{"_id":"677054960bf7ff48500e37d4","slug":"aidso-celebrated-its-71st-foundation-day-rohtak-news-c-17-roh1020-570731-2024-12-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: एआईडीएसओ ने मनाया 71वां स्थापना दिवस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: एआईडीएसओ ने मनाया 71वां स्थापना दिवस
विज्ञापन
रोहतक। छात्र संगठन ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाईजेशन (एआईडीएसओ) ने संगठन का 71वां स्थापना दिवस एमडीयू के एक्टिविटी सेंटर में मनाया। एआईडीएसओ के प्रदेश सचिव उमेश मौर्य ने संगठन के 70 वर्षों के संघर्ष का इतिहास बताते हुए छात्र और शिक्षा आंदोलन के महत्व पर प्रकाश डाला।
एआईडीएसओ के प्रदेश सचिव उमेश मौर्य ने कहा कि शिक्षा, संस्कृति और सभ्यता को बचाने का 70 वर्षों का इतिहास शानदार संघर्षों व गरिमा से परिपूर्ण रहा है। संगठन की स्थापना 28 दिसंबर 1954 को हुई। शिक्षा के क्षेत्र में समस्याओं को संगठन तभी से उठाता आ रहा है। आजादी आंदोलन के क्रांतिकारियों का सपना सबको वैज्ञानिक, धर्मनिरपेक्ष और जनवादी शिक्षा देना आजादी के 77 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हुआ है। अंग्रेजों की तरह ही आजादी के बाद भी सरकारें शिक्षा संकुचन की नीति को तेज करती आ रही हैं। शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता को खत्म किया जा रहा है।
शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण, उच्च शिक्षा, संस्कृति और नीति नैतिकता से परिपूर्ण नागरिक तैयार करने की बजाय शिक्षा का व्यवसायीकरण किया जा रहा है। सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों को बंद करके शिक्षा का निजीकरण किया जा रहा है। हर स्तर पर फीस बढ़ रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करके शिक्षा पर हमला तेज किया जा रहा है। इसलिए हम सबका फर्ज बनता है कि सरकार की छात्र व शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष करें। यही समय की मांग है। इस मौके पर अमरदीप, राजेश, सुमित, जगजीत, सोनू, अंकित, हिमांशु व अन्य छात्र मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
एआईडीएसओ के प्रदेश सचिव उमेश मौर्य ने कहा कि शिक्षा, संस्कृति और सभ्यता को बचाने का 70 वर्षों का इतिहास शानदार संघर्षों व गरिमा से परिपूर्ण रहा है। संगठन की स्थापना 28 दिसंबर 1954 को हुई। शिक्षा के क्षेत्र में समस्याओं को संगठन तभी से उठाता आ रहा है। आजादी आंदोलन के क्रांतिकारियों का सपना सबको वैज्ञानिक, धर्मनिरपेक्ष और जनवादी शिक्षा देना आजादी के 77 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हुआ है। अंग्रेजों की तरह ही आजादी के बाद भी सरकारें शिक्षा संकुचन की नीति को तेज करती आ रही हैं। शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता को खत्म किया जा रहा है।
विज्ञापन
शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण, उच्च शिक्षा, संस्कृति और नीति नैतिकता से परिपूर्ण नागरिक तैयार करने की बजाय शिक्षा का व्यवसायीकरण किया जा रहा है। सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों को बंद करके शिक्षा का निजीकरण किया जा रहा है। हर स्तर पर फीस बढ़ रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करके शिक्षा पर हमला तेज किया जा रहा है। इसलिए हम सबका फर्ज बनता है कि सरकार की छात्र व शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष करें। यही समय की मांग है। इस मौके पर अमरदीप, राजेश, सुमित, जगजीत, सोनू, अंकित, हिमांशु व अन्य छात्र मौजूद रहे।
विज्ञापन