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Rohtak News: खून में मौजूद नशे को चुटकियों में पहचान लेगी दीक्षा की तकनीक

Tue, 19 Aug 2025 01:42 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Tue, 19 Aug 2025 01:42 AM IST
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Diksha's technique will detect the intoxication present in the blood in a jiffy
विकास सैनी
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रोहतक। हरियाणा पुलिस की फाॅरेंसिक लैब में वरिष्ठ वैज्ञानिक ने हिमाचल के मंडी स्थित रीजनल फॉरेंसिक साइंस लैब के साथ मिलकर खून में नशीले पदार्थों की मौजूदगी की सटीक जांच तकनीक ईजाद की है। इसकी खूबी इसका सस्ता और कम वक्त में रिपोर्ट देना तो है ही, महंगे उपकरणों की आवश्यकता घटाना भी है। फॉरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी की दुनिया में इसे ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयूू) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजविंदर सिंह और रीजनल फॉरेंसिक साइंस लैब मंडी के डॉ. नीति प्रकाश दुबे के मार्गदर्शन में दीक्षा ठाकुर ने यह शोध किया है। फिलहाल वह फाॅरेंसिक लैब करनाल के नार्कोटिक्स, ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेज डिवीजन में सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर हैं।
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दीक्षा बताती हैं कि उन्होंने खून में मिले ड्रग्स की जांच के लिए सॉल्ट असिस्टेड लिक्विड–लिक्विड एक्सट्रैक्शन मेथडोलॉजी अपनाई। इसके नतीजे न सिर्फ शोध में शानदार रहे, बल्कि खून के वास्तविक नमूनों की जांच में भी अंतरराष्ट्रीय मानकों की रेंज में ही पाए गए।
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शोध के दौरान लंबी परीक्षण प्रक्रिया से गुजरते हुए उन्होंने विभिन्न रसायनों से दो इको-फ्रेंडली ऑर्गेनिक घोल निकाले। फिर अलग-अलग सांद्रता (कंसंट्रेशन) में खून के नमूनों में नशीले पदार्थों को परखा। इसकी रिकवरी दर 90 फीसदी के पार पहुंच गई।

बकौल दीक्षा, रिकवरी का अंतरराष्ट्रीय मानक 100 फीसदी (कम या ज्यादा 20) है। यही नतीजे उनके भी रहे हैं। यह तकनीक समय भी बहुत कम लेती है। इसके लिए बहुत महंगे उपकरणों की जरूरत भी नहीं है।
कोलेस्ट्रॉल, लिपिड, हार्मोन...इस जांच में बाधक नहीं
दीक्षा बताती हैं कि खून में मादक पदार्थों की जांच की मौजूदा पद्धतियां खर्चीली हैं। उनकी पद्धति सस्ती है। नतीजे सटीक देती है। कई ड्रग लेने वालों की भी जांच करने में सक्षम है। उनकी पद्धति से जांच में कोलेस्ट्रॉल, प्लाज्मा, लिपिड, हार्मोन जैसे अवयव कोई बाधा नहीं डाल पाते। यह बाधा वैज्ञानिक भाषा में मैट्रिक्स प्रभाव कहलाती है। यही नहीं, नशीले पदार्थ के कारण खून की बदली पीएच वैल्यू (जो किसी पदार्थ के क्षारीय या अम्लीय होने का पता देती है) भी इस तकनीक के आगे निष्प्रभावी है। यानी, कोकीन, अफीम, ब्राउन शुगर से लेकर कोई भी नशा किया गया हो, खून के नमूने से उसे सटीक तरीके से पकड़ा जा सकता है। जांच की मौजूदा पद्धतियों की सीमाएं सीमित हैं।

कब होगी सबके लिए हासिल
लैब और कुछ वास्तविक नमूनों की सटीक जांच रिपोर्ट से उत्साहित दीक्षा इसे जन-जन तक पहुंचाना चाहती हैं। वह कहती हैं, हरियाणा पुलिस की इकलौती फॉरेंसिक लैब में ट्रेनिंग के लिए आने वालों को इसे बताऊंगी ही, रिसर्च जर्नल के लिए भी पेपर लिखूंगी ताकि आपराधिक जांच में इसे वैश्विक स्वीकार्यता भी मिल सके।
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