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मजाक बन रही केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना

Sat, 14 Sep 2019 02:21 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2019 02:21 AM IST
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Ayushman Bharat' scheme of central government being mocked in PGIMS
आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को स्वास्थ्य लाभ देने के हिसाब से केंद्र सरकार की ओर से चलाई गई आयुष्मान भारत योजना सूबे के सबसे बडे़ चिकित्सा संस्थान में मजाक बन कर रह गई है। आयुष्मान भारत के काउंटर पर आने वाले मरीजों को यहां का तैनात स्टाफ उनका दर्द पूछने की बजाए अस्पताल का ही दर्द बताने में अधिक प्रयासरत रहता है। मरीजों को समझाया जाता है कि उन्हें बजट के आने का एक सप्ताह इंतजार करना होगा। ऐसे में मरीज उखड़ कर अपनी जेब से ही उपचार करवाने के लिए मजबूर हो जाता है।
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पीजीआईएमएस में आयुष्मान भारत के स्टाफ की ओर से बताया जाता है कि लाभ पात्र को स्वास्थ्य विभाग की अप्रूवल मिलने के बाद पीजीआईएमएस के डॉक्टरों का बोर्ड तय करता है कि कितना खर्च आएगा। इसके बाद दवा का एस्टीमेट बना कर दवा खरीदी जाती है। दवा खरीदने के बाद वह स्टोर में जाती है और फिर वार्ड में। इसके बाद मरीज का उपचार शुरू होता है। इन सभी प्रक्रिया में लगभग एक सप्ताह का समय लग सकता है। इसलिए मरीज को एक सप्ताह इंतजार करना होगा।
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हैरानी भरा ही सही लेकिन सत्य है कि पीजीआईएमएस में प्रदेश के अलावा आसपास के राज्यों से भी मरीज उपचार के लिए आते हैं। यही वजह है कि संस्थान में प्रतिदिन सात से आठ हजार मरीजों की संख्या उपचार पाती है। पिछले एक साल में आयुष्मान भारत योजना के लाभ पात्रों की बात करें तो महज 700 मरीजों का पंजीकरण हुआ है। इसमें से 353 लाभ पात्रों का ही उपचार पूरा हुआ है और उनका बिल क्लेम हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रदेश के सबसे बडे़ अस्पताल में मरीज आते नहीं या आना पसंद नहीं करते। क्योंकि अकेले जिला अस्पताल रोहतक की बात करें तो यहां एक साल में 363 लाभ पात्रों का पंजीकरण हुआ और 350 का बिल क्लेम हुआ। हाल ही में आयुष्मान भारत योजना की स्थिति का जायजा लेने पहुंची टीम ने भी इस आंकडे़ पर सवाल उठाया और संस्थान में कम मरीजों के पंजीकरण का कारण पूछा था।
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जिला नोडल अधिकारी का जवाब
आयुष्मान भारत के जिला नोडल अधिकारी डॉ. दिनेश गर्ग बताते हैं कि लाभ पात्र का पंजीकरण होने और डॉक्टर की ओर से बीमारी का डायग्नोस होने के बाद उसे अप्रूवल के लिए बोर्ड के पास भेज दिया जाता है। इसकी जल्द अप्रूवल आ जाती है और संबंधित अस्पताल को उपचार करने की अनुमति मिल जाती है। उपचार के बाद सारी डिटेल भेजने पर बिल पास हो जाता है। मरीज को बोर्ड से अनुमति मिलने के बाद संबंधित अस्पताल की जिम्मेदारी होती है वह उसका उपचार करे। मरीज के आने के बाद बोर्ड गठित होना और दवा का खरीदा जाना समझ से परे हैं। ऐसी ही शिकायतों को लेकर पीजीआईएमएस को पत्र लिखे गए हैं। सीएम विंडो से भी इनकी शिकायत आती हैं। इसके लिए विभाग के शीर्ष अधिकारियों को बता दिया गया है।

लाभ पात्राें को समस्या है तो यहां करें संपर्क
टोल फ्री नंबर
14555
1800-111-565
ई-मेल
विजिटदिनेशफोरयूएटजीमेलडाटकाम
एचआरवाईडीआईएमआरटीकेएटजीमेलडाटकाम
पांच घंटा रहा सर्वर डाउन, लाभ पात्र रहे परेशान
शुक्रवार आयुष्मान भारत का मुख्य सर्वर लगभग पांच घंटा डाउन रहा, इसके चलते गोल्डन कार्ड बनवाने व अन्य कार्यों के लिए पात्रों को परेशान होना पड़ा। दिन में सिर्फ आपात विभाग में आने वाले मरीजों का डॉटा खंगाल कर देखा जा सका कि वह लाभ पात्र हैं या नहीं। गौरतलब है कि पीजीआईएमएस के आपात कालीन विभाग में आने वाले सभी मरीजों को उनका डॉटा जांच करवाने के लिए आयुष्मान भारत के काउंटर पर भेजा जाता है। यदि उनका नाम सूची में होता है तो उन्हें सुविधा दे दी जाती है।
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