NEET: एक ने घर में रखा टीवी बेचा तो एक ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी, पसंदीदा विषय को बनाया लक्ष्य
नीट में देश में 38वें स्थान पर रही निशा, अक्षत ने प्रदेश में पाया 49वां रैंक। परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। निशा ने पिछले दो साल से टीवी देखा न सोशल मीडिया का उपयोग किया।
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युवा पीढ़ी में दूसरों से अलग हट कर कुछ नया करने की ललक साफ नजर आ रही है। अपना लक्ष्य हासिल कर भविष्य संवारने के लिए वे भौतिक सुखों को भी त्यागने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। नीट परीक्षा में देश के पहले 50 टॉपरों में शामिल निशा (38वां स्थान) व अक्षत (49वां रैंक) ने कुछ ऐसा ही किया है।
निशा ने पिछले दो साल से टीवी देखा न सोशल मीडिया का उपयोग किया। यही नहीं, अपने पसंदीदा विषय बायोलॉजी को ही जीवन का लक्ष्य बना लिया। अब वह डॉक्टर बनने की दहलीज पर कदम रख चुकी है। अक्षत ने तो डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए दो साल पहले घर में रखा टीवी की बेच डाला। पैसों के लिए नहीं, बल्कि पढ़ाई से ध्यान भंग न हो, इसलिए। अमर उजाला ने इन दोनों विद्यार्थियों से बातचीत की तो इन्होंने अपने लक्ष्य और इसे हासिल करने के लिए किए संघर्ष से अवगत कराया।
बायोलॉजी पसंद है, बनना है डॉक्टर
एमडीयू कैंपस में रहने वाली व देश में 38वां स्थान पाने वाली निशा का दावा है कि नीट की तैयारी मुश्किल नहीं आसान है। बशर्ते विद्यार्थी समय पर अध्ययन करने के साथ लगातार अभ्यास जारी रखे। इसमें किसी तरह की कोताही या आरामपसंद न बने। छोटे-छोटे लक्ष्य हासिल करता चले। छोटे लक्ष्य से ही बड़ा लक्ष्य हासिल करना संभव है। विद्यार्थी अपना काम करे। वह परिणाम पर ध्यान न दे। कर्म पर जोर दे। मुझे डॉक्टर बनना है।
दसवीं कक्षा में इस बारे में सोचा था। मुझे बायोलॉजी पसंद है। इसी विषय को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया है। डॉक्टर बनकर मेडिसन में रिसर्च करनी है। इसलिए अपने पसंदीदा विषय में ईमानदारी से अध्ययन कर रही हूं। इसी विषय ने नीट परीक्षा का टॉपर बनाया है। इस विषय में शत प्रतिशत अंक लेकर दूसरे विषय की कमी पूरी कर पाई हूं।
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अपना सपना पूरा करने के लिए दिन भर पढ़ाई की। टीवी व सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। सिर्फ पढ़ाए गए विषय पर ध्यान रखा। आराम न करके लगातार अध्ययन किया। सोना तो वह भूल ही गई। तब तक पढ़ती थी, जब तक शरीर साथ नहीं छोड़ देता था। मेरे शिक्षक ने भी यही सिखाया कि जब तक शरीर में जान है, जागती रहो, पढ़ती रहो। इसी से सफल बनी। इस सफलता में आकाश संस्था के शिक्षकों का अहम योगदान रहा है। शिक्षकों ने बेहतर ढंग से पढ़ाते हुए हर मुश्किल को आसान किया है। मेरे अव्वल आने से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। पिता नरेश अहलावत डीएसडब्लू विभाग में तैनात हैं। मां गृहिणी है।
मेरे सपने की राह का रोड़ा न बने इसलिए बेच दिया टीवी
डॉक्टर बनने का जुनून अक्षत पर इस कदर हावी है कि उसने घर में रखा टीवी सिर्फ इसलिए बेच दिया कि वह उसके सपने ही राह में रोड़ा न बन जाए। पिछले दो साल से उसने टीवी देखा न सोशल मीडिया से जुड़ा। यही नहीं, बैडमिंटन व चेस खेलने के शौकीन इस छात्र ने दो साल से खेल के मैदान में कदम तक नहीं रखा है। उसका लक्ष्य अपने बचपन के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने पर रहा।
इसके लिए दिन में आठ से दस घंटे पढ़ाई की। नीट में प्रदेश में दूसरा स्थान आया तो परिवार झूम उठा। यही नहीं, इसके बावजूद मन में खुशी नजर नहीं आई। उसका लक्ष्य इससे भी बेहतर रैंक हासिल करने का था। इसकी वजह उसे देश के सबसे बेहतर चिकित्सा संस्थान एम्स में दाखिला लेना है। अक्षत ने बताया कि वह कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहता है। इस बारे में कक्षा दस में सोचा था।
इससे पूर्व उसके दिल का ऑपरेशन हो चुका था। यहीं से कार्डियोलॉजिस्ट बनने की इच्छा घर कर गई थी। अपने ऑपरेशन की मुश्किलें देख दूसरों की राह आसान बनाने के लिए डॉक्टर बनने का फैसला किया। उसने बताया कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा हूं। आकाश संस्था में शिक्षकों ने अच्छा पढ़ाने के साथ मॉड्यूल पेपर ढंग से करना समझाया।
कक्षा में पढ़े हुए का रोजाना अभ्यास किया। साथ ही आत्मविश्वास कमजोर नहीं होने दिया। इसके लिए शिक्षकों ने लगातार प्रोत्साहित किया। इसी के चलते यह लक्ष्य हासिल कर पाया। पिता सुरेंद्र कुमार जींद के सरकारी स्कूल में अंग्रेजी विषय के लेक्चरर हैं। मां सरला देवी गृहिणी हैं।