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Rohtak News: निशुल्क उपचार से 15 दिन में हो रहा नशे की आदत में सुधार

Fri, 27 Mar 2026 11:50 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2026 11:50 PM IST
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Free treatment improves addiction in 15 days
1-पीजीआई ​स्थित राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र। संवाद
अभिषेक कीरत
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रोहतक। पीजीआई का राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र (नशा मुक्ति केंद्र) नशे को खत्म करने में अहम भूमिका निभा रहा है। यहां पहुंचने वाले चिट्टा, हेरोइन व स्मैक के मरीजों को 15 दिन बाद ही खुद में बदलाव देखने को मिल रहा है।
पिछले पांच साल में यहां 11 हजार से अधिक नशे के मरीज पहुंचे हैं। जब संवाद न्यूज एजेंसी की टीम केंद्र में नशे के मरीजों से उपचार का फीडबैक जाना।
यहां नशा मुक्ति केंद्र में मंगलवार, वीरवार व शनिवार को ओपीडी लगती है। हर हफ्ते ओपीडी में करीब 50 मरीज पहुंचते हैं। इनमें अधिकतर झज्जर, सोनीपत, दिल्ली, चरखी दादरी, भिवानी व हिसार से आते हैं। मरीजों को नशा छुड़ाने की दवाइयां निशुल्क दी जाती हैं। संवाद
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केस-1
केंद्र में आए 25 वर्षीय मरीज ने बताया कि वह बीए का छात्र है। डेढ़ साल पहले पढ़ाई के साथ मोबाइल फोन की दुकान शुरू की थी। यहां दोस्त आकर बैठने लगे। शरीर से दर्द को निजात दिलाने वाली गोलियां खाते थे।
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उनके कहने से एक गोली मैंने भी ले ली। अगले दिन फिर एक गोली और ले ली। इससे दिमाग को राहत मिलने लगी। धीरे-धीरे संख्या बढ़कर सात गोलियों तक पहुंच गई। शरीर मेें दर्द व टूटन सी रहने लगी तो एहसास हुआ कि इसे छोड़ देना चाहिए। यहां इलाज के लिए करीब 20 दिन पहले आया था। अब बदलाव दिखने लगा हैै। शुरुआत में दिक्कत हुई थी। अब दवा लेने पर गोलियां खाने का कम मन करता है। अब माता-पिता का भी मेरे प्रति व्यवहार बदलने लगा है।

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केस-2
केंद्र में आए 29 साल के मरीज ने बताया कि दोस्त नशा करते थे। वे चिट्टे को गर्म करके पानी में मिलाकर सीधा नसाें में चढ़ाते थे। एक दिन उन्होंने मना करते-करते इंजेक्शन लगा दिया। इसको लगाकर दिमाग शांत और शरीर भी हल्का महसूस करने लगा। शौकिया तौर पर शुरू हुआ नशा आदत बन गया। काम करना भी छोड़ दिया। नशे के लिए पैसे नहीं होने पर घर ही नहीं बाहर भी चोरी करनी शुरू कर दी। आंखों से पानी बहना नहीं रुकता था। परिजन पीजीआई के नशा मुक्ति केंद्र लेकर आए। यहां पंद्रह दिन में बदलाव आया है। अब आंखों से पानी बहना भी बंद हो गया है। ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार को भी पैसे देने शुरू कर दिए। इससे परिवार का व्यवहार भी बदलने लगा है। दूसरों से भी कहूंगा, नशे में जिंदगी बर्बाद करने की बजाय परिवार व खुद की इज्जत पर ध्यान दें।
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वर्जन
यहां मरीजों को सभी दवाएं निशुल्क मुहैया कराई जा रही हैं। इनमें महंगी दवाएं भी शामिल हैं। काउंसिलिंग व इलाज के बाद इनमें सुधार दर्ज किया जा रहा है।
- प्रो. विनय कुमार, राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र
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