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बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में विद्यार्थियों का पीजीआई से लघु सचिवालय तक प्रदर्शन
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एमबीबीएस के छात्र बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में पीजीआई से लघु सचिवालय तक विरोध मार्च निकालते हुए। अम?
बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में एमबीबीएस के विद्यार्थी वीरवार को सड़क पर उतरे। निदेशक कार्यालय के बाहर धरनास्थल से लघु सचिवालय तक प्रदर्शन किया। उन्हें लघु सचिवालय के प्रवेश द्वार पर रोक दिया गया। इसके चलते विद्यार्थियों ने नारेबाजी करते हुए अपनी आवाज को बुलंद किया। इसके बाद वहां पहुंचे डीआरओ चंद्रमोहन बिश्नोई को मुख्यमंत्री के नाम अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में विद्यार्थियों ने कहा कि बॉन्ड पॉलिसी से बैंक का हस्तक्षेप समाप्त किया जाए। यह समझौता केवल विद्यार्थियों व सरकार के बीच ही हो। बैंक इसमें किसी तरह शामिल न हो। जरूरी सेवा की समय सीमा तय हो। सरकार ने पॉलिसी में सात साल की जरूरी सेवा के तहत समय निर्धारित किया है। यह ज्यादा लंबा समय है। यह युवा चिकित्सकों के आगे बढ़ने की राह में अवरोधक है। वे अपने इस प्रगतिशील समय को व्यवसायिक भविष्य संवारने में लगाते हैं। इतना लंबा समय किसी भी प्रदेश की बॉन्ड सेवा में नहीं दिया गया है।
बॉन्ड सेवा की अवधि अधिकतम एक वर्ष होनी चाहिए। बॉन्ड डिफॉल्ट की करीब 40 लाख रुपये राशि बहुत अधिक है। एमबीबीएस स्नातक के मामले में भुगतान करने के लिए मध्यम वर्ग व गरीब परिवार सरकार को छोड़ना होगा। कुछ असाधारण परिस्थितियों के कारण सेवा नियंत्रण से परे हैं। यदि मुआवजा राशि तय करनी ही हो तो पांच लाख रुपये से अधिक न हो। एमबीबीएस स्नातकों को नौकरी सुनिश्चित की जाए। उनका वेतन एचसीएमएस के चिकित्सा अधिकारी के समकक्ष वेतन, भत्ते व अन्य लाभ दिए जाएं।
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उन्होंने कहा कि डिग्री और नौकरी की पेशकश के पूरा होने के बीच की अवधि अहम है। सरकार एमबीबीएस स्नातकों को अधिकतम दो माह में सरकारी नौकरी मुहैया कराएं। यदि नौकरी निर्धारित समय में नहीं दी जाती है तो बॉन्ड रद्द होना चाहिए। साथ ही पीजी पाठ्यक्रम के संबंध में भी स्पष्ट किया जाए। यह लिखित रूप में स्पष्ट नहीं किया गया है कि एमबीबीएस स्नातक यदि पीजी करता है तो क्या पीजी भविष्य के लिए उस पर बांड नीति लागू होगी? यदि एमबीबीएस स्नातक अन्य प्रदेश से पीजी कोर्स (एमडी/एमएस) करता है तो उस पर पॉलिसी लागू होगी।
एमबीबीएस विद्यार्थी व आरडीए के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री से की मुलाकात
पीजीआई के एमबीबीएस विद्यार्थी व रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से चंडीगढ़ में मुलाकात की। उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बॉन्ड एग्रीमेंट में से बैंक की दखलअंदाजी खत्म करने, एग्रीमेंट केवल एमबीबीएस विद्यार्थियों व सरकार के बीच में होने, सात वर्ष की कठोर सेवा अवधि को कम कर अधिकतम एक वर्ष करने, बॉन्ड राशि 40 लाख रुपये से घटाकर अधिकतम पांच लाख रुपये करने, डिग्री पूरी होने के बाद अधिकतम दो माह में सरकार नौकरी देने, पीजी कोर्स (एमडी/एमएस) के लिए बॉन्ड की स्थिति स्पष्ट करने की मांगें की। प्रतिनिधिमंडल में पीजीआईएमएस के सीनियर रेजिडेंट डॉ. अंकित गुलिया, एमबीबीएस छात्र पंकज बिट्ठू, सोनिका, संस्कारिका व गौरव शामिल रहे।
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मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में विद्यार्थियों ने कहा कि बॉन्ड पॉलिसी से बैंक का हस्तक्षेप समाप्त किया जाए। यह समझौता केवल विद्यार्थियों व सरकार के बीच ही हो। बैंक इसमें किसी तरह शामिल न हो। जरूरी सेवा की समय सीमा तय हो। सरकार ने पॉलिसी में सात साल की जरूरी सेवा के तहत समय निर्धारित किया है। यह ज्यादा लंबा समय है। यह युवा चिकित्सकों के आगे बढ़ने की राह में अवरोधक है। वे अपने इस प्रगतिशील समय को व्यवसायिक भविष्य संवारने में लगाते हैं। इतना लंबा समय किसी भी प्रदेश की बॉन्ड सेवा में नहीं दिया गया है।
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बॉन्ड सेवा की अवधि अधिकतम एक वर्ष होनी चाहिए। बॉन्ड डिफॉल्ट की करीब 40 लाख रुपये राशि बहुत अधिक है। एमबीबीएस स्नातक के मामले में भुगतान करने के लिए मध्यम वर्ग व गरीब परिवार सरकार को छोड़ना होगा। कुछ असाधारण परिस्थितियों के कारण सेवा नियंत्रण से परे हैं। यदि मुआवजा राशि तय करनी ही हो तो पांच लाख रुपये से अधिक न हो। एमबीबीएस स्नातकों को नौकरी सुनिश्चित की जाए। उनका वेतन एचसीएमएस के चिकित्सा अधिकारी के समकक्ष वेतन, भत्ते व अन्य लाभ दिए जाएं।
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उन्होंने कहा कि डिग्री और नौकरी की पेशकश के पूरा होने के बीच की अवधि अहम है। सरकार एमबीबीएस स्नातकों को अधिकतम दो माह में सरकारी नौकरी मुहैया कराएं। यदि नौकरी निर्धारित समय में नहीं दी जाती है तो बॉन्ड रद्द होना चाहिए। साथ ही पीजी पाठ्यक्रम के संबंध में भी स्पष्ट किया जाए। यह लिखित रूप में स्पष्ट नहीं किया गया है कि एमबीबीएस स्नातक यदि पीजी करता है तो क्या पीजी भविष्य के लिए उस पर बांड नीति लागू होगी? यदि एमबीबीएस स्नातक अन्य प्रदेश से पीजी कोर्स (एमडी/एमएस) करता है तो उस पर पॉलिसी लागू होगी।
एमबीबीएस विद्यार्थी व आरडीए के प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य मंत्री से की मुलाकात
पीजीआई के एमबीबीएस विद्यार्थी व रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के प्रतिनिधिमंडल ने वीरवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से चंडीगढ़ में मुलाकात की। उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बॉन्ड एग्रीमेंट में से बैंक की दखलअंदाजी खत्म करने, एग्रीमेंट केवल एमबीबीएस विद्यार्थियों व सरकार के बीच में होने, सात वर्ष की कठोर सेवा अवधि को कम कर अधिकतम एक वर्ष करने, बॉन्ड राशि 40 लाख रुपये से घटाकर अधिकतम पांच लाख रुपये करने, डिग्री पूरी होने के बाद अधिकतम दो माह में सरकार नौकरी देने, पीजी कोर्स (एमडी/एमएस) के लिए बॉन्ड की स्थिति स्पष्ट करने की मांगें की। प्रतिनिधिमंडल में पीजीआईएमएस के सीनियर रेजिडेंट डॉ. अंकित गुलिया, एमबीबीएस छात्र पंकज बिट्ठू, सोनिका, संस्कारिका व गौरव शामिल रहे।