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ऑल सेंट जेवियर चर्च में 154 सालों बाद नहीं होगी कैरोल सिंगिंग

Mon, 14 Dec 2020 10:17 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 14 Dec 2020 10:17 PM IST
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Carole singing in All St Xavier Church after 154 years
रोहतक। शहर में इस वर्ष क्रिसमस पर कैरोल ग्रुप कैरोल गायन का आयोजन नहीं करेंगे। हर वर्ष कैरोल गायन कर प्रभु यीशु मसीह के गुणगान किए जाते थे। प्रभु के आगमन की सूचना देने के लिए ईसाई परिवार एक दूसरे के घर कैरोल गायन करते हुए जाते थे। कोरोना के चलते सदियों से चली आ रही कैरोल गायन की परंपरा टूट रही है। शहर की चर्च कमेटी ने इस वर्ष क्रिसमस पर सामाजिक कार्यक्रम न करने का फैसला लिया है। इस वर्ष क्रिसमस को मनाने के लिए केवल चर्चों को अंदर से सजाया जाएगा। लेकिन श्रद्धालु चर्च के अंदर आराधना के लिए नहीं जा सकेंगे। चर्च के बाहर ही कैंडल जलाकर आराधना कर सकेंगे। शहर में कई ईसाई परिवार हैं। जो इस बार क्रिसमस पर घरों में ही खास आयोजन करेंगे।
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154 साल में पहली बार नहीं होगी कैरोल सिंगिंग और नाइट
आंबेडकर चौक स्थित शहर के सबसे पुराने चर्च ऑल सेंट चर्च के फादर वरुण अल्फ्रेड ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण चर्च में किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं होगा। 154 वर्षों के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब कैरोल सिंगिंग और नाइट का आयोजन नहीं किया जाएगा। क्रिसमस पर चर्चों में चरनी और क्रिसमस ट्री सजाने की परंपरा है, वह जरूर निभाई जाएगी।
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घंटे की प्रार्थना में शामिल होंगे चर्च के सदस्य
बजरंग भवन के नजदीक स्थित कैथोलिक चर्च के फादर सुनील ने बताया कि कैरोल गायन के लिए बहुत से लोग एकत्रित होते हैं। प्रशासन की गाइडलाइंस को मानते हुए इस बार कैरोल सिंगिंग का आयोजन नहीं कर रहे। 20 दिसंबर से चर्च की सजावट का काम शुरू हो जाएगा। 23 को शाम को 6 बजे कैरोल नाइट की तरह ही सर्विस होगी। 25 को सुबह 10 सर्विस होगी। इस एक घंटे की प्रार्थना में सिर्फ जिसमें चर्च के मेंबर ही शामिल होंगे।
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क्रिसमस से पहले होता है कैरोल गायन
हमेशा से ही क्रिसमस से पहले कैरोल सिंगिंग की खास परंपरा रही है। ईसाई समाज के सदस्यों के अनुसार ईसाई परिवार एकत्रित हो कर हाथों में कैंडल जलाकर अपने मित्रों और ईसाई समुदायों के घर जाते हैं। और आपस में प्रभु यीशु मसीह के जन्म लेने की सूचना देते हैं। सब एक साथ मिलकर प्रभु के गीत गाए हुए रात में कैरोल सिंगिंग करते हैं।
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दूसरे शहरों से भी आते थे लोग
बिलिवर्स चर्च के फादर इम्मानुएल ने बताया कि क्रिसमस से पहले ही रिश्तेदार दूसरे शहरों से भी आते हैं। और कैरोल गायन से बहुत चाव और श्रद्धा से जुड़ते हैं। ऐसे में संक्रमण बढ़ने का खतरा और भी अधिक हो सकता है। इस बारे में शहर के ईसाई परिवारों से भी मीटिंग की गई थी। उन्होंने ही कैरोल गायन रद करने का विचार रखा। सेहत और सुरक्षा को देखते हुए चर्च के इतिहास में पहली बार क्रिसमस पर कैरोल गायन का आयोजन नहीं होगा।
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संडे स्कूल के कार्यक्रम भी रद
कैरोल के अलावा संडे स्कूल के कार्यक्रम भी रद किए गए हैं। क्रिसमस के मौके पर संडे स्कूल के बच्चे रंगारंग कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे। लेकिन कोरोना वायरस के चलते इस पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। दरअसल, पूरे वर्ष चर्च में संडे स्कूल का आयोजन किया जाता है। इस दौरान बच्चों को गीत-संगीत, प्रभु के जन्म की कहानी और नाटक सिखाया जाता है। संडे स्कूल में बच्चे जो भी सीखते हैं उस वे क्रिसमस के दिन प्रस्तुत करते हैं।

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सालों पुरानी परंपरा टूटेगी, एक रात पहले नाटक का आयोजन नहीं
क्रिसमस से एक रात पहले चर्चों में नाटक का आयोजन होता है। जिसमें प्रभु यीशु मसीह के जन्म का नाटकीय रुपांतरण किया जाता है। लेकिन इस बार नाटक में भाग लेने वाले छोटे - छोटे बच्चों और दर्शकों को भीड़ का ध्यान रखते हुए यह परंपरा टूटेगी। नाटक का आयोजन नहीं किया जाएगा
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