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मैली उठाई नहीं, 31 लाख की कर दी पेमेंट
आदेश चौधरी/ अमर उजाला
Updated Tue, 19 Jul 2016 02:58 AM IST
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ठेकेदार पर मेहरबान हुए हुडा के अधिकारी, सारे नियम कायदे रखे ताक पर
- फोटो : amar ujala
सुनारियां चौक स्थित पुरानी शुगर मिल की मैली उठाने में घोटाले की बू आ रही है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की ओर से मैली उठाने के लिए ठेकेदार को 31 लाख रुपये की पेमेंट कर दी गई, जबकि ठेकेदार ने मैली को उठाया ही नहीं है। मैली का टीला पहले की तरह अपनी जगह खड़ा है। जो थोड़ी बहुत मैली उठाई गई है वह भी साथ लगती हुडा की जमीन पर डाल दी गई है, जबकि सरकारी जमीन पर इसे नहीं डाला जा सकता है। टेंडर की शर्तों के अनुसार मैली शहर से 5 किलोमीटर दूर कहीं डाला जाना चाहिए थी। इस नियम का भी पालन नहीं किया गया है। हुडा के एक्सईएन कहते हैं कि उन्होंने साइट को देखा नहीं है। जबकि पेमेंट उन्होंने की है।
बता दें कि शहरवासियों को बेहतर सुविधा देने के लिए पुरानी शुगर मिल की जगह हुडा का सेक्टर 21 विकसित करने की योजना बनाई गई। इसके लिए पुरानी शुगर मिल को सुनारियां चौक के पास से भाली में शिफ्ट कर दिया गया। पुरानी शुगर मिल में गन्ने की पेराई के बाद जो मैली जमा हुई थी उसे उठाने का टेंडर एक ठेकेदार को दिया गया। ठेकेदार ने मैली उठाने के लिए पेमेंट तो ले ली, लेकिन मैली को उठाया ही नहीं है।
मैली से भर दिया वाटर टैंक
जिस ठेकेदार को मैली उठाने का टेंडर दिया गया था, उसने दिखावे के लिए मैली को उठाकर पास में ही एक वाटर टैंक और हुडा के प्लाटों बिखेर दिया। यह वाटर टैंक शुगर मिल का हुआ करता था। जबकि टेंडर के नियम एवं शर्तों के अनुसार मैली शहर की सीमा से 5 किलोमीटर दूर डाली जानी चाहिए थी। जो मैली उठाई गई है, वह भी टेंडर के हिसाब से नाममात्र है।
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पहले बेची, फिर दिए उठाने के रुपये
मामले में चौंकाने वाली बात यह भी है कि हुडा ने पहले मैली को पौने 18 लाख रुपये में एक ठेकेदार को बेचा था। बाद में दूसरे ठेकेदार को उसी मैली को उठाने के लिए 31 लाख में टेंडर दिया। हुडा ने वर्ष 2013 में मैली की बोली लगाई थी। बोली में मैली 17 लाख 75 हजार रुपये में एक ठेकेदार ने खरीदी। निश्चित समय में ठेकेदार ने विभाग के पास सिक्योरिटी जमा नहीं कराई। इस कारण टेंडर को रद्द कर दिया गया। नए सिरे से टेंडर जारी किए गए तो मामला उल्टा हो गया। विभाग ने इस बार मैली उठाने के लिए ठेकेदार को 31 लाख रुपये में टेंडर दिया।
पक्षियों ने बनाए घोंसले
ठेकेदार का कहना है कि मैली को उठाया जा रहा है, लेकिन मैली के टीले की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां करती है। मैली के टीले में पक्षियों ने हजारों की संख्या में घोंसले बना रखे हैं। जो इस बात के सबूत हैं कि वहां से मैली का उठान नहीं किया जा रहा है क्योंकि यदि वहां काम चल रहा होता तो पक्षी घोंसले नहीं बनाते। अमर उजाला की टीम ने जब मौके का मुआयना किया तो मैली उठाने के संबंध में कोई काम नहीं हो रहा था।
पूरी प्रक्रिया पर सवाल
मैली उठाने के मामले में हुडा के अधिकारियों की पूरी प्रक्रि या संदिग्ध है। जब पहले टेंडर जारी कर मैली को पौने 18 लाख में बेच दिया गया था तो बाद में इसे उठाने के लिए 31 लाख की राशि देने की नौबत क्यों आई? मामले की विजिलेंस जांच कराई जाए तो हुडा के कई अधिकारी नप सकते हैं।
एक्सईएन राजकुमार से सीधी बात
सवाल : पुरानी शुगर मिल की मैली को उठाए बिना ठेकेदार को पेमेंट क्यों की गई?
एक्सईएन : मैली उठाए जाने के बाद ही ठेकेदार को पेमेंट की गई है।
सवाल : ठेकेदार ने मैली को कहां डाला?
एक्सईएन : यह हमारा काम नहीं है, वह जहां मर्जी डाले।
सवाल : जब विभाग पेमेंट कर रहा है तो जांच का जिम्मा किसका है?
एक्सईएन : विभाग को मैली उठवानी थी, वह कहां डाली गई इसकी जिम्मेवारी हमारी नहीं है।
सवाल : मैली को हुडा की जमीन पर ही डाला गया है?
एक्सईएन : वह पहले वाले ठेकेदार ने डाली होगी, उस वक्त मेरे पास चार्ज नहीं था।
सवाल : आपने बगैर जांच किए पेमेंट कैसे कर दी?
एक्सईएन : आपसे पहले भी कहा है कि विभाग की जिम्मेवारी केवल मैली उठवाना था, वह कहां डाली गई, इससे विभाग को लेना-देना नहीं है।
एसडीओ को करनी होती है जांच : एसई
किसी भी कार्य की पेमेंट करने से पहले एक्सईएन को जांच करनी होती है कि काम पूरा और दुरुस्त हुआ है या नहीं। अगर एसडीओ इस बात से मना कर रहे हैं तो वे गलत हैं। किसी भी कार्य के लिए की गई पेमेंट के जिम्मेवार एक्सईएन होते हैं। मामले की जांच कराई जाएगी। अगर घोटाला किया गया है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- एलके आहुजा, एसई, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण
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बता दें कि शहरवासियों को बेहतर सुविधा देने के लिए पुरानी शुगर मिल की जगह हुडा का सेक्टर 21 विकसित करने की योजना बनाई गई। इसके लिए पुरानी शुगर मिल को सुनारियां चौक के पास से भाली में शिफ्ट कर दिया गया। पुरानी शुगर मिल में गन्ने की पेराई के बाद जो मैली जमा हुई थी उसे उठाने का टेंडर एक ठेकेदार को दिया गया। ठेकेदार ने मैली उठाने के लिए पेमेंट तो ले ली, लेकिन मैली को उठाया ही नहीं है।
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मैली से भर दिया वाटर टैंक
जिस ठेकेदार को मैली उठाने का टेंडर दिया गया था, उसने दिखावे के लिए मैली को उठाकर पास में ही एक वाटर टैंक और हुडा के प्लाटों बिखेर दिया। यह वाटर टैंक शुगर मिल का हुआ करता था। जबकि टेंडर के नियम एवं शर्तों के अनुसार मैली शहर की सीमा से 5 किलोमीटर दूर डाली जानी चाहिए थी। जो मैली उठाई गई है, वह भी टेंडर के हिसाब से नाममात्र है।
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पहले बेची, फिर दिए उठाने के रुपये
मामले में चौंकाने वाली बात यह भी है कि हुडा ने पहले मैली को पौने 18 लाख रुपये में एक ठेकेदार को बेचा था। बाद में दूसरे ठेकेदार को उसी मैली को उठाने के लिए 31 लाख में टेंडर दिया। हुडा ने वर्ष 2013 में मैली की बोली लगाई थी। बोली में मैली 17 लाख 75 हजार रुपये में एक ठेकेदार ने खरीदी। निश्चित समय में ठेकेदार ने विभाग के पास सिक्योरिटी जमा नहीं कराई। इस कारण टेंडर को रद्द कर दिया गया। नए सिरे से टेंडर जारी किए गए तो मामला उल्टा हो गया। विभाग ने इस बार मैली उठाने के लिए ठेकेदार को 31 लाख रुपये में टेंडर दिया।
पक्षियों ने बनाए घोंसले
ठेकेदार का कहना है कि मैली को उठाया जा रहा है, लेकिन मैली के टीले की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां करती है। मैली के टीले में पक्षियों ने हजारों की संख्या में घोंसले बना रखे हैं। जो इस बात के सबूत हैं कि वहां से मैली का उठान नहीं किया जा रहा है क्योंकि यदि वहां काम चल रहा होता तो पक्षी घोंसले नहीं बनाते। अमर उजाला की टीम ने जब मौके का मुआयना किया तो मैली उठाने के संबंध में कोई काम नहीं हो रहा था।
पूरी प्रक्रिया पर सवाल
मैली उठाने के मामले में हुडा के अधिकारियों की पूरी प्रक्रि या संदिग्ध है। जब पहले टेंडर जारी कर मैली को पौने 18 लाख में बेच दिया गया था तो बाद में इसे उठाने के लिए 31 लाख की राशि देने की नौबत क्यों आई? मामले की विजिलेंस जांच कराई जाए तो हुडा के कई अधिकारी नप सकते हैं।
एक्सईएन राजकुमार से सीधी बात
सवाल : पुरानी शुगर मिल की मैली को उठाए बिना ठेकेदार को पेमेंट क्यों की गई?
एक्सईएन : मैली उठाए जाने के बाद ही ठेकेदार को पेमेंट की गई है।
सवाल : ठेकेदार ने मैली को कहां डाला?
एक्सईएन : यह हमारा काम नहीं है, वह जहां मर्जी डाले।
सवाल : जब विभाग पेमेंट कर रहा है तो जांच का जिम्मा किसका है?
एक्सईएन : विभाग को मैली उठवानी थी, वह कहां डाली गई इसकी जिम्मेवारी हमारी नहीं है।
सवाल : मैली को हुडा की जमीन पर ही डाला गया है?
एक्सईएन : वह पहले वाले ठेकेदार ने डाली होगी, उस वक्त मेरे पास चार्ज नहीं था।
सवाल : आपने बगैर जांच किए पेमेंट कैसे कर दी?
एक्सईएन : आपसे पहले भी कहा है कि विभाग की जिम्मेवारी केवल मैली उठवाना था, वह कहां डाली गई, इससे विभाग को लेना-देना नहीं है।
एसडीओ को करनी होती है जांच : एसई
किसी भी कार्य की पेमेंट करने से पहले एक्सईएन को जांच करनी होती है कि काम पूरा और दुरुस्त हुआ है या नहीं। अगर एसडीओ इस बात से मना कर रहे हैं तो वे गलत हैं। किसी भी कार्य के लिए की गई पेमेंट के जिम्मेवार एक्सईएन होते हैं। मामले की जांच कराई जाएगी। अगर घोटाला किया गया है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- एलके आहुजा, एसई, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण