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कूच बिहार ट्रॉफी:: लाहली के विकेट मैन बने तन्मय, तमिलनाडु के 14 खिलाड़ियों को पवेलियन भेजा
Wed, 03 Dec 2025 02:42 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 03 Dec 2025 02:42 AM IST
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13...क्रिकेट खिलाड़ी तन्मय। स्रोत : परिजन
रोहित डागर
रोहतक। जिले के युवा खिलाड़ी तन्मय ने सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा व समर्पण हो तो खेल व शिक्षा दोनों क्षेत्रों में शिखर को छुआ जा सकता है। उन्होंने 10वीं कक्षा में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के बावजूद कॅरिअर के लिए क्रिकेट के जुनून को चुना। मंगलवार को कूच बिहार ट्रॉफी में हरियाणा व तमिलनाडु के बीच खेले गए मैच में तन्मय ने 14 विकेट लिए।
मुकाबला चौधरी बंसीलाल स्टेडियम लाहली में खेला गया। इसमें तन्मय ने पहली पारी में 9 व दूसरी पारी में 5 विकेट लिए। पिता धर्मवीर ने बताया कि बेटे तन्मय ने 2015 में खेलना शुरू किया था। उन्होंने कहा परिवार में शुरू से खेल में रुझान था। तन्मय को बचपन से खेल पसंद था।
शुरू में वह हेल्थ ठीक रखने के लिए खेलता था, फिर बाद में क्रिकेट में ही कॅरिअर बनाने का फैसला किया। वह स्वयं फुटबॉल इंटर-यूनिवर्सिटी स्तर तक खेल चुके हैं और उनकी तन्मय की दोनों बुआ शालू और सुशीला वॉलीबॉल में नेशनल स्तर की खिलाड़ी रही हैं।
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धर्मवीर पॉलिटेक्निक में लेक्चरर व मां रमन कुमारी भी पीजीटी अध्यापक
धर्मवीर ने बताया कि तन्मय पढ़ाई में अव्वल रहा है। 10वीं के बाद मैंने तन्मय से कहा था कि एक विकल्प चुन लो, पढ़ाई या खेल। आगे जीवन में पछताना नहीं कि यह स्टेप उठाया था। तन्मय ने बिना किसी हिचकिचाहट के खेल को चुना। वह वैश्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं में पढ़ रहा है। स्कूल प्राचार्य व कोच कुलबीर हुड्डा ने काफी सहयोग किया है। तन्मय के पिता धर्मवीर पॉलिटेक्निक में लेक्चरर व मां रमन कुमारी भी पीजीटी अध्यापक हैं। संवाद
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रोहतक। जिले के युवा खिलाड़ी तन्मय ने सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा व समर्पण हो तो खेल व शिक्षा दोनों क्षेत्रों में शिखर को छुआ जा सकता है। उन्होंने 10वीं कक्षा में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के बावजूद कॅरिअर के लिए क्रिकेट के जुनून को चुना। मंगलवार को कूच बिहार ट्रॉफी में हरियाणा व तमिलनाडु के बीच खेले गए मैच में तन्मय ने 14 विकेट लिए।
मुकाबला चौधरी बंसीलाल स्टेडियम लाहली में खेला गया। इसमें तन्मय ने पहली पारी में 9 व दूसरी पारी में 5 विकेट लिए। पिता धर्मवीर ने बताया कि बेटे तन्मय ने 2015 में खेलना शुरू किया था। उन्होंने कहा परिवार में शुरू से खेल में रुझान था। तन्मय को बचपन से खेल पसंद था।
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शुरू में वह हेल्थ ठीक रखने के लिए खेलता था, फिर बाद में क्रिकेट में ही कॅरिअर बनाने का फैसला किया। वह स्वयं फुटबॉल इंटर-यूनिवर्सिटी स्तर तक खेल चुके हैं और उनकी तन्मय की दोनों बुआ शालू और सुशीला वॉलीबॉल में नेशनल स्तर की खिलाड़ी रही हैं।
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धर्मवीर पॉलिटेक्निक में लेक्चरर व मां रमन कुमारी भी पीजीटी अध्यापक
धर्मवीर ने बताया कि तन्मय पढ़ाई में अव्वल रहा है। 10वीं के बाद मैंने तन्मय से कहा था कि एक विकल्प चुन लो, पढ़ाई या खेल। आगे जीवन में पछताना नहीं कि यह स्टेप उठाया था। तन्मय ने बिना किसी हिचकिचाहट के खेल को चुना। वह वैश्य सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं में पढ़ रहा है। स्कूल प्राचार्य व कोच कुलबीर हुड्डा ने काफी सहयोग किया है। तन्मय के पिता धर्मवीर पॉलिटेक्निक में लेक्चरर व मां रमन कुमारी भी पीजीटी अध्यापक हैं। संवाद