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ड्यूटी पर तैनात सिपाही की गोली लगने से मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 01 Nov 2015 02:23 AM IST
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सुनारिया जेल में ड्यूटी पर तैनात सिपाही की पेट में गोली लगने से संदिग्ध
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परिस्थितियों में मौत हो गई। सिपाही की शुक्रवार रात को गुंबद नंबर 1 पर
ड्यूटी थी। शिवाजी कॉलोनी थाना पुलिस ने मृतक के भाई के बयान पर इत्तफाकिया
कार्रवाई की है।
जेल अधीक्षक दयानंद मंडोला ने बताया कि हिसार जिले के मंडी आदमपुर निवासी 40 वर्षीय सिपाही जगदीश चंद्र की शुक्रवार शाम 6 से रात 10 बजे तक गुंबद नंबर एक पर ड्यूटी थी। प्रत्येक चार घंटे बाद ड्यूटी बदलती है। उनके साथ ही एक अन्य सिपाही भी कुछ ही दूरी पर तैनात था। ड्यूटी खत्म होने से कुछ ही देर पहले अचानक गोली चलने की आवाज आई। दूसरे कर्मचारी गुंबद पर पहुंचे तो जगदीश का शव नीचे पड़ा था। आनन फानन में जगदीश को अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
1 मई 2013 को दोबारा किया था ज्वाइंन
जेल अधीक्षक ने बताया कि जगदीश ने कई वर्ष पहले पुलिस महकमे में नौकरी ज्वाइन की थी। किन्हीं कारणों से उस भर्ती को कोर्ट ने रोक दिया था। इसके बाद 1 मई 2013 को फिर से जगदीश ने सुनारिया जेल में ज्वाइन किया।
सुहागों वाली रात को उजड़ गया सुहाग
जगदीश अपने परिवार के साथ जेल की लाइन में सरकारी क्वार्टर में रहता था। उनकी दो बेटी और एक बेटा है। तीनों बच्चे पढ़ाई करते हैं। सिपाही की मौत करवाचौथ की रात को हुई। पति की लंबी उम्र की कामना करने वाली रात को एक सुहागिन का सुहाग उजड़ गया। जगदीश एक दिन पहले ही अपने गांव से लौटा था।
परिजन बोले- कोई तनाव नहीं था
घटना को लेकर सुबह तक आत्महत्या के कयास लगाए गए। लेकिन जब मृतक के परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तो उन्होंने पुलिस को बयान दिये। परिजनों का कहना है कि जगदीश किसी भी तरह से परेशान नहीं था। परिवार में भी उसके सभी से मधुर संबंध थे। परिजनों ने बताया कि वह एक ही दिन पहले गांव से लौटा था।
जेल अधीक्षक दयानंद मंडोला ने बताया कि हिसार जिले के मंडी आदमपुर निवासी 40 वर्षीय सिपाही जगदीश चंद्र की शुक्रवार शाम 6 से रात 10 बजे तक गुंबद नंबर एक पर ड्यूटी थी। प्रत्येक चार घंटे बाद ड्यूटी बदलती है। उनके साथ ही एक अन्य सिपाही भी कुछ ही दूरी पर तैनात था। ड्यूटी खत्म होने से कुछ ही देर पहले अचानक गोली चलने की आवाज आई। दूसरे कर्मचारी गुंबद पर पहुंचे तो जगदीश का शव नीचे पड़ा था। आनन फानन में जगदीश को अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
1 मई 2013 को दोबारा किया था ज्वाइंन
जेल अधीक्षक ने बताया कि जगदीश ने कई वर्ष पहले पुलिस महकमे में नौकरी ज्वाइन की थी। किन्हीं कारणों से उस भर्ती को कोर्ट ने रोक दिया था। इसके बाद 1 मई 2013 को फिर से जगदीश ने सुनारिया जेल में ज्वाइन किया।
सुहागों वाली रात को उजड़ गया सुहाग
जगदीश अपने परिवार के साथ जेल की लाइन में सरकारी क्वार्टर में रहता था। उनकी दो बेटी और एक बेटा है। तीनों बच्चे पढ़ाई करते हैं। सिपाही की मौत करवाचौथ की रात को हुई। पति की लंबी उम्र की कामना करने वाली रात को एक सुहागिन का सुहाग उजड़ गया। जगदीश एक दिन पहले ही अपने गांव से लौटा था।
परिजन बोले- कोई तनाव नहीं था
घटना को लेकर सुबह तक आत्महत्या के कयास लगाए गए। लेकिन जब मृतक के परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तो उन्होंने पुलिस को बयान दिये। परिजनों का कहना है कि जगदीश किसी भी तरह से परेशान नहीं था। परिवार में भी उसके सभी से मधुर संबंध थे। परिजनों ने बताया कि वह एक ही दिन पहले गांव से लौटा था।