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Rohtak News: परिवहन मंत्री आवास घेराव को लेकर साझा मोर्चा यूनियन की हुई बैठक
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नए बस स्टेड पर मिटिंग करते रोडवेज के कर्मचारी ।
रोहतक। ऑनलाइन ट्रांसफर नीति के खिलाफ सोमवार को रोडवेज के प्रागंण में साझा मोर्चा यूनियन प्रधान व कर्मचारियों ने बैठक की। जिसमें निर्णय लिया की 11 जून को हर डिपो से 200 कर्मचारी परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा के आवास का घेराव करने के लिए शामिल होंगे। एक साथ 200 कर्मचारियों का तबादला कर कर्मचारियों के साथ अन्याय किया गया है।
डिपो के राज्य महासचिव अमित महराना ने बताया कि परिवहन विभाग में 828 परिचालक, 883 चालक व 130 लिपिकों की ऑनलाइन ट्रांसफर की गई है। जिसमें रोहतक डिपो से सर्वाधिक 205 कर्मचारियों की ट्रांसफर की गई। जिनमें से 106 परिचालक, 94 ड्राइवर व 5 लिपिक हैं। इस ट्रांसफर पॉलिसी में न तो कर्मचारियों से मनपसंद डिपो की च्वाइस ली गई, न ही क्रॉनिक कर्मचारियों को कोई छूट दी गई न ही कोई कपल केस में छूट दी गई है, न ही नौकरी के अंतिम वर्ष में कार्य कर रहे कर्मचारियों को छूट दी गई है। अगर परिवहन विभाग ने ऑनलाइन पॉलिसी के तहत ट्रांसफर करनी भी थी तो कम से कम मार्च के महीने में करनी चाहिए थी। अब सभी कर्मचारियों के बच्चों के एडमिशन स्कूल व कॉलेजों में हो चुके हैं।
डिपो प्रधान सुरेश नेहरा ने बताया कि परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा बार-बार न्यूज पेपरों के माध्यम से बयान जारी कर रहे थे कि हमारा उद्देश्य ऑनलाइन पॉलिसी के तहत कर्मचारियों को उनके घर के नजदीक पहुंचाना है। सरकार के द्वारा कर्मचारियों को उनके घर के पास में न पहुंचा कर इसके विपरीत दुगुनी दूरी पर पहुंचाने का कार्य किया है। उदाहरण के तौर पर एक रोहतक जिले का कर्मचारी जींद डिपो में कार्यरत था तो उसे चंडीगढ़, यमुनानगर भेजा गया है। कोई झज्जर या गुरुग्राम का कर्मचारी अगर गुरुग्राम डिपो में कार्यरत था तो उसे सिरसा, यमुनानगर भेजा गया है।
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डिपो के राज्य महासचिव अमित महराना ने बताया कि परिवहन विभाग में 828 परिचालक, 883 चालक व 130 लिपिकों की ऑनलाइन ट्रांसफर की गई है। जिसमें रोहतक डिपो से सर्वाधिक 205 कर्मचारियों की ट्रांसफर की गई। जिनमें से 106 परिचालक, 94 ड्राइवर व 5 लिपिक हैं। इस ट्रांसफर पॉलिसी में न तो कर्मचारियों से मनपसंद डिपो की च्वाइस ली गई, न ही क्रॉनिक कर्मचारियों को कोई छूट दी गई न ही कोई कपल केस में छूट दी गई है, न ही नौकरी के अंतिम वर्ष में कार्य कर रहे कर्मचारियों को छूट दी गई है। अगर परिवहन विभाग ने ऑनलाइन पॉलिसी के तहत ट्रांसफर करनी भी थी तो कम से कम मार्च के महीने में करनी चाहिए थी। अब सभी कर्मचारियों के बच्चों के एडमिशन स्कूल व कॉलेजों में हो चुके हैं।
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डिपो प्रधान सुरेश नेहरा ने बताया कि परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा बार-बार न्यूज पेपरों के माध्यम से बयान जारी कर रहे थे कि हमारा उद्देश्य ऑनलाइन पॉलिसी के तहत कर्मचारियों को उनके घर के नजदीक पहुंचाना है। सरकार के द्वारा कर्मचारियों को उनके घर के पास में न पहुंचा कर इसके विपरीत दुगुनी दूरी पर पहुंचाने का कार्य किया है। उदाहरण के तौर पर एक रोहतक जिले का कर्मचारी जींद डिपो में कार्यरत था तो उसे चंडीगढ़, यमुनानगर भेजा गया है। कोई झज्जर या गुरुग्राम का कर्मचारी अगर गुरुग्राम डिपो में कार्यरत था तो उसे सिरसा, यमुनानगर भेजा गया है।
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