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सारी फसलें हुईं बर्बाद, मुआवजे की नहीं आस
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इस साल फसलों पर मौसम का कहर टूटा है। धान, कपास और बाजरा का बारिश और जलभराव ने काफी नुकसान किया। कपास और धान पर बाद में कीटों का हमला हो गया। इतने ज्यादा नुकसान के बाद भी किसानों को मुआवजे की कोई आस नहीं है।
बहुत से किसानों ने प्रधानमंत्री फसल योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा करवाया है। लेकिन जलभराव से धान को नुकसान को योजना से बाहर कर दिया गया है। ऐसे में जलभराव से नुकसान होने पर किसानों को कोई मुआवजा नहीं मिलेगी। इसके बाद धान की फसल पर हॉपर का हमला हो गया। कीट और बीमारियों से फसल को नुकसान भी बीमा योजना में कवर नहीं है। इसलिए कीट के हमले पर भी किसानों को बीमा योजना के तहत कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। आखिरी चरण में तेज हवाओं और बारिश से धान की फसल बिछ गई। अगर बिछी हुई फसल पर हॉपर लगा है तो वह ठीक नहीं हो सकती, वह पूरी तरह खत्म हो जाएगी। उस स्थिति में किसानों को कुछ नहीं मिलेगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों का बीमा न करवाने वाले किसानों के लिए सरकार ने स्पेशल गिरदावरी के आदेश जारी किए हैं। जिला प्रशासन का दावा है कि सभी फसलों की स्पेशल गिरदावरी शुरू कर दी गई है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि अभी तक धान के आदेश नहीं आए हैं। सिर्फ बाजरा और कपास की स्पेशल गिरदावरी के आदेश जारी किए गए हैं। स्पेशल गिरदावरी में जलभराव से नुकसान तो कवर हो जाएगा। लेकिन कीटों और बीमारियों से फसलें खराब होने पर कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। धान पर हॉपर के हमले से हुआ नुकसान स्पेशल गिरदावरी में भी कवर नहीं होगा। इसी तरह इस बार कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी का हमला हो गया है, जिसने काफी फसल को खराब किया है। लेकिन उन किसानों को भी फसल बीमा योजना या स्पेशल गिरदावरी में कुछ नहीं मिलेगा। खंड कृषि अधिकारी डॉ. यशपाल दहिया ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमारियों और कीटों से हुआ नुकसान कवर नहीं है। स्पेशल गिरदावरी में भी प्राकृतिक आपदा से हुआ नुकसान कवर होता है।
मूंग का पता नहीं चला
राज्य सरकार के निर्देश पर कृषि विभाग ने इस बार दलहन फसलों को प्रोत्साहित करने को अभियान चलाया था। इसके तहत किसानों को मूंग उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया, मुफ्त बीज भी बांटे गए। अभियान की बदौलत मूंग का रकबा बढ़ गया। लेकिन मौसम ने साथ नहीं दिया। बारिश होते ही मूंग गल कर खत्म हो गई। पटवारी जब खेतों का मुआयना करने गए तो मूंग का पता ही नहीं था। लिहाजा उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिख दिया कि खेत खाली है। अब मूंग लगाने वाले किसानों को मेरा पानी, मेरी विरासत योजना के तहत प्रोत्साहन राशि मिलने पर भी संकट है।
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करीब ढाई हजार शिकायतें आईं
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवाने वाले किसानों की अब तक करीब ढाई हजार शिकायतें आई हैं। जिनका कहना है कि बारिश और जलभराव से फसलें बर्बाद हो गईं। रविवार को हुई बारिश के दौरान ही दो दिनों में लगभग 200 शिकायतें आई थीं। जबकि, उससे पहले करीब 2300 शिकायतें आ चुकी थीं।
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बहुत से किसानों ने प्रधानमंत्री फसल योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा करवाया है। लेकिन जलभराव से धान को नुकसान को योजना से बाहर कर दिया गया है। ऐसे में जलभराव से नुकसान होने पर किसानों को कोई मुआवजा नहीं मिलेगी। इसके बाद धान की फसल पर हॉपर का हमला हो गया। कीट और बीमारियों से फसल को नुकसान भी बीमा योजना में कवर नहीं है। इसलिए कीट के हमले पर भी किसानों को बीमा योजना के तहत कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। आखिरी चरण में तेज हवाओं और बारिश से धान की फसल बिछ गई। अगर बिछी हुई फसल पर हॉपर लगा है तो वह ठीक नहीं हो सकती, वह पूरी तरह खत्म हो जाएगी। उस स्थिति में किसानों को कुछ नहीं मिलेगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों का बीमा न करवाने वाले किसानों के लिए सरकार ने स्पेशल गिरदावरी के आदेश जारी किए हैं। जिला प्रशासन का दावा है कि सभी फसलों की स्पेशल गिरदावरी शुरू कर दी गई है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि अभी तक धान के आदेश नहीं आए हैं। सिर्फ बाजरा और कपास की स्पेशल गिरदावरी के आदेश जारी किए गए हैं। स्पेशल गिरदावरी में जलभराव से नुकसान तो कवर हो जाएगा। लेकिन कीटों और बीमारियों से फसलें खराब होने पर कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। धान पर हॉपर के हमले से हुआ नुकसान स्पेशल गिरदावरी में भी कवर नहीं होगा। इसी तरह इस बार कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी का हमला हो गया है, जिसने काफी फसल को खराब किया है। लेकिन उन किसानों को भी फसल बीमा योजना या स्पेशल गिरदावरी में कुछ नहीं मिलेगा। खंड कृषि अधिकारी डॉ. यशपाल दहिया ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमारियों और कीटों से हुआ नुकसान कवर नहीं है। स्पेशल गिरदावरी में भी प्राकृतिक आपदा से हुआ नुकसान कवर होता है।
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मूंग का पता नहीं चला
राज्य सरकार के निर्देश पर कृषि विभाग ने इस बार दलहन फसलों को प्रोत्साहित करने को अभियान चलाया था। इसके तहत किसानों को मूंग उत्पादन के लिए प्रेरित किया गया, मुफ्त बीज भी बांटे गए। अभियान की बदौलत मूंग का रकबा बढ़ गया। लेकिन मौसम ने साथ नहीं दिया। बारिश होते ही मूंग गल कर खत्म हो गई। पटवारी जब खेतों का मुआयना करने गए तो मूंग का पता ही नहीं था। लिहाजा उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिख दिया कि खेत खाली है। अब मूंग लगाने वाले किसानों को मेरा पानी, मेरी विरासत योजना के तहत प्रोत्साहन राशि मिलने पर भी संकट है।
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करीब ढाई हजार शिकायतें आईं
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवाने वाले किसानों की अब तक करीब ढाई हजार शिकायतें आई हैं। जिनका कहना है कि बारिश और जलभराव से फसलें बर्बाद हो गईं। रविवार को हुई बारिश के दौरान ही दो दिनों में लगभग 200 शिकायतें आई थीं। जबकि, उससे पहले करीब 2300 शिकायतें आ चुकी थीं।