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Updated Mon, 19 Jun 2017 12:05 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
सूबे भर के साथ ही पीतल नगरी यानी रेवाड़ी में शराब तस्करी का कारोबार जमकर फल-फूल रहा है। नई आबकारी नीति आने के बाद इस वित्तीय वर्ष में उत्तर प्रदेश में शराब के रेट 20 फीसदी तक कम हुए, वहीं हरियाणा में रेट बढ़े हैं। इससे सूबे से यूपी में तस्करी कर भेजी जाने वाली शराब की बिक्री भले ही कम हुई हो, लेकिन गुजरात के बाद कुछ समय पूर्व बिहार में शराबबंदी से तस्करों को शराब भेजने के नए ठिकाने मिल गए हैं। ऐसे में सूबे के शराब तस्करों की पौ-बारह है। वहीं जिले में भी शराब के अवैध तस्कर अच्छे से फल-फूल रहे हैं। शनिवार को ही पुलिस ने बिहार में तस्करी के लिए भेजी जाने वाली शराब की अच्छी खासी खेप पकड़ी थी। इसके अलावा गुजरात में भी तस्करी कर भेजी जाने वाली शराब के कुछ मामले पहले सामने आ चुके हैं। ऐसे में साफ है कि सूबे और खासकर जिले में शराब तस्करी का धंधा अच्छे से चल रहा है।
शराबबंदी के चलते गुजरात और बिहार हैं खास खरीददार
महाराष्ट्र से अलग राज्य बनने के बाद साल 1960 से ही गुजरात में शराब बंदी है। आंकड़ों की मानें तो गुजरात में पिछले छह सालों में 3 हजार करोड़ रुपये की शराब जब्त की गई है। गुजरात को शराब तस्करी करने वाले क्षेत्रों में पंजाब और राजस्थान के अलावा हरियाणा सबसे प्रमुख है। वहीं बिहार की बात करें तो वहां भी नीतिश सरकार ने शराब पर बैन लगा दिया। ऐसे में वहां भी हरियाणा की शराब के खास खरीददार मौजूद हैं।
उत्तर प्रदेश में बिक्री हुई कम, उत्तराखंड में मांग
पहले जहां उत्तर प्रदेश में हरियाणा की शराब सबसे ज्यादा तस्करी होकर जाती थी। बिहार का भी कमोबेश यही हाल था। लेकिन इस बार आई आबकारी नीति में उत्तर प्रदेश में शराब की कीमतों में 20 फीसदी तक गिरावट हुई। वहीं हरियाणा सरकार ने नई आबकारी नीति में शराब को इतना ही महंगा कर दिया। ऐसे में उत्तर प्रदेश और हरियाणा की शराब के रेट में खासा अंतर नहीं रह गया। ऐसे में यूपी में तस्करी बेहद कम मुनाफे और ज्यादा खतरे का सौदा था। लेकिन यूपी के बाद उत्तराखंड के भी एक बड़े हिस्से में हरियाणा की शराब तस्करी होकर जाती है।
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तीन से चार गुना दाम पर बिकती है शराब
सबसे ज्यादा शराब की तस्करी एवरेज रेट की शराब ब्रांड जैसे रॉयल स्टैग, रॉयल ग्रीन, इंपीरियल ब्लू, ऑफिसर्स च्वॉइस आदि की होती है। इनमें भी बोतल और हाफ की डिमांड ज्यादा है। बिहार और गुजरात में शराबबंदी के चलते तस्कर शराब वहां बेचकर जमकर चांदी कूटते हैं। बता दें कि बिहार और गुजरात में तस्करी कर बेची जाने वाली शराब का रेट तीन से चार गुना तक ज्यादा होता है। इससे लोकल ठेकेदार से लेकर सप्लाई करने वाले और खपत के राज्यों वाले लोकल शराब माफिया सभी की जेबें खासा गर्म हो जाती हैं।
जिले से बाहर दूसरे राज्यों में शराब की तस्करी करने वालों पर पुलिस की पैनी नजर है। इसके अलावा लोकल शराब माफियाओं पर भी पुलिस शिकंजा कस रही है। हाल में शराब तस्करों के खिलाफ कई कार्रवाई हुई हैं।
-संगीता कालिया, एसपी, जिला रेवाड़ी
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रेवाड़ी।
सूबे भर के साथ ही पीतल नगरी यानी रेवाड़ी में शराब तस्करी का कारोबार जमकर फल-फूल रहा है। नई आबकारी नीति आने के बाद इस वित्तीय वर्ष में उत्तर प्रदेश में शराब के रेट 20 फीसदी तक कम हुए, वहीं हरियाणा में रेट बढ़े हैं। इससे सूबे से यूपी में तस्करी कर भेजी जाने वाली शराब की बिक्री भले ही कम हुई हो, लेकिन गुजरात के बाद कुछ समय पूर्व बिहार में शराबबंदी से तस्करों को शराब भेजने के नए ठिकाने मिल गए हैं। ऐसे में सूबे के शराब तस्करों की पौ-बारह है। वहीं जिले में भी शराब के अवैध तस्कर अच्छे से फल-फूल रहे हैं। शनिवार को ही पुलिस ने बिहार में तस्करी के लिए भेजी जाने वाली शराब की अच्छी खासी खेप पकड़ी थी। इसके अलावा गुजरात में भी तस्करी कर भेजी जाने वाली शराब के कुछ मामले पहले सामने आ चुके हैं। ऐसे में साफ है कि सूबे और खासकर जिले में शराब तस्करी का धंधा अच्छे से चल रहा है।
शराबबंदी के चलते गुजरात और बिहार हैं खास खरीददार
महाराष्ट्र से अलग राज्य बनने के बाद साल 1960 से ही गुजरात में शराब बंदी है। आंकड़ों की मानें तो गुजरात में पिछले छह सालों में 3 हजार करोड़ रुपये की शराब जब्त की गई है। गुजरात को शराब तस्करी करने वाले क्षेत्रों में पंजाब और राजस्थान के अलावा हरियाणा सबसे प्रमुख है। वहीं बिहार की बात करें तो वहां भी नीतिश सरकार ने शराब पर बैन लगा दिया। ऐसे में वहां भी हरियाणा की शराब के खास खरीददार मौजूद हैं।
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उत्तर प्रदेश में बिक्री हुई कम, उत्तराखंड में मांग
पहले जहां उत्तर प्रदेश में हरियाणा की शराब सबसे ज्यादा तस्करी होकर जाती थी। बिहार का भी कमोबेश यही हाल था। लेकिन इस बार आई आबकारी नीति में उत्तर प्रदेश में शराब की कीमतों में 20 फीसदी तक गिरावट हुई। वहीं हरियाणा सरकार ने नई आबकारी नीति में शराब को इतना ही महंगा कर दिया। ऐसे में उत्तर प्रदेश और हरियाणा की शराब के रेट में खासा अंतर नहीं रह गया। ऐसे में यूपी में तस्करी बेहद कम मुनाफे और ज्यादा खतरे का सौदा था। लेकिन यूपी के बाद उत्तराखंड के भी एक बड़े हिस्से में हरियाणा की शराब तस्करी होकर जाती है।
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तीन से चार गुना दाम पर बिकती है शराब
सबसे ज्यादा शराब की तस्करी एवरेज रेट की शराब ब्रांड जैसे रॉयल स्टैग, रॉयल ग्रीन, इंपीरियल ब्लू, ऑफिसर्स च्वॉइस आदि की होती है। इनमें भी बोतल और हाफ की डिमांड ज्यादा है। बिहार और गुजरात में शराबबंदी के चलते तस्कर शराब वहां बेचकर जमकर चांदी कूटते हैं। बता दें कि बिहार और गुजरात में तस्करी कर बेची जाने वाली शराब का रेट तीन से चार गुना तक ज्यादा होता है। इससे लोकल ठेकेदार से लेकर सप्लाई करने वाले और खपत के राज्यों वाले लोकल शराब माफिया सभी की जेबें खासा गर्म हो जाती हैं।
जिले से बाहर दूसरे राज्यों में शराब की तस्करी करने वालों पर पुलिस की पैनी नजर है। इसके अलावा लोकल शराब माफियाओं पर भी पुलिस शिकंजा कस रही है। हाल में शराब तस्करों के खिलाफ कई कार्रवाई हुई हैं।
-संगीता कालिया, एसपी, जिला रेवाड़ी