{"_id":"65d785a4efa089128105f47c","slug":"dhumni-will-be-given-in-the-houses-of-roorkee-today-rohtak-news-c-17-roh1020-366284-2024-02-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: रुड़की के घराें में आज दी जाएगी धूमनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: रुड़की के घराें में आज दी जाएगी धूमनी
Thu, 22 Feb 2024 11:04 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 22 Feb 2024 11:04 PM IST
विज्ञापन
22सीटीके35...गांव रूडक़ी में सती दादी भदा की याद लगने वाले भंडारे में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद
रोहतक। रुड़की में 719 वर्ष पहले बसे हुड्डा गोत्र की बड़ी धार्मिक मान्यता सती दादी भदा की याद में 23 फरवरी मेले का आयोजन किया जाएगा। गांव के 4500 से ज्यादा घरों में गुगल धूप की धूमनी देकर वातावरण का शुद्धिकरण किया जाएगा। साथ ही प्रत्येक घर में पकवान व खीर बनाई जाएगी। गांव के चारों पानों की महिलाएं मंगल गीत गाकर दादी भदा मंदिर में पूजा अर्चना कर व स्वस्थ जीवन की कामना करेंगी।
जाट कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. जसमेर सिंह ने बताया कि जनश्रुति के अनुसार हुड्डा गोत्र के दादा की शादी राजस्थान के गांव काशीबघोड़ा में हुई थी। शादी के बाद जब वे अपनी पत्नी भदा को लेकर आ रहे थे, तो रास्ते में जंगल में कुछ लोगों ने उनका वध कर दिया। इस घटना के बाद दादी भदा अपने पति के साथ वहीं सती हो गई। पति के प्रति ऐसी श्रद्धा के चलते वह लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन गई। हुड्डा गोत्र के लोग दादी भदा को पूजने लगे। रुड़की में जब गांव बसा तब से एक छोटा मंदिर था। इसका पुर्ननिर्माण करते हुए खुदाई में पुराने समय के मूर्तिनुमा दो पत्थर मिले। इन पर देवी देवताओं की आकृति गुद्दी हुई हैं। इसे भगवान का रूप व वरदान मानकर दादी भदा की राजस्थान से बनवाकर लाई गई संगमरमर की प्रतिमा के दोनों ओर दोनों पत्थरों को स्थापित कराया गया है। भंडारे व मेले के लिए गांव के बुजुर्गों, युवाओं व ग्राम पंचायत की देखरेख में समितियां बनाई गई हैं। इसमें प्रधान राममेहर हुड्डा, सतीश हुड्डा, रामनिवास दरोगा, साहब सिंह, अमित, नंदराम, अमित हुड्डा, सुरेश, दिलावर, रामदिया शामिल हैं।
विज्ञापन
जाट कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. जसमेर सिंह ने बताया कि जनश्रुति के अनुसार हुड्डा गोत्र के दादा की शादी राजस्थान के गांव काशीबघोड़ा में हुई थी। शादी के बाद जब वे अपनी पत्नी भदा को लेकर आ रहे थे, तो रास्ते में जंगल में कुछ लोगों ने उनका वध कर दिया। इस घटना के बाद दादी भदा अपने पति के साथ वहीं सती हो गई। पति के प्रति ऐसी श्रद्धा के चलते वह लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन गई। हुड्डा गोत्र के लोग दादी भदा को पूजने लगे। रुड़की में जब गांव बसा तब से एक छोटा मंदिर था। इसका पुर्ननिर्माण करते हुए खुदाई में पुराने समय के मूर्तिनुमा दो पत्थर मिले। इन पर देवी देवताओं की आकृति गुद्दी हुई हैं। इसे भगवान का रूप व वरदान मानकर दादी भदा की राजस्थान से बनवाकर लाई गई संगमरमर की प्रतिमा के दोनों ओर दोनों पत्थरों को स्थापित कराया गया है। भंडारे व मेले के लिए गांव के बुजुर्गों, युवाओं व ग्राम पंचायत की देखरेख में समितियां बनाई गई हैं। इसमें प्रधान राममेहर हुड्डा, सतीश हुड्डा, रामनिवास दरोगा, साहब सिंह, अमित, नंदराम, अमित हुड्डा, सुरेश, दिलावर, रामदिया शामिल हैं।
विज्ञापन