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सविल अस्पताल से चोरी 4 दिन का मासूम 11 दिन बाद बरामद
अमर उजाला रोहतक / ब्यूरो
Updated Sun, 08 Nov 2015 01:32 AM IST
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तक तलाक की औपचारिकता शुरू भी नहीं हुई थी कि मात्र एक लाख रुपये के लिए
गीता दूसरे पति तक पहुंच गई। पूठी सैमाण निवासी पवन से 1 लाख रुपये लेने के
एवज में गीता ने उससे शादी की थी। एसपी शशांक आनंद ने बताया कि गीता की
पहली शादी बहादुरगढ़ निवासी रणबीर से हुई थी। रणबीर और गीता के 5 बच्चे (3
लड़कियां और दो लड़के) हैं। फिर दोनों में संबंध खराब होने के बाद गीता
सांपला निवासी मनोज के संपर्क में आ गई। लेकिन गीता ने अपने बच्चों से
संपर्क नहीं तोड़ा। गीता ने अनौपचारिक रुप से मनोज से भी शादी कर ली। फिर
रुपयों की जरुरत महसूस होने पर गीता ने एक लाख रुपये के एवज में पवन से
शादी की।
ऐसे हुआ मासूम का अपहरण
27 अक्तूबर को गीता की बेटी नीतिश (जो गीता के पहले पति से है) ने सिविल अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया। नीतिश को के बेड के ठीक पास में ही बैंसी निवासी जच्चा नरेश को रखा गया था। जैसे ही नरेश अपनी सास के साथ भोजन करने के लिए बाहर गई तो गीता ने अपने प्रेमी मनोज की बहन लाहली निवासी ममता को मासूम का अपहरण करने भेज दिया। गीता और मनोज अस्पताल के बाहर इंतजार कर रहे थे। इसी बीच ममता बच्चे को बाहर ले आई। बच्चे को लेकर तीनों सांपला चले गए। फिर यहां से सैमाण पहुंच गए। पुलिस ने अपहरण के बाद जिस महिला का स्कै च जारी किया था, वह ममता का ही था।
इसलिए उजाड़नी चाही मां की कोख
यदि पुलिस की कहानी पर यकीन करें तो गीता ने करीब डेढ़ साल पहले पवन से शादी की थी। पवन को गीता से एक बेटा चाहिए था। बच्चा नहीं होने के कारण दोनों के बीच अनबन थी। इस कारण पवन गीता को रुपये भी नहीं दे रहा था। लगातार रुपयों की कमी के कारण गीता ने कुछ महीनों पहले पवन को फोन पर बताया कि वह गर्भवती है। दोनों करीब छह महीने से साथ नहीं थे। इसके बाद गीता को एक नवजात लड़के की तलाश थी। जब गीता की लड़की नीतिश ने बेटी को जन्म दिया तो गीता उससे मिलने सिविल अस्पताल आई। बस यही से उसकी नजर नरेश के बेटे पर पड़ गई। उसी दिन से अपहरण की साजिश शुरू हो गई थी। हालांकि इस सारी साजिश के बारे में पवन को कोई जानकारी नहीं थी। पुलिस गीता की बेटी नीतिश से भी पूछताछ करेगी।
परिजन बोले- हम शक के आधार पर पहुंचे आरोपियों तक
नवजात की दादी कमला देवी ने बताया कि जब हमारा पोता पैदा हुआ तो एक औरत बच्चे पर ज्यादा ही मेहरबान दिख रही थी। वह बार-बार हमारे बच्चे को प्यार कर रही थी। उसके ज्यादा लाड़ ने हमें उस पर शक करने पर मजबूर कर दिया। जब बच्चा गुम हुआ तो उसको इतना दुख भी नहीं हो रहा था। इस पर हमें शक हुआ कि बच्चा इसके जानने वाले ले जा सकते हैं। शक के आधार हमने सैमाण गांव की रहने वाली उस औरत का पता लगाया तो बच्चा उसके पास मिला। उसके बाद पुलिस की मदद ली गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर हमारे बच्चे को हम तक पहुंचाने में मदद की है।
पुलिस ने बताया-यूं पहुंचे बच्चे तक
बच्चे के गायब होने के दिन ही परिजनों ने बेड पर मौजूद अन्य महिला के परिजनों पर चोरी का शक जताया था। बच्चा गायब होने के बाद से ही नीतिश की मां एक बार भी अस्पताल में नजर नहीं आई। जबकि कई दिनों से वह लगातार अपनी बेटी के पास आ रही थी। बस इसी शक के चलते एसपी ने एसआईटी का गठन करके गीता व ममता की तलाश में टीमें लगा दी।
ऐसे हुआ मासूम का अपहरण
27 अक्तूबर को गीता की बेटी नीतिश (जो गीता के पहले पति से है) ने सिविल अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया। नीतिश को के बेड के ठीक पास में ही बैंसी निवासी जच्चा नरेश को रखा गया था। जैसे ही नरेश अपनी सास के साथ भोजन करने के लिए बाहर गई तो गीता ने अपने प्रेमी मनोज की बहन लाहली निवासी ममता को मासूम का अपहरण करने भेज दिया। गीता और मनोज अस्पताल के बाहर इंतजार कर रहे थे। इसी बीच ममता बच्चे को बाहर ले आई। बच्चे को लेकर तीनों सांपला चले गए। फिर यहां से सैमाण पहुंच गए। पुलिस ने अपहरण के बाद जिस महिला का स्कै च जारी किया था, वह ममता का ही था।
इसलिए उजाड़नी चाही मां की कोख
यदि पुलिस की कहानी पर यकीन करें तो गीता ने करीब डेढ़ साल पहले पवन से शादी की थी। पवन को गीता से एक बेटा चाहिए था। बच्चा नहीं होने के कारण दोनों के बीच अनबन थी। इस कारण पवन गीता को रुपये भी नहीं दे रहा था। लगातार रुपयों की कमी के कारण गीता ने कुछ महीनों पहले पवन को फोन पर बताया कि वह गर्भवती है। दोनों करीब छह महीने से साथ नहीं थे। इसके बाद गीता को एक नवजात लड़के की तलाश थी। जब गीता की लड़की नीतिश ने बेटी को जन्म दिया तो गीता उससे मिलने सिविल अस्पताल आई। बस यही से उसकी नजर नरेश के बेटे पर पड़ गई। उसी दिन से अपहरण की साजिश शुरू हो गई थी। हालांकि इस सारी साजिश के बारे में पवन को कोई जानकारी नहीं थी। पुलिस गीता की बेटी नीतिश से भी पूछताछ करेगी।
परिजन बोले- हम शक के आधार पर पहुंचे आरोपियों तक
नवजात की दादी कमला देवी ने बताया कि जब हमारा पोता पैदा हुआ तो एक औरत बच्चे पर ज्यादा ही मेहरबान दिख रही थी। वह बार-बार हमारे बच्चे को प्यार कर रही थी। उसके ज्यादा लाड़ ने हमें उस पर शक करने पर मजबूर कर दिया। जब बच्चा गुम हुआ तो उसको इतना दुख भी नहीं हो रहा था। इस पर हमें शक हुआ कि बच्चा इसके जानने वाले ले जा सकते हैं। शक के आधार हमने सैमाण गांव की रहने वाली उस औरत का पता लगाया तो बच्चा उसके पास मिला। उसके बाद पुलिस की मदद ली गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर हमारे बच्चे को हम तक पहुंचाने में मदद की है।
पुलिस ने बताया-यूं पहुंचे बच्चे तक
बच्चे के गायब होने के दिन ही परिजनों ने बेड पर मौजूद अन्य महिला के परिजनों पर चोरी का शक जताया था। बच्चा गायब होने के बाद से ही नीतिश की मां एक बार भी अस्पताल में नजर नहीं आई। जबकि कई दिनों से वह लगातार अपनी बेटी के पास आ रही थी। बस इसी शक के चलते एसपी ने एसआईटी का गठन करके गीता व ममता की तलाश में टीमें लगा दी।