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स्कूलों में एक भी कंप्यूटर टीचर नहीं, कैसे बनेंगे डिजिटल साक्षर

Sun, 12 Feb 2017 12:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sun, 12 Feb 2017 12:58 AM IST
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पीएम नरेंद्र मोदी हर रोज डिजिटलाइजेशन की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन प्रदेश में सरकारी स्कूलों में एक भी कंप्यूटर टीचर नहीं है। यह डिजिटलाइजेशन के साथ सबसे बड़ा मजाक है। यह बात हिसार के सांसद दुष्यंत चौटाला ने कही। वे शनिवार को एमडीयू में ‘बेरोजगार युवा : कारण एवं निवारण’ विषय पर युवा अधिवक्ताओं की हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्यवक्ता बोल रहे थे। होटल एंड मैनेजमेंट विभाग के कांफ्रेंस हाल में हुई संगोष्ठी में दुष्यंत मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और ब्यूरोक्रेसी पर खुलकर बोले।
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 उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ दशक में शिक्षा का जो निजीकरण हुआ है, उससे ही बेरोजगारी ज्यादा बढ़ी है। आज युवा डॉक्टर हो या इंजीनियर, पीएचडी धारक व एमबीए, उसकी डिग्री की कोई मान्यता नहीं रह गई है। चौटाला ने देश में बढ़ती बेरोजगारी का सबसे बड़ा रोड़ा ब्यूरोक्रेसी को बताया। उन्होंने कहा कि देश में पांच या दस साल में जिस तरह से एमपी या एमएलए और जज के कार्यों का रिव्यू होता है, उस तरह से ब्यूरोक्रेट्स का हमारे देश में कोई रिव्यू सिस्टम ही नहीं है। केंद्र सरकार हर 10 साल में एक कमेटी बनाकर ब्यूरोक्रेट्स के कामों का रिव्यू करवाए। मैंने सवा दशक में पहली बार सरकारी स्कूलों में गेस्ट टीचर देखा। जब शिक्षक ही अतिथि बन गए हैं और उन्हें अपने रोजगार की कोई गारंटी नहीं है तो वे कैसे बच्चों को अच्छे मन से पढ़ाएंगे।
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 इससे पहले, बार एसोसिएशन के प्रधान दीपक कुंडू, कार्यक्रम संयोजक डॉ. वीरेंद्र सिंधु, संगोष्ठी के संयोजक परमजीत तहलान और प्रदीप देशवाल ने सांसद का स्वागत किया। कार्यक्रम में बलवान सुहाग, जितेंद्र हुडा, रविंद्र ढुल, कृष्ण कौशिक, अनिल घनघस, रामवीर बडाला, डॉ. कुलदीप नारा, उपेंद्र कादियान, प्रदीप बरमान, रविंद्र बांगड़, सीता रानी, राजेश सैनी, डॉ. जोगिंद्र मोर, सचिन सांगवान, रवि रेढू, संजय कुंडू, सुखवंत सिंह, सुमित फौगाट, नवीन अहलावत, अनिरुद्ध, कृष्ण अहलावत, वैभव दहिया, यशवीर, दीक्षांत कटारिया और दीपिका आदि वकील मौजूद रहे।
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काले-सफेद कोट वाले सबसे ज्यादा रहते हैं परेशान
सांसद दुष्यंत ने कहा कि काले और सफेद कोट पहनने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से लोगों की जान बचाने का काम करते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी इन्हीं को रहती है। अगर किसी भी अवस्था में कोई व्यक्ति आपके पास सहायता लेने आए और वह आर्थिक रूप से कमजोर हो, तो उसकी मदद जरूर करें।

युवा अधिवक्ताओें ने ये दिए सुझाव
- आज सीए ने वकीलों की नौकरी छीन ली है। इसलिए क्रिमिनल और सिविल लॉ छोड़कर टैक्सटेशन लॉ के बारे में पढ़ें।
- प्रदेश के सभी गांवों में लाइब्रेरी खोली जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिले।
- एमडीयू के सभी शैक्षणिक विभागों में प्लेसमेंट सेल खोले जाएं और युवाओं को जागरूक किया जाए।
- कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में आधुनिक इंस्टीट्यूट खोले जाएं और उन्हें आधुनिक खेती के बारे में बताया जाए।
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