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जिला परिषद : पंचायती राज विभाग के आयुक्त ने खारिज की पार्षदों की याचिका

Wed, 12 Feb 2025 02:49 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 12 Feb 2025 02:49 AM IST
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District Council: Commissioner of Panchayati Raj Department rejected the petition of councilors
रोहतक। पंचायती राज विभाग के आयुक्त एवं सचिव की चंडीगढ़ स्थित अदालत ने पार्षदों की ओर से दायर याचिका के खारिज कर दिया है। फैसले में कहा है कि जिप सीईओ की रिपोर्ट व दोनों पक्षों के बहस के आधार 26 जुलाई 2024 हुई जिप की बैठक की कार्रवाई रिपोर्ट रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता है।
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अदालत के फैसले पर चेयरपर्सन मंजू हुड्डा का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी, जबकि वाइस चेयरमैन अनिल हुड्डा से फैसले को लेकर संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया।
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जिला परिषद में 14 सदस्य हैं, जिनकी 26 जुलाई 2024 को बैठक हुई। बैठक में काफी हंगामा हुआ था। 23 अगस्त को जिप चेयरपर्सन मंजू हुड्डा ने पत्रकार वार्ता में बताया था कि 26 जुलाई को जिला परिषद की बैठक हुई, इसमें 14 पार्षदों ने भाग लिया। बैठक में कई पार्षदों ने निर्धारित एजेंडे की जगह असांविधानिक मांगों को रखा। साथ ही चेयरपर्सन व कार्यकारी अधिकारी पर दबाव बनाया गया। ऐसे में पंचायती राज अधिनियम 1995 के नियम 8 व 9 के तहत मांगों को असंवैधानिक मानते हुए खारिज किया जाता है। इतना ही नहीं, अनुशासनहीनता करने पर जिला परिषद के उपाध्यक्ष अनिल कुमार, वार्ड एक के पार्षद अमित रांगी, वार्ड आठ के पार्षद धीरज मलिक, वार्ड 14 के पार्षद सोनू व वार्ड 11 की पार्षद दीपिका को पिछली बैठक में गैरहाजिर किया जाता है। साथ ही अगली एक बैठक के लिए प्रतिबंधित किया जाता है। पार्षदों ने चेयरपर्सन के फैसले को पंचायती राज विभाग के आयुक्त एवं सचिव की चंडीगढ़ स्थित अदालत में चुनौती दी थी। साथ ही 26 जुलाई की बैठक की कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी। अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया है।
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सीईओ ने अदालत में कहा, बैठक में एजेंडे का किया गया असंवैधानिक तरीके से विरोध
अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि 15 अक्तूबर को जिला परिषद रोहतक की सीईओ शालिनी चेतन ने बताया कि 26 जुलाई की बैठक में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित जिला परिषद 14 सदस्य उपस्थित थे। जिला परिषद, रोहतक के उपाध्यक्ष अनिल कुमार ने अन्य सदस्यों के साथ मिलकर कुछ अवैधानिक मांगें उठाईं तथा बैठक के एजेंडे का असंवैधानिक तरीके से विरोध किया। जब जनहित के विरुद्ध मांगें स्वीकार नहीं की गईं तो उन्होंने अध्यक्ष पर पहले से तय एजेंडे के स्थान पर इन मांगों को स्वीकृत करने का अनुचित दबाव बनाया। यह हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1494 तथा हरियाणा पंचायती राज नियम, 1995 का सरासर उल्लंघन था।
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