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Rohtak News: 52 हजार बीघा जमीन पर 600 साल पहले दादरी से आए फोगाटों ने बसाया था भालौठ गांव
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01-रोहतक के भालौठ में सोनीपत रोड पर बना प्रवेश द्वार। संवाद
रोहित राठौर
रोहतक। लोक आस्था के केंद्र के रूप में पहचान रखने वाला भालौठ गांव आज भी अपनी 600 साल पुरानी विरासत को संजोए हुए है। शहर से 10 किलोमीटर दूर सोनीपत रोड पर स्थित भालौठ गांव न केवल अपनी बसावट की कहानी के लिए खास है, बल्कि धार्मिक और सामाजिक ताने-बाने की वजह से भी पूरे जिले में अलग पहचान रखता है।
गांव के बुजुर्गों के अनुसार, करीब छह शताब्दी पहले भाल सिंह ने इस गांव को बसाया। उन्हीं के नाम पर गांव का नाम भालौठ पड़ा। दादरी क्षेत्र से आए फोगाट गोत्र के लोगों ने यहां रिहायश बनाई और चार पानों में गांव को व्यवस्थित तरीके से बसाया।
पूर्व सरपंच बलजीत सिंह बताते हैं कि शुरुआती दौर में भालौठ 52 हजार बीघा जमीन पर फैला हुआ था। आज भी यह फोगाट गोत्र बहुल गांव है। उन्होंने कहा कि आपसी भाईचारे और एकजुटता के लिए यह गांव पूरे इलाके में मिसाल माना जाता है।
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सुरेश फोगाट का कहना है कि भालौठ की पहचान सिर्फ ऐतिहासिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक भी है। गांव में महाराज जमनादास की तपोस्थली है। मान्यता है कि महाराज जमनादास ने यहीं वर्षों तक कठोर तपस्या और पूजा की थी।
उनके तप के प्रभाव से ही गांव में सुख-समृद्धि आई। उन्हीं की स्मृति में हर साल चैत्र माह में होली के ठीक आठ दिन बाद यहां विशाल मेला लगता है। मेले में कुश्ती दंगल मुख्य आकर्षण होता है। दूर-दराज से आए नामी पहलवान यहां जोर आजमाते हैं। संवाद
1967 में विधानसभा चुनाव में महंत श्रेयोनाथ ने रणबीर सिंह हुड्डा को हराया था
ग्रामीण सुखविंद्र, राजेश व सुरेश बताते हैं कि गांव में किलोई और रुड़की सड़क के बीच बणी होती थी। यहां बाला वाला कल्लर नाथ संप्रदाय के लिए काफी चर्चित रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि बाबा मस्तनाथ मठ के महंत श्रेयोनाथ और महंत चांद नाथ यहां पूजा अर्चना के लिए आ चुके हैं। महंत श्रेयोनाथ 1967 में एमएलए के चुनाव में खड़े हुए थे। चुनाव प्रचार के दौरान यहीं पर मत्था टेककर गांव में संबोधित करने गए थे। उस दौरान उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा को हराया था।
ग्रामीण बोले- चंदा देकर राजकीय स्कूल तैयार करने वाला हमारा गांव पहला
वर्तमान में भालौठ गांव की आबादी 8000 से अधिक हो चुकी है जबकि मतदाताओं की संख्या 6200 है। गांव को 600 साल पहले भाल सिंह ने बसाया था। -बलजीत सिंह, पूर्व सरपंच, भालौठ।
गांव में राजकीय स्कूलों को ग्रामीणों ने चंदा देकर तैयार किया था। बताते हैं कि प्रदेश में कहीं भी ऐसी संरचना के राजकीय विद्यालय नहीं थे। गांव में पशुओं के लिए भी अस्पताल है। -सुरेश फोगाट, भालौठ।
गांव में शिव मंदिर और महाराज जमनादास मंदिर प्रमुख आस्था के केंद्र हैं। गांव की स्थापना के समय दादरी के आए लोगों से मानी जाती है। हमारी 8वीं पीढ़ी मानी जाती है। -बन्नी सिंह फोगाट, भालौठ।
गांव में चार पाने हैं। अब इनके समूह बंट गए हैं। गांव में अनेक गोत्रों के लोग रहते हैं। भाईचारा अभी तक कायम है। अंग्रेजों के समय चौधरी लाल चंद का परिवार कामकाज व सेवा में प्रसिद्ध रहा है। -रामचंद्र फोगाट, भालौठ।
पिछले कुछ सालों में शिक्षा को लेकर भी जागरूकता बढ़ी है। गांव के युवा सेना, पुलिस और अन्य सरकारी सेवाओं में जाकर गांव का नाम रोशन कर रहे हैं। -रणबीर सिंह, सेवानिवृत्त आईटीआई प्राचार्य।
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रोहतक। लोक आस्था के केंद्र के रूप में पहचान रखने वाला भालौठ गांव आज भी अपनी 600 साल पुरानी विरासत को संजोए हुए है। शहर से 10 किलोमीटर दूर सोनीपत रोड पर स्थित भालौठ गांव न केवल अपनी बसावट की कहानी के लिए खास है, बल्कि धार्मिक और सामाजिक ताने-बाने की वजह से भी पूरे जिले में अलग पहचान रखता है।
गांव के बुजुर्गों के अनुसार, करीब छह शताब्दी पहले भाल सिंह ने इस गांव को बसाया। उन्हीं के नाम पर गांव का नाम भालौठ पड़ा। दादरी क्षेत्र से आए फोगाट गोत्र के लोगों ने यहां रिहायश बनाई और चार पानों में गांव को व्यवस्थित तरीके से बसाया।
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पूर्व सरपंच बलजीत सिंह बताते हैं कि शुरुआती दौर में भालौठ 52 हजार बीघा जमीन पर फैला हुआ था। आज भी यह फोगाट गोत्र बहुल गांव है। उन्होंने कहा कि आपसी भाईचारे और एकजुटता के लिए यह गांव पूरे इलाके में मिसाल माना जाता है।
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सुरेश फोगाट का कहना है कि भालौठ की पहचान सिर्फ ऐतिहासिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक भी है। गांव में महाराज जमनादास की तपोस्थली है। मान्यता है कि महाराज जमनादास ने यहीं वर्षों तक कठोर तपस्या और पूजा की थी।
उनके तप के प्रभाव से ही गांव में सुख-समृद्धि आई। उन्हीं की स्मृति में हर साल चैत्र माह में होली के ठीक आठ दिन बाद यहां विशाल मेला लगता है। मेले में कुश्ती दंगल मुख्य आकर्षण होता है। दूर-दराज से आए नामी पहलवान यहां जोर आजमाते हैं। संवाद
1967 में विधानसभा चुनाव में महंत श्रेयोनाथ ने रणबीर सिंह हुड्डा को हराया था
ग्रामीण सुखविंद्र, राजेश व सुरेश बताते हैं कि गांव में किलोई और रुड़की सड़क के बीच बणी होती थी। यहां बाला वाला कल्लर नाथ संप्रदाय के लिए काफी चर्चित रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि बाबा मस्तनाथ मठ के महंत श्रेयोनाथ और महंत चांद नाथ यहां पूजा अर्चना के लिए आ चुके हैं। महंत श्रेयोनाथ 1967 में एमएलए के चुनाव में खड़े हुए थे। चुनाव प्रचार के दौरान यहीं पर मत्था टेककर गांव में संबोधित करने गए थे। उस दौरान उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा को हराया था।
ग्रामीण बोले- चंदा देकर राजकीय स्कूल तैयार करने वाला हमारा गांव पहला
वर्तमान में भालौठ गांव की आबादी 8000 से अधिक हो चुकी है जबकि मतदाताओं की संख्या 6200 है। गांव को 600 साल पहले भाल सिंह ने बसाया था। -बलजीत सिंह, पूर्व सरपंच, भालौठ।
गांव में राजकीय स्कूलों को ग्रामीणों ने चंदा देकर तैयार किया था। बताते हैं कि प्रदेश में कहीं भी ऐसी संरचना के राजकीय विद्यालय नहीं थे। गांव में पशुओं के लिए भी अस्पताल है। -सुरेश फोगाट, भालौठ।
गांव में शिव मंदिर और महाराज जमनादास मंदिर प्रमुख आस्था के केंद्र हैं। गांव की स्थापना के समय दादरी के आए लोगों से मानी जाती है। हमारी 8वीं पीढ़ी मानी जाती है। -बन्नी सिंह फोगाट, भालौठ।
गांव में चार पाने हैं। अब इनके समूह बंट गए हैं। गांव में अनेक गोत्रों के लोग रहते हैं। भाईचारा अभी तक कायम है। अंग्रेजों के समय चौधरी लाल चंद का परिवार कामकाज व सेवा में प्रसिद्ध रहा है। -रामचंद्र फोगाट, भालौठ।
पिछले कुछ सालों में शिक्षा को लेकर भी जागरूकता बढ़ी है। गांव के युवा सेना, पुलिस और अन्य सरकारी सेवाओं में जाकर गांव का नाम रोशन कर रहे हैं। -रणबीर सिंह, सेवानिवृत्त आईटीआई प्राचार्य।

01-रोहतक के भालौठ में सोनीपत रोड पर बना प्रवेश द्वार। संवाद

01-रोहतक के भालौठ में सोनीपत रोड पर बना प्रवेश द्वार। संवाद

01-रोहतक के भालौठ में सोनीपत रोड पर बना प्रवेश द्वार। संवाद

01-रोहतक के भालौठ में सोनीपत रोड पर बना प्रवेश द्वार। संवाद

01-रोहतक के भालौठ में सोनीपत रोड पर बना प्रवेश द्वार। संवाद

01-रोहतक के भालौठ में सोनीपत रोड पर बना प्रवेश द्वार। संवाद

01-रोहतक के भालौठ में सोनीपत रोड पर बना प्रवेश द्वार। संवाद