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तीन राज्यों के किसान-मजदूर 23 को पहुंचेंगे दिल्ली बॉर्डर पर, मनाएंगे शहीदी दिवस
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शहीदी दिवस पर किसान मजदूर पदयात्राओं को लेकर पत्रकारों से वार्ता करते किसान सभा के इंद्रजीत सिं?
तीन राज्यों से 18 मार्च को किसानों-मजदूरों की चार पदयात्राएं निकाली जाएंगी, जो 23 मार्च को दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर पर पहुंचेंगी। पदयात्रा में शामिल लोग यहां पहुंचकर क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का शहीदी दिवस मनाएंगे। यह जानकारी किसान सभा के इंदरजीत सिंह व सुमित दलाल तथा मजदूर नेता जय भगवान व सुरेखा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी है।
उन्होंने बताया कि एक यात्रा लाल सड़क (हांसी) से शुरू होकर 23 मार्च को टीकरी बॉर्डर पर पहुंचेगी। शहीदे-आजम भगत सिंह की भांजी गुरजीत कौर हांसी पहुंच कर पदयात्रा को हरी झंडी दिखा कर रवाना करेंगी। इस अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चे के प्रमुख नेता डॉ. अशोक ढवले, मेजर सिंह पुन्नूवाल, खेत मजदूर नेता विक्रम सिंह, मजदूर नेता जय भगवान, डॉ. सुखदेव सिंह जम्मू, प्रेम सिंह गहलाव, सत्यवान भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि हिसार के हांसी को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए किसानों के विद्रोह के केंद्र के रूप में जाना जाता है। जींद के खटकड़ टोल से पदयात्रा शुरू होगी, जो रोहतक में हांसी वाली यात्रा से मिल जाएगी। एक जत्था पंजाब में शहीद भगत सिंह के गांव खटकड़कलां से शुरू होकर पानीपत जाएगा। वह हरियाणा के जत्थे से मिलकर 23 मार्च को सिंधू बॉर्डर पहुंचेगा। उधर, एक पदयात्रा मथुरा से शुरू होकर पलवल पड़ाव पर पहुंचेगी।
उन्होंने कहा कि पदयात्रा के दौरान रास्ते में पड़ने वाले गांव व कस्बों में जनसभाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहां किसान आंदोलन से संबंधित साहित्य व प्रचार सामग्री उपलब्ध होगी। महिला, कर्मचारी, छात्र और सामाजिक संगठनों से पदयात्राओं के सहयोग की अपील की गई है। स्थानीय लोगों और गांवों की पंचायतों ने जत्थों के स्वागत, ठहरने, भोजन, चाय, पानी की व्यवस्था के लिए स्वागत कमेटियां गठित की हैं।
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उन्होंने बताया कि एक यात्रा लाल सड़क (हांसी) से शुरू होकर 23 मार्च को टीकरी बॉर्डर पर पहुंचेगी। शहीदे-आजम भगत सिंह की भांजी गुरजीत कौर हांसी पहुंच कर पदयात्रा को हरी झंडी दिखा कर रवाना करेंगी। इस अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चे के प्रमुख नेता डॉ. अशोक ढवले, मेजर सिंह पुन्नूवाल, खेत मजदूर नेता विक्रम सिंह, मजदूर नेता जय भगवान, डॉ. सुखदेव सिंह जम्मू, प्रेम सिंह गहलाव, सत्यवान भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि हिसार के हांसी को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए किसानों के विद्रोह के केंद्र के रूप में जाना जाता है। जींद के खटकड़ टोल से पदयात्रा शुरू होगी, जो रोहतक में हांसी वाली यात्रा से मिल जाएगी। एक जत्था पंजाब में शहीद भगत सिंह के गांव खटकड़कलां से शुरू होकर पानीपत जाएगा। वह हरियाणा के जत्थे से मिलकर 23 मार्च को सिंधू बॉर्डर पहुंचेगा। उधर, एक पदयात्रा मथुरा से शुरू होकर पलवल पड़ाव पर पहुंचेगी।
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उन्होंने कहा कि पदयात्रा के दौरान रास्ते में पड़ने वाले गांव व कस्बों में जनसभाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहां किसान आंदोलन से संबंधित साहित्य व प्रचार सामग्री उपलब्ध होगी। महिला, कर्मचारी, छात्र और सामाजिक संगठनों से पदयात्राओं के सहयोग की अपील की गई है। स्थानीय लोगों और गांवों की पंचायतों ने जत्थों के स्वागत, ठहरने, भोजन, चाय, पानी की व्यवस्था के लिए स्वागत कमेटियां गठित की हैं।
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