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भाजपा पार्षदों को नगर निगम में आ रही चारा घोटाले की बू 

Mon, 11 Jul 2016 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Mon, 11 Jul 2016 02:10 AM IST
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BJP municipal councilors coming in fodder scam, news of rohtak nigam
निगम की गौशाला - फोटो : demo pic
भाजपा पार्षदों को नगर निगम में चारा घोटाले की बू आने लगी है। उनका आरोप है कि गौवंश के चारे के खर्च में गोलमाल किया गया है। आरोप है कि गौवंश के चारे पर पहले जितना खर्च किया जाता था उतना ही पैसा बाद में नगर निगम की गौशाला खोलने के बाद भी किया गया है। जबकि इस समय तक गौवंश की संख्या कम हो गई थी। यही नहीं निगम की गौशाला में आने के बाद कई गौवंश की मौत हो चुकी थी, फिर भी चारे पर उतना ही खर्च किया गया। चारे पर इतना खर्च करने के बावजूद गौवंश की मौत पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस संबंध में भाजपा पार्षदों ने मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। वह डीसी से मिलकर मामले की शिकायत करने के साथ ही जांच कराने की मांग करेंगे।
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शहर में एक समय लावारिस पशुओं का राज रहता था। सड़कों पर लावारिस गौवंश ही दिखाई देते थे। इस कारण सड़कों पर आये दिन हादसे होते थे। इस कारण नगर निगम की ओर से उनको पकड़ने का अभियान चलाया गया। लेकिन निगम के पास उनको रखने की व्यवस्था नहीं थी, जिससे कुछ गौवंश को अखिल भारतीय गौशाला में रखा गया तो कुछ को जींद बाईपास पर अस्थायी गौशाला में रखा गया। पार्षदों का आरोप है कि निगम ने अपने पास शुरूआत में लगभग 1600 गौवंश होने की बात कही थी, जिनके चारे की जिम्मेदारी निगम के पास थी। लेकिन नगर निगम की पहरावर में गौशाला बनाई गई तो वहां लगभग 900 गौवंश ही रखे गये।
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जिस समय 1600 गौवंश थे, उस समय चारे पर खर्च हुए रुपयों के रिकार्ड के बारे में किसी को जानकारी नहीं है। दिसंबर 2015 से मार्च 2016 तक गौवंश के चारे पर लगभग 34 लाख 72 हजार रुपया खर्च किया गया। उस समय गौवंश की संख्या 900 बताई जाती है। उसके बाद इनमें से 140 गौवंश की जुलाई 2016 तक मौत हो गई, जिनकी शुरूआत 13 अप्रैल से हुई थी। जबकि निगम ने अप्रैल से जुलाई की शुरूआत तक गौवंश के चारे पर लगभग 38 लाख रुपये का खर्च दिखाया है। पार्षदों ने सवाल उठाया है कि जब पहले ज्यादा गौवंश होने के बावजूद 34 लाख 72 हजार रुपये खर्च हुए तो उतने ही समय में कम गौवंश होने के बावजूद 38 लाख कैसे खर्च हो गए?
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यही नहीं, इतना रुपया खर्च करने के बावजूद गौवंश की हालत काफी दयनीय रही और वह मरते रहे। अधिकतर गौवंश काफी कमजोर होकर मरे हैं जो पार्षदों के निरीक्षण के दौरान पता चला है। चारे पर मोटा पैसा खर्च होने के बावजूद गौवंश की मौत के बाद पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। पार्षद गौवंश की देखरेख की जिम्मेदारी निभा रहे अधिकारियों के खिलाफ जांच कराने के लिए डीसी से मिलेंगे। जबकि अधिकारियों की माने तो ऐसा कोई रिकार्ड नहीं था, जिससे गौवंश की गिनती हो सके और गौवंश को पकड़कर बिना गिनती के रखा जाता था। 
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गौवंश के चारे पर मोटा रुपया खर्च किया गया है, इसके बावजूद गौवंश को भरपेट चारा नहीं मिला। इस कारण कमजोर होकर उनकी मौत होती रही। आखिर किस तरह से गौवंश के चारे पर रुपया खर्च किया गया है। इसका पता लगाने के लिए डीसी से मिलकर जांच की मांग की जाएगी, जिससे सच्चाई सामने आ सके। 
- अशोक खुराना, भाजपा पार्षद नगर निगम 
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गौशाला में हालात ज्यादा खराब थे। भाजपा के पार्षदों ने मामले को उठाया, जिसके बाद अधिकारी हरकत में आये। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतना रुपया खर्च हो गया उसके बावजूद गौवंश को बचाने के साथ ही हालात क्यों नहीं सुधर सके। इसके लिए अधिकारियों से मिलकर जांच की मांग की जाएगी। 

- पूनम किलोई, भाजपा पार्षद नगर निगम
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नगर निगम के पास पहले का कोई ऐसा रिकार्ड नहीं है, जिससे यह बताया जा सके कि कितने गौवंश की जिम्मेदारी निगम के पास थी। अब गौशाला से जितने भी गौवंश को अखिल भारतीय गौशाला में भेजा जाएगा, उनकी वीडियोग्राफी कराई जाएगी, जिससे रिकार्ड तैयार हो सके। 
- अजय चोपड़ा, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम
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