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रोहतक: नहीं मिल रहा ब्लैक फंगस का इंजेक्शन, पीजीआई में भर्ती हैं आठ मरीज
Sun, 16 May 2021 12:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 16 May 2021 12:34 AM IST
सार
ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन रखे-रखे खराब हो जाते थे। इनको लाइट से बचाना होता है। इसलिए इसे अधिक स्टॉक में नहीं रखा जाता।
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PGI ROHTAK
विस्तार
रोहतक में ब्लैक फंगस के आठ मरीज पीजीआईएमएस के ईएनटी विभाग में भर्ती हैं। इसमें से पांच मरीजों का ऑपरेशन कर दिया गया है। अभी तीन अन्य मरीजों की स्थिति पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि मरीजों के उपचार में प्रयोग होने वाला इंजेक्शन शनिवार को भी शहर में नहीं मिला। परिजनों को दिल्ली से सवा दो हजार का इंजेक्शन सात हजार रुपये में लाना पड़ा।
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पीजीआईएमएस के ईएनटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. आदित्य भार्गव ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद जितने भी ब्लैक फंगस के मरीज हमारे पास आए हैं, सभी ठीक हो गए हैं। यहां सिर्फ दो मरीजों की मौत हुई थी, इसमें से एक मरीज हमारे पास नहीं आया। वह आईसीयू में भर्ती था। एक अन्य मरीज की मौत हमारे यहां ऑपरेशन होने के तीन माह बाद हुई थी। पीजीआईएमएस में यमुनानगर, फतेहाबाद और दिल्ली से भी मरीज आ रहे हैं।
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डॉ. भार्गव ने बताया कि ब्लैक फंगस के केस साल में एक या दो ही आते थे। अधिक से अधिक चार केस साल में आ जाते थे लेकिन कोरोना की लहर के बाद इनकी संख्या एकदम बढ़ी है। विभाग हर मरीज का डाटा एकत्रित कर सर्च कर रहा है, इसमें पता लगाया जा रहा है कि यह बीमारी किसे हो रही है। मरीज की उम्र व उसकी केस हिस्ट्री क्या है। इंजेक्शन की कमी की जो बात सामने आ रही है, हमने डिमांड भेज दी है। बताया जा रहा है कि सेंट्रल स्टोर से इंजेक्शन उपलब्ध हो जाएंगे, लेकिन जब तक इंजेक्शन नहीं आते, तब तक समस्या तो है ही।
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स्थानीय स्तर पर इंजेक्शन हैं नहीं या कालाबाजारी का चक्कर है, कहा नहीं जा सकता। किसी ने नहीं सोचा था कि इतने केस एक साथ आ जाएंगे। डॉ. आदित्य ने बताया कि मरीजों को इससे डरने की नहीं जागरूक होने की जरूरत है। यदि बीमारी का समय पर पता लगा लिया जाए तो बड़ी समस्या से बचा जा सकता है।
60 किलो के आदमी को लगती है 60 डोज
ब्लैक फंगस का मरीज यदि 60 किलो का है तो उसे 60 डोज लगती हैं। ऐसे में सवा दो हजार का इंजेक्शन अब सात हजार के हिसाब से मरीज को साढ़े चार लाख रुपये का पड़ता है। इसके बाद ऑपरेशन में आने वाला खर्च अलग से।