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Rohtak News: डांडिया-गरबा खेलकर मां कूष्मांडा से लिया आशीर्वाद
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12सीटीके39...माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में नवरात्र महोत्सव डांडियां व गरबा करके नाचते ग
रोहतक। माता दरवाजा चौक स्थित संकट मोचन मंदिर में चैत्र नवरात्र में शुक्रवार को शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना की। भक्तों ने परिवार की खुशहाली और हरियाली की कामनाएं की। मां कूष्मांडा से आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों ने मंदिर परिसर में डांडिया और गरबा का आयोजन किया। कार्यक्रम में दुर्गा स्तुति पाठ, प्रवचन, भजन संध्या, पंडित अशोक शर्मा की ओर से आरती और प्रसाद वितरित हुआ। यह जानकारी सचिव गुलशन भाटिया ने दी।
साध्वी मानेश्वरी ने बताया कि गुजरात के इस लोक नृत्य का सीधा-सीधा कनेक्शन दुर्गा मां से है। उन्होंने बताया कि गरबा करते समय नृत्य करने वाले गोले में नृत्य करते हैं, जो जीवन के गोल चक्र का प्रतीक है।
मां कूष्मांडा के आशीर्वाद से संतान सुख की प्राप्ति संभव : साध्वी
उन्होंने बताया कि कूष्मांडा संस्कृत का शब्द है और इसका अर्थ कुम्हड़ा है। कहा जाता है कि मां कुष्मांडा को कुम्हड़े की बलि बहुत प्रिय है, इसलिए देवी दुर्गा का नाम कूष्मांडा पड़ा। उन्होंने कहा कि मां कूष्मांडा की पूजा करने से सुख-समृद्धि और उन्नतिदायक का लाभ प्राप्त होता है। मां कूष्मांडा के आशीर्वाद से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इनकी पूजा से व्यक्ति के समस्त कष्टों, दुखों और विपदाओं का नाश होता है। मां दुर्गा ने असुरों का संहार करने के लिए कूष्मांडा स्वरूप धारण किया था।
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साध्वी मानेश्वरी ने बताया कि गुजरात के इस लोक नृत्य का सीधा-सीधा कनेक्शन दुर्गा मां से है। उन्होंने बताया कि गरबा करते समय नृत्य करने वाले गोले में नृत्य करते हैं, जो जीवन के गोल चक्र का प्रतीक है।
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मां कूष्मांडा के आशीर्वाद से संतान सुख की प्राप्ति संभव : साध्वी
उन्होंने बताया कि कूष्मांडा संस्कृत का शब्द है और इसका अर्थ कुम्हड़ा है। कहा जाता है कि मां कुष्मांडा को कुम्हड़े की बलि बहुत प्रिय है, इसलिए देवी दुर्गा का नाम कूष्मांडा पड़ा। उन्होंने कहा कि मां कूष्मांडा की पूजा करने से सुख-समृद्धि और उन्नतिदायक का लाभ प्राप्त होता है। मां कूष्मांडा के आशीर्वाद से संतान सुख की प्राप्ति होती है। इनकी पूजा से व्यक्ति के समस्त कष्टों, दुखों और विपदाओं का नाश होता है। मां दुर्गा ने असुरों का संहार करने के लिए कूष्मांडा स्वरूप धारण किया था।
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