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बिना हथकड़ी अकेले ही कुख्यात को पीजीआई लेकर पहुंचे हवलदार से हाथ छुड़ाकर कैदी फरार
Updated Tue, 13 Mar 2018 02:36 AM IST
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बिना हथकड़ी अकेले ही हत्या के दोषी को पीजीआई लेकर पहुंचा हवलदार, हाथ छुड़ाकर कैदी फरार
हत्या का दोषी हुआ फरार तो फूट-फूट कर रोया पुलिसकर्मी
- अधिकारियों से पुलिसकर्मी बोला - एस्कॉर्ट इंचार्ज का नहीं था नंबर और लाइन का फोन था व्यस्त
- जींद जेल से सुनारिया ट्रांसफर होकर आया था हत्या के मामले में सजायाफ्ता शादीपुरा का कैदी मंजीत
- सुनारिया जेल से औपचारिकता पूरी होने के बाद कैदी को ऑटो में लेकर पीजीआई पहुंचा था हवलदार
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जींद जेल से ट्रांसफर होकर सुनारिया जेल में आया कुख्यात कैदी मंजीत शादीपुर सोमवार दोपहर को पीजीआई की नई ओपीडी के सामने पुलिसकर्मी को धक्का देकर फरार हो गया। हवलदार सुभाष अकेला ही बिना हथकड़ी के हत्या के मामले में सजायाफ्ता मंजीत को सुनारिया जेल से पीजीआई लेकर आया था। कैदी के फरार होने के बाद कार्रवाई के डर से सिपाही फूट फूटकर रोया।
बचाव में सिपाही ने कहा कि वह कैदी को पीजीआई से लाने से पहले उसने जींद पुलिस लाइन में फोन किया था, लेकिन नंबर व्यस्त होने के कारण बात नहीं हो सकी। जबकि सिपाही के पास उसके साथ आये एस्कॉर्ट गार्ड इंचार्ज का मोबाइल नंबर नहीं था। फिलहाल जींद पुलिस लाइन के ऑफिसर की शिकायत पर पीजीआई थाने में कैदी मंजीत और सिपाही सुभाष के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
पुलिस को दी शिकायत में किशनचंद ने बताया कि वह फिलहाल जींद पुलिस लाइन ऑफिसर के पद पर तैनात है। जींद के शादीपुर निवासी कुख्यात मंजीत हत्या के एक मामले में जींद जेल में सजायाफ्ता है। मंजीत के सिर में लगातार दर्द होने के कारण उसका पीजीआई रोहतक में उपचार चल रहा है। लगातार पीजीआई लाने ले जाने के कारण सोमवार को मंजीत का जींद जेल से सुनारिया जेल में ट्रांसफर किया गया था। पुलिस लाइन से सुबह करीब सात बजे एस्कॉर्ट इंचार्ज एएसआई चंद्र सिंह के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल जितेंद्र, अनिल, गुरमीत, सुभाष और सिपाही सतीश कुमार की टीम कैदी मंजीत और कंसाला निवासी विकास उर्फ विक्की को लेकर रोहतक सुनारिया जेल आई थी। मंजीत को सुनारिया जेल में छोड़ना था जबकि विकास को फरारी के एक मामले में बहादुरगढ़ कोर्ट में पेश करना था।
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गारद इंचार्ज ने हेड कांस्टेबल सुभाष के नेतृत्व में कैदी मंजीत को सुनारिया जेल की ड्योड़ी में छोड़ दिया। इसके बाद वह विकास को लेकर बहादुरगढ़ के लिए रवाना हो गये। सुनारिया जेल प्रशासन ने मंजीत की फाइल की जांच पड़ताल की। इसमें सामने आया कि मंजीत का पीजीआई से सिर के दर्द का उपचार चल रहा है। मंजीत को सोमवार को ओपीडी में दिखाना था। इस पर जेल प्रशासन ने हेड कांस्टेबल सुभाष को मंजीत का पीजीआई में स्वास्थ्य जांच करवाने के बारे में कहा।
जेल में अतिरिक्त गारद की व्यवस्था नहीं होने के कारण हेड कांस्टेबल सुभाष अकेला ही कुख्यात मंजीत को लेकर पीजीआई के लिए चल पड़ा। दोनों ऑटो में बैठकर पीजीआई की नई ओपीडी के पीछे के गेट के सामने आ गये। जैसे ही दोनों ऑटो से उतरकर ओपीडी की तरफ चले तो कैदी मंजीत हाथ छुड़ाकर सड़क की तरफ भाग गया। हेड कांस्टेबल सुभाष ने काफी दूरी तक उसका पीछा किया लेकिन कैदी से ज्यादा उम्र और भीड़ का फायदा उठाकर कुख्यात मंजीत फरार हो गया। तभी सुभाष ने पुलिस कंट्रोल रूम को मामले की सूचना दी। इसके बाद पीजीआई थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कैदी की इधर उधर तलाश की। मगर उसके बारे में कोई सुराग नहीं लगा।
कार्रवाई के डर से डेढ़ घंटे तक बिलखता रहा पुलिसकर्मी सुभाष
कैदी के भागने में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई के डर से हेड कांस्टेबल सुभाष करीब एक घंटे तक नई ओपीडी और पीजीआई थाने के बाहर रोता रहा। सुभाष ने बिलखते हुए जींद पुलिस के उच्च अधिकारियों को पूरी घटना के बारे में बताया। घटना के करीब दो घंटे बाद जींद डीएसपी कप्तान सिंह भी टीम सहित मौके पर पहुंच गये। उन्होंने सुभाष से मामले के बारे में पूछताछ की। सुभाष बिलखते हुए बार बार कह रहा था कि कैदी ज्यादा भीड़ का फायदा उठाकर भाग गया। सुभाष पर लापरवाही बरतने का केस दर्ज किया गया है।
कुख्यात मंजीत को बिना हथकड़ी के अकेला क्यों लेकर आया हेड कांस्टेबल सुभाष
कैदी मंजीत के पुलिस कस्टडी से भागने पर उसे सुनारिया जेल लेकर आने वाले गार्ड और पीजीआई में बिना हथकड़ी के लेकर आने वाले हेड कांस्टेबल सुभाष पर सवाल उठ गये हैं। हेड कांस्टेबल सुभाष अकेले ही कुख्यात अपराधी मंजीत को बिना हथकड़ी लगाए पीजीआई लेकर क्यों आया। इसके अलावा एस्कॉर्ट गार्ड इंचार्ज ने भगौड़े अपराधी विकास को भारी सुरक्षा में बहादुरगढ़ कोर्ट में ले जाने में दिलचस्पी क्यों दिखाई। जबकि कैदी मंजीत कई संगीन मामलों में शामिल रह चुका है।
हवलदार बोला- पुलिस लाइन में व्यस्त था फोन
लाइन ऑफिसर ने कहा- उच्च अधिकारियों को नहीं किया सूचित
दूसरी तरफ जींद डीएसपी कप्तान सिंह ने जब हेड कांस्टेबल सुभाष से पूछा कि वह अकेले ही मंजीत को पीजीआई लेकर क्यों आये। इस पर सुभाष ने जवाब दिया कि एस्कॉर्ट इंचार्ज एएसआई चंद्रसिंह का मोबाइल नंबर उनके पास नहीं था। इस कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था। इंस्पेक्टर गरिमा ने बताया कि सुभाष ने यह भी कहा कि उन्होंने मंजीत को जेल से लाने से पहले पुलिस लाइन जींद के नंबर पर कॉल की थी लेकिन फोन लगातार व्यस्त आ रहा था। इसके बाद वह अकेला ही मंजीत को लेकर निकल पड़ा। शिकायत में लाइन ऑफिसर किशनचंद ने बताया कि सुभाष ने मंजीत को अकेला लाने से पहले किसी भी उच्च अधिकारी को नहीं बताया। इस कारण कैदी भागने में कामयाब हो गया।
दर्जनभर केस में आरोपी है कुख्यात मंजीत, दो में सजा, चार में बरी
पुलिस जांच में सामने आया कि फरार होने वाले कैदी मंजीत हत्या, हत्या प्रयास, लूट सहित दर्जनभर संगीन मामलों में आरोपी रह चुका है। पीजीआई थाना प्रभारी गरिमा ने बताया कि मंजीत को दो मामलों में सजा हो चुकी है जबकि चार केस में बरी हो गया है। इसके अलावा अन्य मामले उसके खिलाफ अदालत में विचाराधीन है। आरोपी फिलहाल जींद जेल में 22 अगस्त वर्ष 2014 जुलाना थाने में दर्ज एक हत्या के मामले में सजा काट रहा था।
सुनारिया जेल प्रशासन ने भी नहीं ली सुध
मामले में सुनारिया जेल प्रशासन की लापरवाही भी सामने आई है। जेल प्रशासन को पता था कि एस्कॉर्ट गार्ड एक कैदी को बहादुरगढ़ कोर्ट में पेशी पर लेकर जा रहा है। कैदी मंजीत के साथ अकेला हवलदार सुभाष ही है। इसके बावजूद जेल प्रशासन ने सुभाष को ही मंजीत को लेकर पीजीआई भेज दिया। उसके साथ किसी भी पुलिसकर्मी को नहीं भेजा गया जबकि मंजीत का आपराधिक रिकॉर्ड भी जेल प्रशासन के पास था।
वर्जन
कैदी मंजीत को तलाश करने के लिए अलग-अलग टीम छापेमारी कर रही है। उसके घर भी पुलिस की एक टीम को भेजा गया है। इसके अलावा आरोपी के पुराने ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
- इंस्पेक्टर गरिमा, एसएचओ थाना पीजीआई
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हत्या का दोषी हुआ फरार तो फूट-फूट कर रोया पुलिसकर्मी
- अधिकारियों से पुलिसकर्मी बोला - एस्कॉर्ट इंचार्ज का नहीं था नंबर और लाइन का फोन था व्यस्त
- जींद जेल से सुनारिया ट्रांसफर होकर आया था हत्या के मामले में सजायाफ्ता शादीपुरा का कैदी मंजीत
- सुनारिया जेल से औपचारिकता पूरी होने के बाद कैदी को ऑटो में लेकर पीजीआई पहुंचा था हवलदार
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जींद जेल से ट्रांसफर होकर सुनारिया जेल में आया कुख्यात कैदी मंजीत शादीपुर सोमवार दोपहर को पीजीआई की नई ओपीडी के सामने पुलिसकर्मी को धक्का देकर फरार हो गया। हवलदार सुभाष अकेला ही बिना हथकड़ी के हत्या के मामले में सजायाफ्ता मंजीत को सुनारिया जेल से पीजीआई लेकर आया था। कैदी के फरार होने के बाद कार्रवाई के डर से सिपाही फूट फूटकर रोया।
बचाव में सिपाही ने कहा कि वह कैदी को पीजीआई से लाने से पहले उसने जींद पुलिस लाइन में फोन किया था, लेकिन नंबर व्यस्त होने के कारण बात नहीं हो सकी। जबकि सिपाही के पास उसके साथ आये एस्कॉर्ट गार्ड इंचार्ज का मोबाइल नंबर नहीं था। फिलहाल जींद पुलिस लाइन के ऑफिसर की शिकायत पर पीजीआई थाने में कैदी मंजीत और सिपाही सुभाष के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
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पुलिस को दी शिकायत में किशनचंद ने बताया कि वह फिलहाल जींद पुलिस लाइन ऑफिसर के पद पर तैनात है। जींद के शादीपुर निवासी कुख्यात मंजीत हत्या के एक मामले में जींद जेल में सजायाफ्ता है। मंजीत के सिर में लगातार दर्द होने के कारण उसका पीजीआई रोहतक में उपचार चल रहा है। लगातार पीजीआई लाने ले जाने के कारण सोमवार को मंजीत का जींद जेल से सुनारिया जेल में ट्रांसफर किया गया था। पुलिस लाइन से सुबह करीब सात बजे एस्कॉर्ट इंचार्ज एएसआई चंद्र सिंह के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल जितेंद्र, अनिल, गुरमीत, सुभाष और सिपाही सतीश कुमार की टीम कैदी मंजीत और कंसाला निवासी विकास उर्फ विक्की को लेकर रोहतक सुनारिया जेल आई थी। मंजीत को सुनारिया जेल में छोड़ना था जबकि विकास को फरारी के एक मामले में बहादुरगढ़ कोर्ट में पेश करना था।
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गारद इंचार्ज ने हेड कांस्टेबल सुभाष के नेतृत्व में कैदी मंजीत को सुनारिया जेल की ड्योड़ी में छोड़ दिया। इसके बाद वह विकास को लेकर बहादुरगढ़ के लिए रवाना हो गये। सुनारिया जेल प्रशासन ने मंजीत की फाइल की जांच पड़ताल की। इसमें सामने आया कि मंजीत का पीजीआई से सिर के दर्द का उपचार चल रहा है। मंजीत को सोमवार को ओपीडी में दिखाना था। इस पर जेल प्रशासन ने हेड कांस्टेबल सुभाष को मंजीत का पीजीआई में स्वास्थ्य जांच करवाने के बारे में कहा।
जेल में अतिरिक्त गारद की व्यवस्था नहीं होने के कारण हेड कांस्टेबल सुभाष अकेला ही कुख्यात मंजीत को लेकर पीजीआई के लिए चल पड़ा। दोनों ऑटो में बैठकर पीजीआई की नई ओपीडी के पीछे के गेट के सामने आ गये। जैसे ही दोनों ऑटो से उतरकर ओपीडी की तरफ चले तो कैदी मंजीत हाथ छुड़ाकर सड़क की तरफ भाग गया। हेड कांस्टेबल सुभाष ने काफी दूरी तक उसका पीछा किया लेकिन कैदी से ज्यादा उम्र और भीड़ का फायदा उठाकर कुख्यात मंजीत फरार हो गया। तभी सुभाष ने पुलिस कंट्रोल रूम को मामले की सूचना दी। इसके बाद पीजीआई थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कैदी की इधर उधर तलाश की। मगर उसके बारे में कोई सुराग नहीं लगा।
कार्रवाई के डर से डेढ़ घंटे तक बिलखता रहा पुलिसकर्मी सुभाष
कैदी के भागने में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई के डर से हेड कांस्टेबल सुभाष करीब एक घंटे तक नई ओपीडी और पीजीआई थाने के बाहर रोता रहा। सुभाष ने बिलखते हुए जींद पुलिस के उच्च अधिकारियों को पूरी घटना के बारे में बताया। घटना के करीब दो घंटे बाद जींद डीएसपी कप्तान सिंह भी टीम सहित मौके पर पहुंच गये। उन्होंने सुभाष से मामले के बारे में पूछताछ की। सुभाष बिलखते हुए बार बार कह रहा था कि कैदी ज्यादा भीड़ का फायदा उठाकर भाग गया। सुभाष पर लापरवाही बरतने का केस दर्ज किया गया है।
कुख्यात मंजीत को बिना हथकड़ी के अकेला क्यों लेकर आया हेड कांस्टेबल सुभाष
कैदी मंजीत के पुलिस कस्टडी से भागने पर उसे सुनारिया जेल लेकर आने वाले गार्ड और पीजीआई में बिना हथकड़ी के लेकर आने वाले हेड कांस्टेबल सुभाष पर सवाल उठ गये हैं। हेड कांस्टेबल सुभाष अकेले ही कुख्यात अपराधी मंजीत को बिना हथकड़ी लगाए पीजीआई लेकर क्यों आया। इसके अलावा एस्कॉर्ट गार्ड इंचार्ज ने भगौड़े अपराधी विकास को भारी सुरक्षा में बहादुरगढ़ कोर्ट में ले जाने में दिलचस्पी क्यों दिखाई। जबकि कैदी मंजीत कई संगीन मामलों में शामिल रह चुका है।
हवलदार बोला- पुलिस लाइन में व्यस्त था फोन
लाइन ऑफिसर ने कहा- उच्च अधिकारियों को नहीं किया सूचित
दूसरी तरफ जींद डीएसपी कप्तान सिंह ने जब हेड कांस्टेबल सुभाष से पूछा कि वह अकेले ही मंजीत को पीजीआई लेकर क्यों आये। इस पर सुभाष ने जवाब दिया कि एस्कॉर्ट इंचार्ज एएसआई चंद्रसिंह का मोबाइल नंबर उनके पास नहीं था। इस कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था। इंस्पेक्टर गरिमा ने बताया कि सुभाष ने यह भी कहा कि उन्होंने मंजीत को जेल से लाने से पहले पुलिस लाइन जींद के नंबर पर कॉल की थी लेकिन फोन लगातार व्यस्त आ रहा था। इसके बाद वह अकेला ही मंजीत को लेकर निकल पड़ा। शिकायत में लाइन ऑफिसर किशनचंद ने बताया कि सुभाष ने मंजीत को अकेला लाने से पहले किसी भी उच्च अधिकारी को नहीं बताया। इस कारण कैदी भागने में कामयाब हो गया।
दर्जनभर केस में आरोपी है कुख्यात मंजीत, दो में सजा, चार में बरी
पुलिस जांच में सामने आया कि फरार होने वाले कैदी मंजीत हत्या, हत्या प्रयास, लूट सहित दर्जनभर संगीन मामलों में आरोपी रह चुका है। पीजीआई थाना प्रभारी गरिमा ने बताया कि मंजीत को दो मामलों में सजा हो चुकी है जबकि चार केस में बरी हो गया है। इसके अलावा अन्य मामले उसके खिलाफ अदालत में विचाराधीन है। आरोपी फिलहाल जींद जेल में 22 अगस्त वर्ष 2014 जुलाना थाने में दर्ज एक हत्या के मामले में सजा काट रहा था।
सुनारिया जेल प्रशासन ने भी नहीं ली सुध
मामले में सुनारिया जेल प्रशासन की लापरवाही भी सामने आई है। जेल प्रशासन को पता था कि एस्कॉर्ट गार्ड एक कैदी को बहादुरगढ़ कोर्ट में पेशी पर लेकर जा रहा है। कैदी मंजीत के साथ अकेला हवलदार सुभाष ही है। इसके बावजूद जेल प्रशासन ने सुभाष को ही मंजीत को लेकर पीजीआई भेज दिया। उसके साथ किसी भी पुलिसकर्मी को नहीं भेजा गया जबकि मंजीत का आपराधिक रिकॉर्ड भी जेल प्रशासन के पास था।
वर्जन
कैदी मंजीत को तलाश करने के लिए अलग-अलग टीम छापेमारी कर रही है। उसके घर भी पुलिस की एक टीम को भेजा गया है। इसके अलावा आरोपी के पुराने ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
- इंस्पेक्टर गरिमा, एसएचओ थाना पीजीआई