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आग से ढाई फीसदी झुलसी बहू पर ससुरालियों को फंसाने का आरोप
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 14 Oct 2016 01:09 AM IST
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- फोटो : demo pic
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एक बहु ने अपनी सास, ननद और जेठ के खिलाफ जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी। इस मामले में उसके पति ने भी उसका साथ दिया, लेकिन मेडिकल जांच में सामने आया कि बहू को मात्र ढाई फीसदी बर्न इंजरी है और यह मामला परिवार में आपसी झगड़े का है। अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर ध्यान देते हुए सास, ननद व जेठ को पुलिस जांच में सहयोग का निर्देश देने के साथ ही उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी। मामला रोहतक निवासी ओमपति के परिवार से जुड़ा है।
ओमपति और अन्य की ओर से एडवोकेट कुलविंदर सिंह लखनपाल के मार्फत दायर की गई जमानत याचिका में कहा गया है कि उनकी बहू मुन्नी ने पति के समर्थन से अपनी सास, ननद और बहनोई के खिलाफ रोहतक सिटी थाने में 8 फरवरी, 2016 को आईपीसी की धारा 323, 506, 34 के तहत एफआईआर दर्ज कराई। इसमें पुलिस ने बाद में आईपीसी की धारा 326 का सेक्शन 13 भी जोड़ दिया। इस प्रकार एफआईआर में आरोपियों पर गैर जमानती धाराएं लगा दी गईं। याचिका में एफआईआर को झूठा और ओछी हरकत करार देते हुए कहा गया है कि यह एफआईआर याची द्वारा मुन्नी के खिलाफ दायर कराए गए दिवानी और फौजदारी मुकदमे के जवाब में दर्ज कराई गई है। याची ने अपनी जान को खतरा बताते हुए मुन्नी और उसके पति के खिलाफ मुकदमा दायर किया हुआ है। याची का यह भी आरोप है कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में देरी की और बाद में गैर जमानती धाराएं भी जोड़ दीं। एडवोकेट कुलविंदर एस. लखनपाल ने अदालत को बताया कि याची की जमानत याचिका को रोहतक जिला अदालत ने खारिज कर दिया। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि याची और दूसरा पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ सिविल व क्रिमिनल मुकदमे में उलझे हैं। याची के खिलाफ दायर कराई गई एफआईआर भी जवाबी कार्रवाई का हिस्सा है।
जस्टिस राजीव नारायण रैना ने पूरे मामले में तीनों याचिकाकर्ताओं को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने और जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए। लॉ अधिकारी ने पुलिस से मिली केस फाइल का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता को 2.5 फीसदी बर्न इंजरी हुई है। इसके जवाब में एडवोकेट कुलविंदर लखनपाल ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में इस बात का कोई जिक्र नहीं किया।
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ओमपति और अन्य की ओर से एडवोकेट कुलविंदर सिंह लखनपाल के मार्फत दायर की गई जमानत याचिका में कहा गया है कि उनकी बहू मुन्नी ने पति के समर्थन से अपनी सास, ननद और बहनोई के खिलाफ रोहतक सिटी थाने में 8 फरवरी, 2016 को आईपीसी की धारा 323, 506, 34 के तहत एफआईआर दर्ज कराई। इसमें पुलिस ने बाद में आईपीसी की धारा 326 का सेक्शन 13 भी जोड़ दिया। इस प्रकार एफआईआर में आरोपियों पर गैर जमानती धाराएं लगा दी गईं। याचिका में एफआईआर को झूठा और ओछी हरकत करार देते हुए कहा गया है कि यह एफआईआर याची द्वारा मुन्नी के खिलाफ दायर कराए गए दिवानी और फौजदारी मुकदमे के जवाब में दर्ज कराई गई है। याची ने अपनी जान को खतरा बताते हुए मुन्नी और उसके पति के खिलाफ मुकदमा दायर किया हुआ है। याची का यह भी आरोप है कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में देरी की और बाद में गैर जमानती धाराएं भी जोड़ दीं। एडवोकेट कुलविंदर एस. लखनपाल ने अदालत को बताया कि याची की जमानत याचिका को रोहतक जिला अदालत ने खारिज कर दिया। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि याची और दूसरा पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ सिविल व क्रिमिनल मुकदमे में उलझे हैं। याची के खिलाफ दायर कराई गई एफआईआर भी जवाबी कार्रवाई का हिस्सा है।
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जस्टिस राजीव नारायण रैना ने पूरे मामले में तीनों याचिकाकर्ताओं को अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने और जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए। लॉ अधिकारी ने पुलिस से मिली केस फाइल का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता को 2.5 फीसदी बर्न इंजरी हुई है। इसके जवाब में एडवोकेट कुलविंदर लखनपाल ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में इस बात का कोई जिक्र नहीं किया।
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