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बासमती धान की रोपाई नहीं, बिजाई करें, पैसा और पानी दोनों बचेंगे
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धान की रोपाई का सीजन एक माह बाद शुरू हो जाएगा। इससे पहले 15 मई से नर्सरी की तैयारी हो जाती है, लेकिन इस बार किसान प्रवासी मजदूरों के पलायन से परेशान हैं। चिंता है कि अगर समय पर धान की रोपाई नहीं हो सकी तो नर्सरी तैयार करने का कोई फायदा नहीं होगा। वहीं, कृषि विभाग ने किसानों को बासमती धान की रोपाई की जगह बिजाई का विकल्प दिया है। इससे पैदावार लगभग बराबर होती है। जिले के किसान 500 हेक्टेयर में इस विधि से धान की खेती कर रहे हैं। वहीं डीडीए रोहताश सिंह ने बताया कि बासमती धान की काश्त, सुप्रबंधित क्रियाओं को अपनाकर बगैर-कद्दू अवस्था में सीधी बिजाई सफलतापूर्वक की जा सकती है। इससे भूमि एंव जल-संसाधन संरक्षण की साथ-साथ मजदूरों व ऊर्जा की बचत होगी। इस पर फैसला लेने से पहले किसान मिट्ठी की जांच जरूर करवा लें।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में हर साल 45 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है। इस बार टारगेट 50 हजार हेक्टेयर को कवर करने का रखा गया है। क्योंकि करनाल, पानीपत, सोनीपत, अंबाला व कुरुक्षेत्र की तरह यहां जमीन के पानी का स्तर इतना नीचे नहीं गया है। लाखनमाजरा, महम व सांपला में कुछ एरिया तो ऐसा है, जहां सेम की समस्या है। किसान नेता प्रीत सिंह ने बताया कि अगर समय पर रोपाई नहीं होगी तो किसानों को नुकसान होगा।
हेल्थ कार्ड बनाने के लिए चयनित गांव
ब्लॉक गांव
रोहतक कन्हेली, नसीरपुर, सराय अहमद, ताजा माजरा
महम शेखीपुर तीतरी, बेडवा, मुरादपुर टेकना, निंदाना व खेड़ी महम
लाखनमाजरा लाखनमाजरा, खरक जाटान, चांदी, सुंदरपुर व सिसरौली
कलानौर बलंब, भाली आनंदपुर, मसूदपुर, गुढ़ाण व सांगाहेड़ा
सांपला दतौड़, नौनंद, बलियाणा, गढ़ी सांपला व कारौर
ऐसे करें बिजाई
सभी प्रकार की भूमि में बासमती धान की सीधी बिजाई की जा सकती है, लेकिन मध्यम संरचना वाली भूमि ज्यादा उपयुक्त है। सबसे पहले अच्छे जमाव एंव पानी की बचत के लिए खेत का लेजर समतलीकरण करना चाहिए। इसे एक तरह से अति आवश्यक समझा जाए। इसके बाद सीधी बिजाई के लिए उल्टे टी-प्रकार के फाले एंव तिरछी प्लेट युक्त बीज बक्से वाली बीज एंव उर्वरक जीरो-टिल ड्रिल का प्रयोग करना चाहिए।
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बिजाई की दो विधियां : सबसे पहले बत्तर खेत (बिना कद्दू) में ड्रिल से बिजाई व देरी से प्रथम सिंचाई:- बत्तर खेत को दो-तीन जुताई लगाकर तैयार करें व सुहागा लगाएं। इसके तुरंत बाद ड्रिल से 3-5 सैं.मी. गहराई पर बिजाई करें। तदुपरांत तुरंत सुहागा लगाएं ताकि नमी न उडे़ और बीज व मिट्टी का पूरा संपर्क बना रहे। खेत की तैयारी एंव बिजाई सांयकाल करें ताकि नमी कम उडे़।
दूसरी विधि : खेत की 2-3 जुताई करके तैयार करें व सुहागा लगाएं। ड्रिल से 2-3 सैं.मी. गहराई पर बिजाई करें और बिजाई उपरांत सुहागा न लगाएं। बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई करें।
किस्म : सुगन्धित/ बासमती धान वर्ग की किस्में (तरावड़ी, बासमती, सीएसआर 30, पूसा बासमती 1, पूसा बासमती 1121)।
समय व बीज की मात्रा : बिजाई जून के दूसरे व तीसरे सप्ताह में करनी चाहिए। ध्यान रहे कि फसल का जमाव मानसून शुरू होने से पहले हो जाए। बीज की मात्रा एंव उपचार बीज की मात्रा 8.0. कि.ग्रा./ एकड़ उपयुक्त है। बीज का उपचार सिफारिश शुदा दवाओं के घोल (10 कि.ग्रा. बीज के लिए 10 ग्रा. बाविस्टिन या 10 ग्राम एमिसान +1 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन या 2.5 ग्राम पौसामाइसिन का 10 लीटर पानी में घोल) में 24 घंटे डुबोकर करें। इसके बाद बीज को 1-2 घंटे छाया में सुखाएं ताकि अतिरिक्त नमी उड़ जाए व बीज ड्रिल द्वारा बिजाई योग्य हो जाए। बिजाई के बाद एक निराई-गुडाई जरूर करें।
कब पानी लगाएं : सिंचाई बत्तर सीधी-बीजित धान में मौसम के अनुसार प्रथम सिंचाई बिजाई के 7-15 दिन बाद लगाएं। आगामी सिंचाई सप्ताह के अंतराल पर लगाएं। सूखी सीधी-बीजित धान में प्रथम सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद लगाएं। अगली सिंचाई 4-5 दिन बाद करें ताकि एकसार जमाव हो सके व पौध नष्ट न हो. आगामी सिचाई सप्ताह के अंतराल पर लगाएं। ध्यान रहे कि बालियां निकलने व दाना मरने की दो संवेदनशील अवस्थाओं पर नमी की कमी न रहे।
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विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में हर साल 45 हजार हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है। इस बार टारगेट 50 हजार हेक्टेयर को कवर करने का रखा गया है। क्योंकि करनाल, पानीपत, सोनीपत, अंबाला व कुरुक्षेत्र की तरह यहां जमीन के पानी का स्तर इतना नीचे नहीं गया है। लाखनमाजरा, महम व सांपला में कुछ एरिया तो ऐसा है, जहां सेम की समस्या है। किसान नेता प्रीत सिंह ने बताया कि अगर समय पर रोपाई नहीं होगी तो किसानों को नुकसान होगा।
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हेल्थ कार्ड बनाने के लिए चयनित गांव
ब्लॉक गांव
रोहतक कन्हेली, नसीरपुर, सराय अहमद, ताजा माजरा
महम शेखीपुर तीतरी, बेडवा, मुरादपुर टेकना, निंदाना व खेड़ी महम
लाखनमाजरा लाखनमाजरा, खरक जाटान, चांदी, सुंदरपुर व सिसरौली
कलानौर बलंब, भाली आनंदपुर, मसूदपुर, गुढ़ाण व सांगाहेड़ा
सांपला दतौड़, नौनंद, बलियाणा, गढ़ी सांपला व कारौर
ऐसे करें बिजाई
सभी प्रकार की भूमि में बासमती धान की सीधी बिजाई की जा सकती है, लेकिन मध्यम संरचना वाली भूमि ज्यादा उपयुक्त है। सबसे पहले अच्छे जमाव एंव पानी की बचत के लिए खेत का लेजर समतलीकरण करना चाहिए। इसे एक तरह से अति आवश्यक समझा जाए। इसके बाद सीधी बिजाई के लिए उल्टे टी-प्रकार के फाले एंव तिरछी प्लेट युक्त बीज बक्से वाली बीज एंव उर्वरक जीरो-टिल ड्रिल का प्रयोग करना चाहिए।
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बिजाई की दो विधियां : सबसे पहले बत्तर खेत (बिना कद्दू) में ड्रिल से बिजाई व देरी से प्रथम सिंचाई:- बत्तर खेत को दो-तीन जुताई लगाकर तैयार करें व सुहागा लगाएं। इसके तुरंत बाद ड्रिल से 3-5 सैं.मी. गहराई पर बिजाई करें। तदुपरांत तुरंत सुहागा लगाएं ताकि नमी न उडे़ और बीज व मिट्टी का पूरा संपर्क बना रहे। खेत की तैयारी एंव बिजाई सांयकाल करें ताकि नमी कम उडे़।
दूसरी विधि : खेत की 2-3 जुताई करके तैयार करें व सुहागा लगाएं। ड्रिल से 2-3 सैं.मी. गहराई पर बिजाई करें और बिजाई उपरांत सुहागा न लगाएं। बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई करें।
किस्म : सुगन्धित/ बासमती धान वर्ग की किस्में (तरावड़ी, बासमती, सीएसआर 30, पूसा बासमती 1, पूसा बासमती 1121)।
समय व बीज की मात्रा : बिजाई जून के दूसरे व तीसरे सप्ताह में करनी चाहिए। ध्यान रहे कि फसल का जमाव मानसून शुरू होने से पहले हो जाए। बीज की मात्रा एंव उपचार बीज की मात्रा 8.0. कि.ग्रा./ एकड़ उपयुक्त है। बीज का उपचार सिफारिश शुदा दवाओं के घोल (10 कि.ग्रा. बीज के लिए 10 ग्रा. बाविस्टिन या 10 ग्राम एमिसान +1 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन या 2.5 ग्राम पौसामाइसिन का 10 लीटर पानी में घोल) में 24 घंटे डुबोकर करें। इसके बाद बीज को 1-2 घंटे छाया में सुखाएं ताकि अतिरिक्त नमी उड़ जाए व बीज ड्रिल द्वारा बिजाई योग्य हो जाए। बिजाई के बाद एक निराई-गुडाई जरूर करें।
कब पानी लगाएं : सिंचाई बत्तर सीधी-बीजित धान में मौसम के अनुसार प्रथम सिंचाई बिजाई के 7-15 दिन बाद लगाएं। आगामी सिंचाई सप्ताह के अंतराल पर लगाएं। सूखी सीधी-बीजित धान में प्रथम सिंचाई बिजाई के तुरंत बाद लगाएं। अगली सिंचाई 4-5 दिन बाद करें ताकि एकसार जमाव हो सके व पौध नष्ट न हो. आगामी सिचाई सप्ताह के अंतराल पर लगाएं। ध्यान रहे कि बालियां निकलने व दाना मरने की दो संवेदनशील अवस्थाओं पर नमी की कमी न रहे।