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कोरोना की चौथी लहर के साथ एडिनो वायरस के संक्रमण से भी बचाएगी जागरूकता
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डॉ. रमेश वर्मा।
- फोटो : RohtakCity
कोरोना की चौथी लहर के साथ एडिनो वायरस के संक्रमण से भी अब जागरूकता के माध्यम से बचा जा सकता है। एक तरफ कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का नया रूप एक्सई खतरा बना हुआ है। दूसरी तरफ एडिनो वायरस का संक्रमण विदेशों में समस्या का बड़ा कारण बना है। यूरोप के 11 देशों और अमेरिका में एडिनो वायरस बच्चों के लिए खतरनाक बना हुआ है। हालांकि इन सबसे बचने के लिए मास्क, साफ-सफाई को ही मुख्य आधार माना जा रहा है।
यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन, उत्तरी आयरलैंड, स्पेन, इजराइल, संयुक्त राज्य अमेरिका, डेनमार्क, आयरलैंड, नीदरलैंड्स, इटली, नार्वे, फ्रांस, रोमानिया और बेल्जियम में मिले एडिनो वायरस के मामलों ने देश-प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। पीजीआईएमएस में गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट विभागाध्यक्ष सीनियर प्रोफेसर डॉ. प्रवीण मल्होत्रा बताते हैं कि एडिनो वायरस नया नहीं है। यह सालों से है, बस इस बार इसके गंभीर परिणाम देखने के लिए मिल रहे हैं। हालांकि देश-प्रदेश में इसका केस नहीं मिला है। पेट दर्द, पीलिया जैसी समस्या के साथ यह लीवर ट्रांसप्लांट तक ले जा रहा है। यह गले से ही शरीर के अंदर जाता है। इसलिए मास्क व साफ-सफाई का ध्यान रखें। इससे कोरोना व एडिनो वायरस दोनों से बचा जा सकता है। कोरोना व एडिनो वायरस के फैलने का लगभग एक जैसा तरीका है। इस समय पीजीआईएमएस में जो पीलिया के मरीज आ रहे हैं, उनका खास ध्यान रखा जा रहा है। जो मरीज समय पर रिकवर नहीं होते उन पर नजर रखनी जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि घर का खाना खाएं, हाथ अच्छे से धोएं, शौच के बाद हाथों को साबुन से साफ करें, नाखून बड़े न रखें और खास समस्या होने पर सही डॉक्टर से ही उपचार लें। इससे पहले तो हम संक्रमित होने से बचें और किसी कारण यदि संक्रमित होते हैं तो गंभीर स्थिति में जाने से बचें।
हमारे यहां एडिनो, इन्फ्लूएंजा संक्रमण सामान्य है। यहां मौसम बदलता रहता है, इसलिए सामान्य खांसी, जुकाम, गला खराब होना और दूषित पेयजल व स्वच्छता के अभाव में पीलिया जैसी समस्या होती रहती है। यदि किसी मरीज की समय पर रिकवरी नहीं होती तो उसका ध्यान रखा जाता है। फिलहाल ऐसी कोई समस्या नहीं है। यदि एडिनो वायरस के लक्षणों में बड़ा बदलाव आता है तो उसकी भी जांच कराई जाएगी। -डॉ. एचके अग्रवाल, वरिष्ठ फिजिशियन एवं रजिस्ट्रार, यूएचएसआर
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एडिनो वायरस सांस व मुंह से शरीर में जाता है। यह हमारे देश में सामान्य है। इसलिए यहां पहले ही सबमें एंटीबॉडी बनी हैं। इससे बच्चों में दस्त, उल्टी व बुखार जैसी समस्या होती है। इसके जो गंभीर मामले सामने आए हैं वह ग्रेट ब्रिटेन, यूके, स्पैन, इजराइल, यूएसए, डेनमार्क, आयरलैंड, नीदरलैंड, नार्वे, फ्रांस हैं। यहां जिनको पीलिया हो रहा है, उनको हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, ई नहीं मिल रहा है। मरीजों के स्टूल में एडिनो वायरस मिल रहा है। हमारे देश में इससे घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूक होकर साफ-सफाई व मास्क की जरूरत है। यह एक से 16 साल के बीच की आयु में देखा गया है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन नहीं है। डॉ. रमेश वर्मा, प्रोफेसर, कम्यूनिटी मेडिसिन एवं कोवाक्सीन रिसर्च टीम के सदस्य, पीजीआईएमएस
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यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन, उत्तरी आयरलैंड, स्पेन, इजराइल, संयुक्त राज्य अमेरिका, डेनमार्क, आयरलैंड, नीदरलैंड्स, इटली, नार्वे, फ्रांस, रोमानिया और बेल्जियम में मिले एडिनो वायरस के मामलों ने देश-प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। पीजीआईएमएस में गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट विभागाध्यक्ष सीनियर प्रोफेसर डॉ. प्रवीण मल्होत्रा बताते हैं कि एडिनो वायरस नया नहीं है। यह सालों से है, बस इस बार इसके गंभीर परिणाम देखने के लिए मिल रहे हैं। हालांकि देश-प्रदेश में इसका केस नहीं मिला है। पेट दर्द, पीलिया जैसी समस्या के साथ यह लीवर ट्रांसप्लांट तक ले जा रहा है। यह गले से ही शरीर के अंदर जाता है। इसलिए मास्क व साफ-सफाई का ध्यान रखें। इससे कोरोना व एडिनो वायरस दोनों से बचा जा सकता है। कोरोना व एडिनो वायरस के फैलने का लगभग एक जैसा तरीका है। इस समय पीजीआईएमएस में जो पीलिया के मरीज आ रहे हैं, उनका खास ध्यान रखा जा रहा है। जो मरीज समय पर रिकवर नहीं होते उन पर नजर रखनी जरूरी है। इसके लिए जरूरी है कि घर का खाना खाएं, हाथ अच्छे से धोएं, शौच के बाद हाथों को साबुन से साफ करें, नाखून बड़े न रखें और खास समस्या होने पर सही डॉक्टर से ही उपचार लें। इससे पहले तो हम संक्रमित होने से बचें और किसी कारण यदि संक्रमित होते हैं तो गंभीर स्थिति में जाने से बचें।
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हमारे यहां एडिनो, इन्फ्लूएंजा संक्रमण सामान्य है। यहां मौसम बदलता रहता है, इसलिए सामान्य खांसी, जुकाम, गला खराब होना और दूषित पेयजल व स्वच्छता के अभाव में पीलिया जैसी समस्या होती रहती है। यदि किसी मरीज की समय पर रिकवरी नहीं होती तो उसका ध्यान रखा जाता है। फिलहाल ऐसी कोई समस्या नहीं है। यदि एडिनो वायरस के लक्षणों में बड़ा बदलाव आता है तो उसकी भी जांच कराई जाएगी। -डॉ. एचके अग्रवाल, वरिष्ठ फिजिशियन एवं रजिस्ट्रार, यूएचएसआर
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एडिनो वायरस सांस व मुंह से शरीर में जाता है। यह हमारे देश में सामान्य है। इसलिए यहां पहले ही सबमें एंटीबॉडी बनी हैं। इससे बच्चों में दस्त, उल्टी व बुखार जैसी समस्या होती है। इसके जो गंभीर मामले सामने आए हैं वह ग्रेट ब्रिटेन, यूके, स्पैन, इजराइल, यूएसए, डेनमार्क, आयरलैंड, नीदरलैंड, नार्वे, फ्रांस हैं। यहां जिनको पीलिया हो रहा है, उनको हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, ई नहीं मिल रहा है। मरीजों के स्टूल में एडिनो वायरस मिल रहा है। हमारे देश में इससे घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूक होकर साफ-सफाई व मास्क की जरूरत है। यह एक से 16 साल के बीच की आयु में देखा गया है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन नहीं है। डॉ. रमेश वर्मा, प्रोफेसर, कम्यूनिटी मेडिसिन एवं कोवाक्सीन रिसर्च टीम के सदस्य, पीजीआईएमएस

डॉ. एचके अग्रवाल - फोटो : RohtakCity

डॉ. प्रवीन मल्होत्रा।- फोटो : RohtakCity