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पुलिस ने नहीं जुटाए सुबूत, आरोपी को मिली जमानत तो की दूसरी वारदात

Mon, 27 Jun 2016 01:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Mon, 27 Jun 2016 01:53 AM IST
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गुलाब रेस्टोरेंट में की थी फायरिंग - फोटो : file photo
गुलाब रेस्टोरेंट पर फायरिंग कर दो करोड़ की फिरौती मांगने वाले नाबालिग आरोपियों की उम्र के मामले में पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। यही नहीं, एक छात्र की हत्या के मामले में इसी आरोपी के खिलाफ जांच करने में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि छात्र की हत्या के केस में पुलिस आरोपी के खिलाफ ढंग से जांच करती तो वह जमानत पर न छूटता। यदि वह जमानत पर बाहर नहीं आता तो उसके हौसले बुलंद नहीं होते और जेल से बाहर आने के एक माह बाद ही वह गुलाब रेस्टोरेंट पर सरेआम गोली चलाकर दो करोड़ की रंगदारी मांगने की हिम्मत न कर पाता।
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गुलाब रेस्टोरेंट फायरिंग मामले में शीतल नगर के जिस आरोपी को सीआईए-2 ने नाबालिग बताया है, उसने अपने जन्मतिथि प्रमाण पत्र में हेरफेर कर रखी है। सीएमओ ऑफिस से आरटीआई के तहत मिली जानकारी में इसका खुलासा हुआ है। यह वही नाबालिग है जिस पर अक्तूबर-2015 में जनता कालोनी में 12वीं के छात्र कपिल कादियान की कैै ंची घोेंपकर कर हत्या करने आरोप लग चुका है। तब भी यह आरोपी नाबालिग बताया गया था। छात्र की हत्या के मामले में आरोपी की जमानत मिलने में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पुलिस ने जांच में जानबूझकर लापरवाही बरती, ताकि आरोपी को जमानत मिल सके। पुलिस हत्या के मामले में नाबालिग माने गए दो आरोपियोें के खिलाफ कोई सबूत नहीं जुटा सकी। इस करण कोर्ट में 90 दिनों में चालान पेश करने में नाकाम रही। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई। अब पीड़ित परिवार मामले की जांच के लिए पुलिस आला अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है। मृतक के परिवार ने जन्मतिथि में हुए खेल और पुलिस की मिलीभगत की जांच की मांग की है।
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इस तरह की गई जन्म प्रमाण पत्र में हेरफेर

दरअसल, छात्र कपिल कादियान की हत्या के दोनों आरोपियों को जमानत मिलने के बाद कपिल के दादा जीत सिंह ने सीएमओ ऑफिस में आरटीआई के तहत आरोपियों की जन्मतिथि की जानकारी मांगी। इसमें जो जानकारी मिली उससे मालूम चला कि आरोपियों ने अपने जन्म प्रमाण पत्र में खेल कर रखा है। तारीख बदलकर खुद को नाबालिग दिखाया है। जीत सिंह का कहना है कि शीतल नगर के कथित नाबालिग आरोपी की जन्मतिथि अदालत में 21 जून 1999 पेश की गई है, जबकि सीएमओ कार्यालय से आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार, उसके जन्म प्रमाण पत्र में जन्मतिथि 21 जून 1998 है। इसी तरह दूसरे नाबालिग आरोपी की जन्मतिथि 26 जनवरी 1998 दिखाई गई है, जबकि सीएमओ कार्यालय से जारी जन्म प्रमाण पत्र में उसकी तिथि 23 अप्रैल 1997 दर्ज है। वहीं, मामले में एएसपी हिमांशु गर्ग का कहना है कि कोर्ट में आरोपी पक्ष के वकील द्वारा पेश किये गए दस्तावेजों के आधार पर दोनों आरोपियों को जुवेनाइल मान लिया गया था। ऐसे में पुलिस कुछ नहीं कर सकती। इस संबंध में पीड़ित परिवार को उच्च कोर्ट में अपील करनी होगी।
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पांच लड़कों ने की थी 12वीं के छात्र की हत्या

जनता कालोनी निवासी जसमेर सिंह रेलवे विभाग में टीटीई के पद पर तैनात हैं। उनका इकलौता बेटा कपिल कादियान 12वीं कक्षा का छात्र था। अक्तूबर-2015 में कपिल घर से दुकान के लिए निकला था। जब वह दुकान के नजदीक पहुंचा तो करीब पांच लड़कों ने कैंची और चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद पुलिस ने बामडोली के दीपक उर्फ चिल्लर, खरावड़ के सुमित उर्फ संटी, धांधलान के तेजस सहित शीतल नगर और बोहर के दो नाबालिग को गिरफ्तार किया था। शीतल नगर के नाबालिग आरोपी ने जमानत मिलने के बाद गुलाब रेस्टोरेंट पर फायरिंग करके दो करोड़ की रंगदारी मांगी है। इस बार उसे सीआईए-2 ने पकड़ा लेकिन वह फिर नाबालिग बताकर बाल सुधार गृह चला गया।

आरोपियों के खिलाफ पुलिस नहीं जुटा पाई सुबूत

छात्र कपिल की हत्या के आरोप में तीनों बालिग जेल में हैं। जबकि शीतल नगर और बोहर के दोनों आरोपी जमानत पर बाहर आ गए। जब मामले में पीड़ित परिवार से बात की गई तो पता चला कि जांच अधिकारी सुरेंद्र दोनों के खिलाफ सबूत नहीं जुटा सके। इस कारण 90 दिनों में कोर्ट में दोनों का चालान पेश नहीं हो सका। इसी को ध्यान में रखते हुए आरोपी पक्ष ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा। फिर जुवेनाइल कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि दोनों के खिलाफ पुलिस तय समय सीमा में ऐसा कोई सुबूत पेश नहीं कर सकी है, जिसके आधार पर उनकी जमानत याचिका खारिज की जा सके। इसके बाद कोर्ट ने शीतल नगर के आरोपी को 18 मई 2016 और बोहर के आरोपी को 24 मई को जमानत दे दी।  


जमानत मिलने के ठीक एक माह बाद की वारदात

हत्या के केस में जिस आरोपी को पुलिस बार-बार नाबालिग बताकर बाल सुधार गृह भिजवा देती है उसके शातिर दिमाग का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जमानत पर बाहर आने के ठीक एक माह बाद उसने अगली वारदात कर दी। शीतल नगर निवासी आरोपी 18 मई 2016 को जमानत पर छूटा और 19 जून 2016 को गुलाब रेस्टोरेंट में फायरिंग कर रंगदारी मांग ली।

तब बनाई गई थी जनता कालोनी पुलिस चौकी

जनता कालोनी में दिनदहाड़े हुई छात्र कपिल की हत्या के बाद पुलिस के होश उड़ गये थे। इसके कु छ दिन बाद ही दूसरे छात्र की भी चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने क्षेत्र में जनता कालोनी पुलिस चौकी बना दी थी।

आखिर क्यों चालान पेश नहीं कर सकी पुलिस  

मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। कपिल के परिवार का कहना है कि जब पुलिस तीनों बालिग आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में तय समय सीमा के अंदर चालान पेश कर सकती है तो दोनों नाबालिग के खिलाफ चालान पेश क्यों नहीं कर सकी? कपिल के परिजन पुलिस की मंशा पर ही सवाल उठाते हैं। आरोप तो यह भी लगाया जा रहा है कि सुबूत नहीं जुटाने के पीछे पैसे का लेनदेन है। जमानत के इस खेल में 3 लाख रुपये के सौदे की बात सामने आ रही है। वहीं, पुलिस ने जमानत पर बाहर आए दूसरे आरोपी की गतिविधियों के बारे में अभी तक कोई सुध नहीं ली है।

मौत के बाद भी पिता का सपना पूरा कर गया कपिल

पांच आरोपियों ने मामूली कहासुनी में जसमेर सिंह के परिवार का इकलौता चिराग बुझा दिया था। लेकिन कपिल दुनिया से जाने के बाद भी पिता और दादा का सपना पूरा कर गया। दादा जीत सिंह ने बताया कि कपिल ने 12वीं की परीक्षा के बाद एनडीए का पेपर दिया था। उसकी मौत के बाद परीक्षा का परिणाम आया तो वह उसमें उत्तीर्ण हो गया। कपिल की याद में फूट-फूट कर रोने वाले उसके दादा का कहना है कि जब हमारे घर का चिराग बुझ गया तो वह आरोपियों को सजा दिलवाकर ही रहेंगे।

कोर्ट क्लर्क की गलती से हुई चूक : एएसपी

इस संबंध में जब मामले की जांच कर रहे एएसपी हिमांशु गर्ग से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कोर्ट क्लर्क की गलती की वजह से चालान पेश होने में देरी हुई थी। बताया कि पुलिस ने हत्या के सभी आरोपियों को बालिग मानकर कोर्ट में चालान पेश किया था। लेकिन कोर्ट में दोनों आरोपियों के नाबालिग होने के सबूत पेश किये जा चुके थे। इसके बाद कोर्ट ने मामले में कोर्ट क्लर्क को संबंधित जांच अधिकारी को नोटिस जारी कर दोनोें जुवेनाइल में चालान पेश करने के आदेश दिये थे। मगर कोर्ट क्लर्क ने जांच अधिकारी के पास नोटिस नहीं भेजा। इस कारण सुनवाई के दौरान चालान पेश नहीं हो सका। इसी वजह से दोनों को जमानत मिल गई। पुलिस का मानना है कि कोर्ट क्लर्क की वजह से पुलिस की किरकिरी हुई। एएसपी हिमांशु गर्ग ने कहा कि वह कोर्ट क्लर्क के खिलाफ अदालत में शिकायत करेंगे।



पीड़ित परिवार की ओर से मामले की शिकायत की गई थी। उसके बाद इस केस की जांच एएसपी हिमांशु गर्ग को सौंपी गई। मामले में जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- शशांक आनंद एसपी रोहतक


कोई भी आरोपी जिस दिन क्राइम करता है कानून के हिसाब से उसी दिन से उसकी उम्र तय की जाती है, ताकि उसके नाबालिग होने का पता चल सके।
- दीपक कुंडू वरिष्ठ वकील एवं जिला बार प्रधान
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