फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Four-day long Chhath festival of public faith will start with bathing today

आज नहाय-खाय से शुरू होगा लोक आस्था का चार दिवसीय छठ महापर्व

Mon, 08 Nov 2021 12:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 12:51 AM IST
विज्ञापन
Four-day long Chhath festival of public faith will start with bathing today
लोक आस्था का महापर्व छठ नहाय-खाय के साथ सोमवार से शुरू होगा। चार दिवसीय महापर्व का समापन 11 नवंबर को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। इस दौरान जिले के विभिन्न स्थानों पर पूर्वांचल की संस्कृति देखने को मिलेगी। पर्व को मानने के लिए अस्थल बोहर स्थित भालौठ सब ब्रांच नहर पर पूर्वांचल एकता सेवा समिति ने पूरी तैयारियां कर ली हैं।
विज्ञापन

दुर्गा भवन मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज मिश्र ने बताया कि छठ पूजा की रौनक जोरों पर है। छठ पूजा यूं तो एक क्षेत्रीय त्योहार है, लेकिन वर्तमान में इसका रंग देश के कोने-कोने में देखने को मिलता है। छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्य देव को समर्पित होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठ मईया सूर्य देवता की बहन हैं। ऐसे में छठ पूजा के दौरान सूर्यदेव की पूजा करने से छठ मईया की प्रसन्नता हासिल होती है, इससे व्यक्ति के घर में सुख-शांति और धन संपदा बनी रहती है।
विज्ञापन

छठ पूजा के कार्यक्रम
पहला दिन : नहाय-खाय (सोमवार, चतुर्थी)
दूसरा दिन : खरना (मंगलवार, पंचमी)
तीसरा दिन : अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य (बुधवार, षष्ठी)
चौथा दिन : उदयगामी सूर्य को अर्घ्य और पारण (वीरवार, सप्तमी)
36 घंटे निर्जला रहती हैं व्रती
कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व का शुभारंभ होता है। इस दिन व्रती स्नान के बाद नए वस्त्र पहनतीं हैं और शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करतीं हैं। व्रती के भोजना करने के बाद घर के अन्य लोग भोजन करते हैं। दूसरे दिन पंचमी तिथि को खरना होता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास करतीं हैं और शाम के वक्त भोजन करतीं हैं। शाम के समय चावल और गुड़ से खीर बनाई जाती है और उसे ही खाया जाता है। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। छठ पूजा का तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन ठेकुआ का प्रसाद बनाया जाता है। इसके अलावा चावल के लड्डू भी बनाए जाते हैं। सभी प्रसादों और फलों को एक बांस की टोकरी में सजाया जाता है, जिसे लेकर किसी तालाब, नदी या घाट के किनारे जाकर सूर्य देवता को अर्घ्य दिया जाता है। व्रत के आखिरी दिन उदयगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पूर्वांचल एकता सेवा समिति के तत्वावधान में भालौठ सब ब्रांच पर साफ-सफाई व अन्य इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके लिए घाट का मुआयना करने रविवार को सिंचाई विभाग के उप मंडल अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, भाजपा के जिलाध्यक्ष अजय बंसल, डॉ. रणवीर ढाका पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया है। समिति के उपप्रधान सुबोध ठेकेदार भी व्यवस्था में लगे हैं।
- रणधीर राय राहुल, महासचिव, पूर्वांचल एकता सेवा समिति
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed