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Rohtak News: इंजीनियरिंग व मेडिकल साइंस को जोड़कर मरीजों के इलाज में नई क्रांति ला सकती है एआई
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पीजीआई रोहतक में नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक द
- फोटो : पुरानी सब्जी मंडी के सामने फुटपाथ पर चढ़ा कैंटर व जांच करते पुरानी सब्जी मंडी थाना प्रभारी सुशील कुमार। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। अब समय बदल रहा है। एआई का जमाना आ गया है। ऐसे में एआई इंजीनियरिंग और मेडिकल साइंस को जोड़कर मरीजों के इलाज में नई क्रांति लाई जा सकती है। इससे मरीजों को सटीक इलाज के साथ जल्दी इलाज की सुविधा भी उपलब्ध होगी। यह कहना है एनएएमएस सेल के स्टेट कन्वीनर डॉ. ध्रुव चौधरी का।
वह वीरवार को पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय और नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली की ओर से आयोजित एक दिवसीय सीएमई कम वर्कशॉप में चिकित्सकों व विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सीएमई के लिए एनएमसी की ओर से चार क्रेडिट घंटे प्रदान किए गए हैं। सीएमई के मुख्य अतिथि उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि नए युग में एआई का महत्व बढ़ गया है। इससे कार्य के लिए योजना बनाने में काफी मदद मिलती है लेकिन यह इंसान की जगह नहीं ले सकता है। विशिष्ट अतिथि एनएएमएस के अध्यक्ष डॉ. दिगंबर बेहरा ने कहा कि बायो टेक्नोलॉजी मरीजों के इलाज में काफी मददगार होती है।
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एनएएमएस सेल हरियाणा की नोडल अधिकारी डॉ. माला कंबोज ने कहा कि वर्कशॉप का उद्देश्य एआई की मेडिकल के क्षेत्र में महता रहा। मेडिकल के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता के बारे में पता होना चाहिए। डॉ. अंजलि अग्रवाल ने रेडियोलॉजी में एआई की महता व एक्स-रे में इसके उपयोग की जानकारी दी।
डॉ. पूजा शर्मा ने डिजिटल हेल्थ, आईआईटी दिल्ली से डॉ. तवप्रीतेश सेठी ने इंजीनियरिंग व मेडिकल को जोड़कर बायोइंजीनियरिंग और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी से अवगत कराया। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. रूपसिंह, डीन डॉ. अशोक चौहान, प्राचार्य डॉ. संजय तिवारी ने स्मृति चिह्न प्रदान कर अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर डॉ. वाईके गुप्ता, डॉ. मंदीप सचदेवा, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. हरनीत सिंह उपस्थित रहे।
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रोहतक। अब समय बदल रहा है। एआई का जमाना आ गया है। ऐसे में एआई इंजीनियरिंग और मेडिकल साइंस को जोड़कर मरीजों के इलाज में नई क्रांति लाई जा सकती है। इससे मरीजों को सटीक इलाज के साथ जल्दी इलाज की सुविधा भी उपलब्ध होगी। यह कहना है एनएएमएस सेल के स्टेट कन्वीनर डॉ. ध्रुव चौधरी का।
वह वीरवार को पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय और नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली की ओर से आयोजित एक दिवसीय सीएमई कम वर्कशॉप में चिकित्सकों व विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि सीएमई के लिए एनएमसी की ओर से चार क्रेडिट घंटे प्रदान किए गए हैं। सीएमई के मुख्य अतिथि उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि नए युग में एआई का महत्व बढ़ गया है। इससे कार्य के लिए योजना बनाने में काफी मदद मिलती है लेकिन यह इंसान की जगह नहीं ले सकता है। विशिष्ट अतिथि एनएएमएस के अध्यक्ष डॉ. दिगंबर बेहरा ने कहा कि बायो टेक्नोलॉजी मरीजों के इलाज में काफी मददगार होती है।
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एनएएमएस सेल हरियाणा की नोडल अधिकारी डॉ. माला कंबोज ने कहा कि वर्कशॉप का उद्देश्य एआई की मेडिकल के क्षेत्र में महता रहा। मेडिकल के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता के बारे में पता होना चाहिए। डॉ. अंजलि अग्रवाल ने रेडियोलॉजी में एआई की महता व एक्स-रे में इसके उपयोग की जानकारी दी।
डॉ. पूजा शर्मा ने डिजिटल हेल्थ, आईआईटी दिल्ली से डॉ. तवप्रीतेश सेठी ने इंजीनियरिंग व मेडिकल को जोड़कर बायोइंजीनियरिंग और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी से अवगत कराया। इस मौके पर कुलसचिव डॉ. रूपसिंह, डीन डॉ. अशोक चौहान, प्राचार्य डॉ. संजय तिवारी ने स्मृति चिह्न प्रदान कर अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर डॉ. वाईके गुप्ता, डॉ. मंदीप सचदेवा, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. हरनीत सिंह उपस्थित रहे।