{"_id":"60a7f82e8ebc3ebb1b265f8b","slug":"bank-hands-over-17-thousand-rupees-coins-refusing-to-withdraw-as-promised-rohtak-news-rtk6094848167","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैंक ने थमा दिए 17 हजार रुपये के सिक्के, वादे के अनुसार वापस लेने से कर रहे मना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैंक ने थमा दिए 17 हजार रुपये के सिक्के, वादे के अनुसार वापस लेने से कर रहे मना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महात्मा गांधी रोड पर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा बैंक शाखा का एक अजीब कारनामा सामने आया है। बैंक द्वारा एक किसान उपभोक्ता को करीब एक लाख रुपये की पेमेंट में 17 हजार रुपये के दस-दस के सिक्के थमा दिए गए।
गांव मलार निवासी किसान वजीर ने बताया कि उसकी फसल की पेमेंट खाते में आई थी। वह तीन दिन पहले रुपये निकालने के लिए बैंक में आया था। मैनेजर और कैशियर ने कहा कि उनके पास पैसे नहीं हैं। अगर उसे चाहिए तो उसे दस-दस रुपये के कुछ सिक्कों को लेना पड़ेगा। जब उसने कहा कि वह इन सिक्कों का क्या करेगा, तो बैंक के अधिकारियों ने उसे आश्वासन दिया कि वह इन सिक्कों को ले जाकर चलाने का प्रयास करें। अगर सिक्के नहीं चलते हैं तो वह बैंक में आकर जमा करवा दे। अधिकारियों के आश्वासन के बाद वह सिक्कों का थैला ले गया। वजीर ने बताया कि उसने इन सिक्कों को चलाने का काफी प्रयास किया, लेकिन किसी ने भी नहीं लिया। वह वीरवार को सिक्कों का थैला लेकर बैंक में जमा करवाने के लिए आया तो जमा करने से मना कर दिया गया। वजीर ने कहा कि उसे हर रोज एक हजार की राशि के सिक्के जमा करवाने होंगे। पूरे देश में कोरोना महामारी का भयंकर दौर चला हुआ है और सरकार की ओर से लॉकडाउन लगाया गया है। केवल अति आवश्यक होने पर ही गांव से शहर आना होता है। उसका गांव सफीदों से करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर है। ऐसी स्थिति में वह एक हजार रुपये के सिक्के लेकर हर रोज बैंक में कैसे आएगा। अगर वह यह कार्य करता भी है तो उसे इन 17 हजार रुपयों के लिए 17 दिन बैंक में आना पड़ेगा।
वजीर ने कहा कि उसने बैंक अधिकारियों से काफी मिन्नतें की, लेकिन उसकी एक न सुनी गई और 17 हजार रुपये के सिक्के एक साथ जमा करवाने पर ज्यादा चार्ज काटने की बात कही गई। इस मामले में बैंक अधिकारियों ने बात करने से मना कर दिया। एलडीएम राकेश वर्मा ने कहा कि अगर बैंक में नई नकदी उपलब्ध नहीं हो तो उपभोक्ता अगले दिन जाकर नई नकदी ले सकता है। उपभोक्ता को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
गांव मलार निवासी किसान वजीर ने बताया कि उसकी फसल की पेमेंट खाते में आई थी। वह तीन दिन पहले रुपये निकालने के लिए बैंक में आया था। मैनेजर और कैशियर ने कहा कि उनके पास पैसे नहीं हैं। अगर उसे चाहिए तो उसे दस-दस रुपये के कुछ सिक्कों को लेना पड़ेगा। जब उसने कहा कि वह इन सिक्कों का क्या करेगा, तो बैंक के अधिकारियों ने उसे आश्वासन दिया कि वह इन सिक्कों को ले जाकर चलाने का प्रयास करें। अगर सिक्के नहीं चलते हैं तो वह बैंक में आकर जमा करवा दे। अधिकारियों के आश्वासन के बाद वह सिक्कों का थैला ले गया। वजीर ने बताया कि उसने इन सिक्कों को चलाने का काफी प्रयास किया, लेकिन किसी ने भी नहीं लिया। वह वीरवार को सिक्कों का थैला लेकर बैंक में जमा करवाने के लिए आया तो जमा करने से मना कर दिया गया। वजीर ने कहा कि उसे हर रोज एक हजार की राशि के सिक्के जमा करवाने होंगे। पूरे देश में कोरोना महामारी का भयंकर दौर चला हुआ है और सरकार की ओर से लॉकडाउन लगाया गया है। केवल अति आवश्यक होने पर ही गांव से शहर आना होता है। उसका गांव सफीदों से करीब 10 से 12 किलोमीटर दूर है। ऐसी स्थिति में वह एक हजार रुपये के सिक्के लेकर हर रोज बैंक में कैसे आएगा। अगर वह यह कार्य करता भी है तो उसे इन 17 हजार रुपयों के लिए 17 दिन बैंक में आना पड़ेगा।
विज्ञापन
वजीर ने कहा कि उसने बैंक अधिकारियों से काफी मिन्नतें की, लेकिन उसकी एक न सुनी गई और 17 हजार रुपये के सिक्के एक साथ जमा करवाने पर ज्यादा चार्ज काटने की बात कही गई। इस मामले में बैंक अधिकारियों ने बात करने से मना कर दिया। एलडीएम राकेश वर्मा ने कहा कि अगर बैंक में नई नकदी उपलब्ध नहीं हो तो उपभोक्ता अगले दिन जाकर नई नकदी ले सकता है। उपभोक्ता को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
विज्ञापन