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यूक्रेन गए 43 छात्रों से दूतावास ने भरवाया 20 कॉलम का फार्म, 7 सिटीजन भी हैं फंसे
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जिले के छात्र ही नहीं, सिटीजन भी विदेशों में कोरोना माहमारी के कारण लॉकडाउन में फंसे हैं। इसमें सबसे ज्यादा मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गए 43 छात्र और सात सिटीजन शामिल हैं। मंगलवार तक यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने छात्रों से 5 मई तक ऑनलाइन पोर्टल पर 20 कॉलम का फार्म भरवाया है। इसमें विदेश व स्वदेश में नाम व पते से लेकर, पासपोर्ट नंबर, यात्रा का किराये देने की स्थिति व कोविड-19 का टेस्ट करवाया है या नहीं की जानकारी मांगी गई हैं। उम्मीद है जल्द भारतीय छात्र स्वदेश आ जाएंगे। दुनियाभर में जिले के करीब 113 छात्र अलग-अलग देश में फंसे हुए हैं। जिला मुख्यालय की तरफ से तीन दिन पहले 98 छात्रों की सूची भेजी गई थी। अब 19 नए आवेदन आए हैं, इनमें 15 छात्र हैं।
किराये पर सस्पेंस, सरकार लेगी निर्णय
कॉलम के अंदर पूछा गया था कि आप किराया भर सकते हैं या नहीं। फिलहाल कॉलम भर दिया गया है। अब सरकार को तय करना है कि छात्रों से दोनों तरफ का किराया लेगी या एक तरफ का।
- डॉ. दिनेश घिलौड़, यूक्रेन में फंसे छात्र के पिता
बैंगलोर में फंसे हैं प्रदेश के 31 बच्चे
- राष्ट्रीय सेना स्कूल में कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई कर रहे है ये विद्यार्थी
- रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी, हिसार, सिरसा, भिवानी, जींद, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम के हैं बच्चे
रोहतक। लॉकडाउन में उत्तर भारत के 65 से ज्यादा बच्चे बैंगलोर में फंसे हैं। राष्ट्रीय सेना स्कूल बैंगलोर में कक्षा छह से 12वीं तक के इन विद्यार्थियों में से 31 हरियाणा के हैं। इसमें रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, हिसार, सिरसा, भिवानी, जींद जिला शामिल है। इस मामले को लेकर मंगलवार को अभिभावकों ने सांसद दीपेंद्र हुड्डा से मुलाकात कर राहत की गुहार लगाई। सांसद ने उन्हें उचित मदद का आश्वासन दिया है।
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कोरोना महामारी के चलते बैंगलोर में फंसे बच्चों को घर लाने के लिए अभिभावक परेशान हैं। इसके लिए कई बार प्रयास कर चुके हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी इलाके के लोगों ने पत्र लिखकर राहत की अपील की थी। इसकी अब तक सुनवाई नहीं हुई है। यही नहीं एक बार स्कूल प्रशासन से भी बात हुई। उस समय किसी विशेष ट्रेन में जगह मिलने पर बच्चों को घर भेजने की बात हुई थी, मगर वह ट्रेन अब तक नहीं चली है। ऐसे में बच्चे व अभिभावक दोनों परेशान हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को वहां रहने खाने की सुविधा तो है, मगर खेलने, घूमने या अन्य किसी बात की छूट नहीं है। इस कारण वे ज्यादा परेशान हैं। झज्जर के विनोद खरमाण ने बताया कि मेरा बेटा आयुष सांगवान इसी वर्ष कक्षा 10वीं में गया है। परीक्षा के बाद उसे घर आना था, मगर लॉकडाउन के कारण वह वहीं फंसा हुआ है। वहां से बच्चों को लाने के लिए अभिभावकों ने कई प्रयास किए। हवाई यात्रा व स्पेशल ट्रेन के जरिये भी प्रयास असफल रहा। कहीं सुनवाई नहीं हुई। इसलिए मंगलवार को सांसद दीपेंद्र से मुलाकात की है। यहां से मदद का आश्वासन मिला है।
नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों को छिंदवाड़ा से महाराष्ट्र की बस लेकर जाएगी
जिला प्रशासन की अनुमति से 10 दिन में 18 विद्यार्थियों के साथ करीब 300 लोग अपने घर जा चुके हैं। नवोदय विद्यालय घुसकानी के विद्यार्थियों को रोहतक डिपो की बस से मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के लिए सोमवार को रवाना किया गया। जहां से आगे महाराष्ट की बस विद्यार्थियों को लेकर जाएगी। नवोदय विद्यालय घुसकानी में हरियाणा संस्कृति जानने के लिए यवतमाल महाराष्ट्र के छात्र-छात्राएं आए थे, जो लॉकडाउन की वजह से रोहतक में फंस गए थे। प्रधानाचार्य ने विगत सप्ताह जिला प्रशासन से बच्चों को भेजने की अनुमति मांगी, जिस पर सोमवार को अनुमति मिलने पर बच्चों को छिंदवाड़ा रवाना किया गया। रोहतक रोडवेज डिपो के ट्रैफिक मैनेजर नवीन कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन के आदेश पर ही बसों को गंतव्य के लिए भेजा जा रहा है। उपायुक्त का पत्र मिलने के बाद ही बस भेजते हैं। छिंदवाड़ा के लिए गई बस का भाड़ा 44.20 रुपये प्रति किमी. के हिसाब से लिया जाएगा।
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किराये पर सस्पेंस, सरकार लेगी निर्णय
कॉलम के अंदर पूछा गया था कि आप किराया भर सकते हैं या नहीं। फिलहाल कॉलम भर दिया गया है। अब सरकार को तय करना है कि छात्रों से दोनों तरफ का किराया लेगी या एक तरफ का।
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- डॉ. दिनेश घिलौड़, यूक्रेन में फंसे छात्र के पिता
बैंगलोर में फंसे हैं प्रदेश के 31 बच्चे
- राष्ट्रीय सेना स्कूल में कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई कर रहे है ये विद्यार्थी
- रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी, हिसार, सिरसा, भिवानी, जींद, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम के हैं बच्चे
रोहतक। लॉकडाउन में उत्तर भारत के 65 से ज्यादा बच्चे बैंगलोर में फंसे हैं। राष्ट्रीय सेना स्कूल बैंगलोर में कक्षा छह से 12वीं तक के इन विद्यार्थियों में से 31 हरियाणा के हैं। इसमें रोहतक, झज्जर, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, हिसार, सिरसा, भिवानी, जींद जिला शामिल है। इस मामले को लेकर मंगलवार को अभिभावकों ने सांसद दीपेंद्र हुड्डा से मुलाकात कर राहत की गुहार लगाई। सांसद ने उन्हें उचित मदद का आश्वासन दिया है।
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कोरोना महामारी के चलते बैंगलोर में फंसे बच्चों को घर लाने के लिए अभिभावक परेशान हैं। इसके लिए कई बार प्रयास कर चुके हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी इलाके के लोगों ने पत्र लिखकर राहत की अपील की थी। इसकी अब तक सुनवाई नहीं हुई है। यही नहीं एक बार स्कूल प्रशासन से भी बात हुई। उस समय किसी विशेष ट्रेन में जगह मिलने पर बच्चों को घर भेजने की बात हुई थी, मगर वह ट्रेन अब तक नहीं चली है। ऐसे में बच्चे व अभिभावक दोनों परेशान हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को वहां रहने खाने की सुविधा तो है, मगर खेलने, घूमने या अन्य किसी बात की छूट नहीं है। इस कारण वे ज्यादा परेशान हैं। झज्जर के विनोद खरमाण ने बताया कि मेरा बेटा आयुष सांगवान इसी वर्ष कक्षा 10वीं में गया है। परीक्षा के बाद उसे घर आना था, मगर लॉकडाउन के कारण वह वहीं फंसा हुआ है। वहां से बच्चों को लाने के लिए अभिभावकों ने कई प्रयास किए। हवाई यात्रा व स्पेशल ट्रेन के जरिये भी प्रयास असफल रहा। कहीं सुनवाई नहीं हुई। इसलिए मंगलवार को सांसद दीपेंद्र से मुलाकात की है। यहां से मदद का आश्वासन मिला है।
नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों को छिंदवाड़ा से महाराष्ट्र की बस लेकर जाएगी
जिला प्रशासन की अनुमति से 10 दिन में 18 विद्यार्थियों के साथ करीब 300 लोग अपने घर जा चुके हैं। नवोदय विद्यालय घुसकानी के विद्यार्थियों को रोहतक डिपो की बस से मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा के लिए सोमवार को रवाना किया गया। जहां से आगे महाराष्ट की बस विद्यार्थियों को लेकर जाएगी। नवोदय विद्यालय घुसकानी में हरियाणा संस्कृति जानने के लिए यवतमाल महाराष्ट्र के छात्र-छात्राएं आए थे, जो लॉकडाउन की वजह से रोहतक में फंस गए थे। प्रधानाचार्य ने विगत सप्ताह जिला प्रशासन से बच्चों को भेजने की अनुमति मांगी, जिस पर सोमवार को अनुमति मिलने पर बच्चों को छिंदवाड़ा रवाना किया गया। रोहतक रोडवेज डिपो के ट्रैफिक मैनेजर नवीन कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन के आदेश पर ही बसों को गंतव्य के लिए भेजा जा रहा है। उपायुक्त का पत्र मिलने के बाद ही बस भेजते हैं। छिंदवाड़ा के लिए गई बस का भाड़ा 44.20 रुपये प्रति किमी. के हिसाब से लिया जाएगा।