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जेबीटी घोटाले में शामिल फर्जी अध्यापकों की लिस्ट तैयार, एसपी को सौंपे 33 नाम
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 18 Sep 2015 02:13 AM IST
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साल 2011 में जेबीटी टीचर घोटाले में शामिल जिले के शिक्षकों की फेहरिस्त तैयार कर ली गई है।
इस सूची में 33 नाम शामिल किए गए हैं।
शिक्षा विभाग की ओर से सूची को एसपी कार्यालय में सौंपा गया है ताकि फर्जी अध्यापकों पर केस दर्ज किया जा सके।
एसपी से ओर से सिविल लाइन थाना प्रभारी को यह सूची मार्क की गई है।
थाना प्रभारी नवीन कुमार का कहना है कि लिस्ट में नामों को लेकर कुछ तकनीकी खामी हैं।
इन खामियों को दूर करने के बाद ही केस दर्ज किया जाएगा। वहीं, बृहस्पतिवार सुबह लिस्ट में एक ही नाम की दो शिक्षिकाओं के होने से विवाद हो गया।
लिस्ट में बेटी का नाम शामिल होने को लेकर लघु सचिवालय में महम एसएचओ राजेंद्र सिंह ने हंगामा कर दिया। थानेदार और शिक्षा विभाग के क्लर्क के बीच तीखी नोकझाेंक भी हुई।
विवाद बढ़ने पर दोनों पक्ष एसपी ऑफिस पहुंचे और गलतफहमी दूर होने के बाद मामला सुलझ गया।
दरअसल 2011 में जेबीटी टीचरों की भर्ती हुई थी। भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने भिवानी शिक्षा बोर्ड को सभी प्रतिभागियों के अंगुठों के निशान के जांच करने के निर्देश दिए। बोर्ड की तरफ से मधुबन प्रयोगशाला में प्रतिभागियों के अंगुठों के निशान की जांच की गई। जांच में जिले के 33 अध्यापकों का फर्जीवाड़ा सामने आया। शिक्षा विभाग ने सभी फर्जी प्रतिभागियों की सूची तैयार कर एसपी ऑफिस भेज दी है। सूची के साथ हाईकोर्ट के आदेश और बोर्ड क ी जांच पड़ताल के कागजात भी शामिल किए गए हैं।
थानेदार ने किया हंगामा
फर्जी अध्यापकों की सूची में सुदेश नाम की दो महिला शिक्षकों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। सुदेश पुत्री राजबीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश थे। जब पुलिस ने सुदेश की पोस्टिंग के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि वह खरैंटी स्कूल में टीचर है। इसी स्कूल में जेबीटी टीचर के तौर पर सुदेश पुत्री राजेंद्र सिंह भी कार्यरत थीं। राजेंद्र सिंह जिले के एक थाने में एसएचओ हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि सुदेश पुत्री राजबीर का चांदी गांव के जीजीपीएस स्कूल में तबादला हो चुका है। जबकि सुदेश पुत्री राजेंद्र सिंह भराण जीएसएसएस स्कूल में लेक्चरर हैं।
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यहां हुई गलतफहमी
जब पुलिस ने सुदेश के खिलाफ केस दर्ज करने की तैयारी की तो राजेंद्र सिंह की बेटी ने सोचा कि मेरा नाम इस सूची में डाला गया है। इस पर उन्होंने अपने थानेदार पिता को मामले की जानकारी दी। राजेंद्र सिंह और शिक्षा विभाग में क्लर्क कुमारी हर्ष के बीच लघु सचिवालय में जमकर नोकझोंक हुई। करीब आधा घंटे तक बहस होने के बाद मामला एसपी ऑफिस पहुंचा। फिर दोनों ने अपना स्पष्टीकरण दिया।
वर्जन-
हमारी तरफ से एसपी ऑफिस को सौंपी गई फर्जी प्रतिभागियों की लिस्ट में सुदेश पुत्री राजबीर सिंह का नाम शामिल है। सुदेश पुत्री राजेंद्र सिंह का उसमें कोई भी जिक्र नहीं है। एचटैट के रोल नंबर के हिसाब से भी मामला सुलझ सकता था।
कुमारी हर्ष क्लर्क शिक्षा विभाग।
क्लर्क ने लिस्ट में मेरी बेटी का नाम शामिल कर दिया था। जबकि मेरी बेटी किसी भी फर्जीवाड़े में शामिल नहीं थी।
- राजेंद्र सिंह, एसएचओ
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इस सूची में 33 नाम शामिल किए गए हैं।
शिक्षा विभाग की ओर से सूची को एसपी कार्यालय में सौंपा गया है ताकि फर्जी अध्यापकों पर केस दर्ज किया जा सके।
एसपी से ओर से सिविल लाइन थाना प्रभारी को यह सूची मार्क की गई है।
थाना प्रभारी नवीन कुमार का कहना है कि लिस्ट में नामों को लेकर कुछ तकनीकी खामी हैं।
इन खामियों को दूर करने के बाद ही केस दर्ज किया जाएगा। वहीं, बृहस्पतिवार सुबह लिस्ट में एक ही नाम की दो शिक्षिकाओं के होने से विवाद हो गया।
लिस्ट में बेटी का नाम शामिल होने को लेकर लघु सचिवालय में महम एसएचओ राजेंद्र सिंह ने हंगामा कर दिया। थानेदार और शिक्षा विभाग के क्लर्क के बीच तीखी नोकझाेंक भी हुई।
विवाद बढ़ने पर दोनों पक्ष एसपी ऑफिस पहुंचे और गलतफहमी दूर होने के बाद मामला सुलझ गया।
दरअसल 2011 में जेबीटी टीचरों की भर्ती हुई थी। भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने भिवानी शिक्षा बोर्ड को सभी प्रतिभागियों के अंगुठों के निशान के जांच करने के निर्देश दिए। बोर्ड की तरफ से मधुबन प्रयोगशाला में प्रतिभागियों के अंगुठों के निशान की जांच की गई। जांच में जिले के 33 अध्यापकों का फर्जीवाड़ा सामने आया। शिक्षा विभाग ने सभी फर्जी प्रतिभागियों की सूची तैयार कर एसपी ऑफिस भेज दी है। सूची के साथ हाईकोर्ट के आदेश और बोर्ड क ी जांच पड़ताल के कागजात भी शामिल किए गए हैं।
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थानेदार ने किया हंगामा
फर्जी अध्यापकों की सूची में सुदेश नाम की दो महिला शिक्षकों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। सुदेश पुत्री राजबीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश थे। जब पुलिस ने सुदेश की पोस्टिंग के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि वह खरैंटी स्कूल में टीचर है। इसी स्कूल में जेबीटी टीचर के तौर पर सुदेश पुत्री राजेंद्र सिंह भी कार्यरत थीं। राजेंद्र सिंह जिले के एक थाने में एसएचओ हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि सुदेश पुत्री राजबीर का चांदी गांव के जीजीपीएस स्कूल में तबादला हो चुका है। जबकि सुदेश पुत्री राजेंद्र सिंह भराण जीएसएसएस स्कूल में लेक्चरर हैं।
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यहां हुई गलतफहमी
जब पुलिस ने सुदेश के खिलाफ केस दर्ज करने की तैयारी की तो राजेंद्र सिंह की बेटी ने सोचा कि मेरा नाम इस सूची में डाला गया है। इस पर उन्होंने अपने थानेदार पिता को मामले की जानकारी दी। राजेंद्र सिंह और शिक्षा विभाग में क्लर्क कुमारी हर्ष के बीच लघु सचिवालय में जमकर नोकझोंक हुई। करीब आधा घंटे तक बहस होने के बाद मामला एसपी ऑफिस पहुंचा। फिर दोनों ने अपना स्पष्टीकरण दिया।
वर्जन-
हमारी तरफ से एसपी ऑफिस को सौंपी गई फर्जी प्रतिभागियों की लिस्ट में सुदेश पुत्री राजबीर सिंह का नाम शामिल है। सुदेश पुत्री राजेंद्र सिंह का उसमें कोई भी जिक्र नहीं है। एचटैट के रोल नंबर के हिसाब से भी मामला सुलझ सकता था।
कुमारी हर्ष क्लर्क शिक्षा विभाग।
क्लर्क ने लिस्ट में मेरी बेटी का नाम शामिल कर दिया था। जबकि मेरी बेटी किसी भी फर्जीवाड़े में शामिल नहीं थी।
- राजेंद्र सिंह, एसएचओ