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अब गोशालाओं में मरने वाले गोवंश का डाटा जुटाएंगे अधिकारी
Updated Fri, 10 Aug 2018 01:25 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। पशुपालन विभाग अब गोशालाओं में दम तोड़ रहे गोवंश का डाटा जुटाएगा। सूत्र बताते है कि प्रदेशभर की गोशालाओं में दम तोड़ रहे गोवंश की संख्या हजारों में है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी बाबत तीन दिन के अंदर सभी जिलों के डिप्टी डायरेक्टर से यह जानकारी भेजने के निर्देश दिए गए है।
प्रदेशभर में करीब पांच सौ रजिस्टर्ड गोशालाएं है जबकि इससे करीब दोगुणा तक प्राइवेट गोशालाएं चल रही है। प्रदेश सरकार ने बीते वर्ष सभी लावारिस पशुओं को गोशालाएं में रखने के निर्देश दिए थे। गोवंश के लिए नंदीशालाएं शुरू की गई। शहर में घूम रहे लावारिस सांड़ों को इनमें रखा गया। अब नंदीशालाओं में गोवंश की मौत की सूचनाएं लगातार आ रही है। सूत्र बताते है कि मरने वाले गोवंशों की संख्या हजारों में है जबकि अधिकतर गोशाला संचालक इन्हें बहुत कम दर्शा रहे है। यह मामला अब उच्च अधिकारियों के भी संज्ञान में आया है। इसी कारण अब सभी गोशालाओं से मरने वाले गोवंशों का डाटा मांगा गया है। पशुपालन विभाग के महानिदेशक ने पिछले तीन साल का डाटा मांगा है। इसके लिए जिला अधिकारियों को महज तीन दिन का समय दिया गया है। 10 अगस्त दोपहर तीन बजे डाटा के निर्देश दिए गए है।
सभी जिलों की गोशालाओं से मरने वाले गोवंश की जानकारी मांगी गई है। प्रयास रहेगा कि जहां ज्यादा गोवंश मर रहे है वहां का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार के प्रयास किए जाएंगे। वहां चिकित्सीय सुविधाएं भी दुरुस्त करवाई जाएंगी।
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डा. जीएस जाखड़, महानिदेशक
पशुपालन विभाग
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भिवानी। पशुपालन विभाग अब गोशालाओं में दम तोड़ रहे गोवंश का डाटा जुटाएगा। सूत्र बताते है कि प्रदेशभर की गोशालाओं में दम तोड़ रहे गोवंश की संख्या हजारों में है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी बाबत तीन दिन के अंदर सभी जिलों के डिप्टी डायरेक्टर से यह जानकारी भेजने के निर्देश दिए गए है।
प्रदेशभर में करीब पांच सौ रजिस्टर्ड गोशालाएं है जबकि इससे करीब दोगुणा तक प्राइवेट गोशालाएं चल रही है। प्रदेश सरकार ने बीते वर्ष सभी लावारिस पशुओं को गोशालाएं में रखने के निर्देश दिए थे। गोवंश के लिए नंदीशालाएं शुरू की गई। शहर में घूम रहे लावारिस सांड़ों को इनमें रखा गया। अब नंदीशालाओं में गोवंश की मौत की सूचनाएं लगातार आ रही है। सूत्र बताते है कि मरने वाले गोवंशों की संख्या हजारों में है जबकि अधिकतर गोशाला संचालक इन्हें बहुत कम दर्शा रहे है। यह मामला अब उच्च अधिकारियों के भी संज्ञान में आया है। इसी कारण अब सभी गोशालाओं से मरने वाले गोवंशों का डाटा मांगा गया है। पशुपालन विभाग के महानिदेशक ने पिछले तीन साल का डाटा मांगा है। इसके लिए जिला अधिकारियों को महज तीन दिन का समय दिया गया है। 10 अगस्त दोपहर तीन बजे डाटा के निर्देश दिए गए है।
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सभी जिलों की गोशालाओं से मरने वाले गोवंश की जानकारी मांगी गई है। प्रयास रहेगा कि जहां ज्यादा गोवंश मर रहे है वहां का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार के प्रयास किए जाएंगे। वहां चिकित्सीय सुविधाएं भी दुरुस्त करवाई जाएंगी।
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डा. जीएस जाखड़, महानिदेशक
पशुपालन विभाग