरी कक्षा में थीं तो घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। सिर ढकने के लिए घर पर छत भी नहीं थी। उस समय उन्हें लकड़ी और घास-फूस से बने छप्पर में रहना पड़ा था।
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बेटे को संभालने के लिए पति ने छोड़ी नौकरी
स्वाति ने बताया कि उनकी शादी 2011 में सोनीपत निवासी विनोद खत्री से हुई। वह एक निजी यूनिवर्सिटी में डाटा इंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे। परिवार और समाज की जिम्मेदारी के बीच 2014 में उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। बेटे की परवरिश में उनकी तैयारियों पर ब्रेक ही लग गया था। इस समय जज बनने का उनका सपना धुंधला पड़ने लगा था। इसी बीच पति ने नौकरी छोड़कर बेटे की जिम्मेदारी ली और मुझे पढ़ाई पर फोकस करने को कहा।
असफलता से सीख ले पाई सफलता
स्वाति का जज बनने का सपना ऐसे ही पूरा नहीं हुआ। इसके लिए उन्होंने 11 बार मेन्स की परीक्षा दी। पांच बार इंटरव्यू में असफल रहने के बाद भी उसका साहस नहीं टूटा। उन्होंने 29 जनवरी को हुए न्यायिक परीक्षा में लिखित में सफलता हासिल की। इसके बाद पूरी प्रक्रिया के बाद उन्हें चौथी रैंक मिली है। अब वह अहमदाबाद स्थित ज्यूडिशियल एकेडमी में ट्रेनिंग के लिए जाएंगी।
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गांव के सरकारी स्कूल से की पढ़ाई
स्वाति का कहना है कि घर के हालात अच्छे नहीं थे। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी हाईस्कूल से की। उसके बाद पास के गांव के राजकीय सीनियर सेकेंडरी से बारहवीं पास की। उन्होंने लॉ के लिए एमडीयू में पढ़ाई की। बार काउंसिल पंजाब एंड हरियाणा से एनरॉल होने पर उन्होंने रोहतक में कोर्ट में प्रैक्टिस की।
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बेटी के सपने के लिए मां ने किया खेतों में काम
चार बहनों और भाईयों में स्वाति सबसे छोटी थी। स्वाति ने बताया कि उनकी मां का सपना था कि उनके बच्चे फर्स्ट क्लास ऑफिसर बनें। मां ने पढ़ाई के लिए खूब पसीना बहाया। वह दिनभर खेतों में काम करती थी। उन्होंने मां के सपने को पूरा करने का ठान लिया था। तीसरी कक्षा में थीं तो घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। सिर ढकने के लिए घर पर छत भी नहीं थी। उस समय उन्हें लकड़ी और घास-फूस से बने छप्पर में रहना पड़ा था।
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बेटे को संभालने के लिए पति ने छोड़ी नौकरी
स्वाति ने बताया कि उनकी शादी 2011 में सोनीपत निवासी विनोद खत्री से हुई। वह एक निजी यूनिवर्सिटी में डाटा इंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे। परिवार और समाज की जिम्मेदारी के बीच 2014 में उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया। बेटे की परवरिश में उनकी तैयारियों पर ब्रेक ही लग गया था। इस समय जज बनने का उनका सपना धुंधला पड़ने लगा था। इसी बीच पति ने नौकरी छोड़कर बेटे की जिम्मेदारी ली और मुझे पढ़ाई पर फोकस करने को कहा।
असफलता से सीख ले पाई सफलता
स्वाति का जज बनने का सपना ऐसे ही पूरा नहीं हुआ। इसके लिए उन्होंने 11 बार मेन्स की परीक्षा दी। पांच बार इंटरव्यू में असफल रहने के बाद भी उसका साहस नहीं टूटा। उन्होंने 29 जनवरी को हुए न्यायिक परीक्षा में लिखित में सफलता हासिल की। इसके बाद पूरी प्रक्रिया के बाद उन्हें चौथी रैंक मिली है। अब वह अहमदाबाद स्थित ज्यूडिशियल एकेडमी में ट्रेनिंग के लिए जाएंगी।