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वैक्सीन लगवाने के लिए वालंटियर कर रहे पीजीआईएमएस से संपर्क
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रोहतक। पीजीआईएमएस में कोवैक्सीन रिसर्च का तीसरा फेज जारी है। इसमें संस्थान अभी तक 300 वालंटियरों को कोवैक्सीन की डोज लगा चुका है। पहले, दूसरे फेज के अलावा तीसरे फेज में अब तक शामिल 300 वालंटियरों में से प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को ही कोरोना संक्रमण हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री के संक्रमित होने के मुख्य कारणों में एक कारण बताया जा रहा है कि वैक्सीन लगने के बाद तय समय नहीं बीता कि शरीर में एंटीबॉडी बन पाए।
रिसर्च टीम के को-इन्वेस्टिगेट डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि जागरूकता के अभाव में लोग भ्रांति बना लेते हैं। हर वैक्सीन का एक मानक होता है कि वह कितने प्रतिशत प्रभावशाली रहेगी, यही रिसर्च कोवैक्सीन की भी चल रही है। कोवैक्सीन में सबसे बेहतर यह है कि यह किल्ड वैक्सीन है, इससे हानि नहीं है। यह शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा सकती। यही वजह है कि पहले दो फेज पास करने के बाद तीसरे फेज में वालंटियरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रिसर्च टीम स्वास्थ्य मंत्री के संपर्क में है, वह ठीक हैं। स्वास्थ्य मंत्री के स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों की नजर है। गौरतलब है कि रिसर्च में शामिल होने वाले हर वालंटियर के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी रिसर्च टीम की होती है। इसी के तहत पीजीआईएमएस की रिसर्च टीम लगातार एचएम के संपर्क में है।
दूसरे जिलों के वालंटियर कर रहे फोन
पीजीआईएमएस में चल रही रिसर्च टीम के पास कोवैक्सीन की रिसर्च का हिस्सा बनने के लिए जिले के अलावा दूसरे जिलों के वालंटियर लगातार संपर्क कर रहे हैं। लेकिन पीजीआईएमएस जिले के लोगों को प्राथमिकता दे रहा है। रिसर्च टीम के अनुसार स्थानीय वालंटियर को उनके पास आने में कोई समस्या नहीं होगी। रिसर्च में शामिल होने वाले हर व्यक्ति को बता दिया जाता है कि उसे हर माह सैंपल देने आना होगा।
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रिसर्च टीम के को-इन्वेस्टिगेट डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि जागरूकता के अभाव में लोग भ्रांति बना लेते हैं। हर वैक्सीन का एक मानक होता है कि वह कितने प्रतिशत प्रभावशाली रहेगी, यही रिसर्च कोवैक्सीन की भी चल रही है। कोवैक्सीन में सबसे बेहतर यह है कि यह किल्ड वैक्सीन है, इससे हानि नहीं है। यह शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा सकती। यही वजह है कि पहले दो फेज पास करने के बाद तीसरे फेज में वालंटियरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। रिसर्च टीम स्वास्थ्य मंत्री के संपर्क में है, वह ठीक हैं। स्वास्थ्य मंत्री के स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों की नजर है। गौरतलब है कि रिसर्च में शामिल होने वाले हर वालंटियर के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी रिसर्च टीम की होती है। इसी के तहत पीजीआईएमएस की रिसर्च टीम लगातार एचएम के संपर्क में है।
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दूसरे जिलों के वालंटियर कर रहे फोन
पीजीआईएमएस में चल रही रिसर्च टीम के पास कोवैक्सीन की रिसर्च का हिस्सा बनने के लिए जिले के अलावा दूसरे जिलों के वालंटियर लगातार संपर्क कर रहे हैं। लेकिन पीजीआईएमएस जिले के लोगों को प्राथमिकता दे रहा है। रिसर्च टीम के अनुसार स्थानीय वालंटियर को उनके पास आने में कोई समस्या नहीं होगी। रिसर्च में शामिल होने वाले हर व्यक्ति को बता दिया जाता है कि उसे हर माह सैंपल देने आना होगा।
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